रामभद्राचार्य की चरणदास महंत को खुली चुनौती बोले-दम है तो करें मेरी योग्यता का परीक्षण
NEWS IN SHORT
- जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने नेता प्रतिपक्ष को दी खुली चुनौती
- चिरमिरी में श्रीराम कथा महोत्सव में जगद्गुरु का तीखा बयान
- 22 भाषाओं में धाराप्रवाह, रामभद्राचार्य ने जताई अपनी क्षमता
- देश के विभाजन और राजनीति पर जगद्गुरु की आलोचना
- नेता प्रतिपक्ष के आरोपों का रामभद्राचार्य ने किया खंडन
NEWS IN DETAIL
Chirmiri : तुलसी पीठाधीवर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत को सार्वजनिक रूप से चुनौती दी। चिरमिरी में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव में उन्होंने कहा कि वे 22 भाषाओं में धाराप्रवाह बोल सकते हैं और उनका जगद्गुरुत्व किसी भी चुनौती से प्रभावित नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल धार्मिक शिक्षा और रामभक्ति का प्रचार करना है।
श्रीराम कथा महोत्सव में रामभद्राचार्य का संदेश
चिरमिरी के गोदरीपारा स्टेडियम में आयोजित महोत्सव में रामभद्राचार्य ने कहा कि उनके खिलाफ दिये गए आरोप निराधार हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, “मैं भाजपा का प्रचारक नहीं हूं। जो रामभक्त है, उसे मेरा आशीर्वाद मिलेगा। राजनीति के खेल में मेरा कोई हित नहीं है।” उन्होंने विधानसभा नेता प्रतिपक्ष के उस बयान का उल्लेख किया जिसमें उन्हें भाजपा का प्रचारक बताया गया था। रामभद्राचार्य ने इसे गंभीर आक्षेप बताया और सार्वजनिक रूप से चुनौती दी कि यदि किसी में उनकी योग्यता और जगद्गुरुत्व का परीक्षण करने की क्षमता है तो किया जाए।
नेता प्रतिपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि उन्हें किसी भी तरह की राजनीतिक आलोचना से डर नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि नेता प्रतिपक्ष ने पहले कहा था कि रामभद्राचार्य केवल भाजपा का प्रचारक हैं और उनके लिए जगद्गुरुत्व की मान्यता नहीं है। रामभद्राचार्य ने इसे गलत और असभ्य बयान बताया। उन्होंने कहा कि संतों और धार्मिक नेताओं के प्रति इस तरह की टिप्पणियां सामान्य ज्ञान और सम्मान की कमी को दर्शाती हैं।
देश के विभाजन और राजनीतिक परिस्थितियों पर टिप्पणी
रामभद्राचार्य ने राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर भी तीखी टिप्पणी की। उनका कहना था कि आजादी के बाद से ही देश को गर्त में ले जाया गया और टुकड़ों में विभाजित किया गया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का उल्लेख करते हुए कहा कि जोगी थोड़े अच्छे थे, लेकिन बाद के नेताओं ने देश की स्थिति बिगाड़ दी। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में नेता प्रतिपक्ष और उनके सहयोगी रामभक्तों के साथ असंवेदनशील रहे।
जगद्गुरुत्व की परिभाषा
रामभद्राचार्य ने यह भी बताया कि किसे जगद्गुरु कहा जाता है। उनका कहना है कि पहला शर्त ब्रह्मचर्य का पालन करना है। दूसरी शर्त है कि तीन प्रमुख ग्रंथों पर भाष्य लिखे जाएं। तीसरी शर्त यह है कि अखाड़े और महाकुंभ में उनका सम्मान किया जाए और स्नान सबसे पहले हो। रामभद्राचार्य ने कहा कि वे इन सभी मानकों को पूरा करते हैं और यही उनका जगद्गुरुत्व प्रमाणित करता है।
महोत्सव का आयोजन और धार्मिक संदेश
श्रीराम कथा महोत्सव में रामभद्राचार्य ने उपस्थित लोगों को रामभक्ति का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि जो राम से प्रेम करेगा, उसका जीवन संतोष और आशीर्वाद से भरा होगा। उन्होंने लोगों को यह भी याद दिलाया कि संतों और धार्मिक नेताओं के प्रति सम्मान बनाए रखना चाहिए। महोत्सव में स्थानीय नागरिकों और भक्तों की बड़ी संख्या में भागीदारी रही।
भविष्य की चुनौती और साफ संदेश
रामभद्राचार्य ने नेता प्रतिपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके जगद्गुरुत्व का परीक्षण करने की हिम्मत है तो खुले रूप से किया जाए। उन्होंने दोहराया कि वे 22 भाषाओं में धाराप्रवाह बोल सकते हैं और किसी भी प्रकार की राजनीतिक या व्यक्तिगत आलोचना से विचलित नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल धर्म, संस्कृति और रामभक्ति का प्रचार करना है।
FAQ
- जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने किसे चुनौती दी?
उन्होंने छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत को खुली चुनौती दी। - रामभद्राचार्य ने कितनी भाषाओं में धाराप्रवाह बोलने का दावा किया?
उन्होंने 22 भाषाओं में धाराप्रवाह बोलने का दावा किया। - नेता प्रतिपक्ष ने क्या आरोप लगाया था?
डॉ. चरणदास महंत ने कहा था कि रामभद्राचार्य भाजपा के प्रचारक हैं। - रामभद्राचार्य ने अपने जगद्गुरुत्व के बारे में क्या कहा?
उन्होंने बताया कि जगद्गुरु वही है जो ब्रह्मचर्य का पालन करे, तीन ग्रंथों पर भाष्य लिखे और अखाड़ों में सम्मानित हो।
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