अडानी रामगढ़ पहाड़ी को मिटाने पर आमादा, सीएम का राम की विरासत के विकास का वादा

Arun Tiwari | Jul 01, 2026, 15:20 IST
अडानी के कोल ब्लॉक से खतरे में भगवान राम की विरासत
नए कोल ब्लॉक की अनुमति के बाद छत्तीसगढ़ एक बार फिर सुलगने लगा है। लोगों का कहना है कि अडानी ने भगवान राम की स्मृतियों पर ही संकट डाल दिया है। रामगढ़ पहाड़ी के वजूद पर संकट पैदा हो गया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राम पर भारी पड़ीं अडानी की आरी
  • रामगढ़ पहाड़ के वजूद का खतरा
  • सीएम ने रामगढ़ को बताया सांस्कृतिक धरोहर
  • नए कोल ब्लॉक की अनुमति से संकट
  • अडानी के पास नए कोल ब्लॉक का ज़िम्मा

Raipur : छत्तीसगढ़ की रामगढ़ पहाड़ी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर मानी जाती है। इसका संबंध राम से है तो वहीं माना जाता है कि कालिदास की कालजयी कृति मेघदूतम की रचना भी यहीं की गई थी। केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ में नई कोयला खदान को मंजूरी दे दी है जिसका ज़िम्मा अडानी के पास है। इसकी मंजूरी से इसी रामगढ़ पहाड़ पर खतरा मंडरा रहा है।



लाखों पेड़ कटने और धमाकों से रामगढ़ का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा। वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए इसके पर्यटन के नक्शे पर उभारने के लिए विकास का वादा किया है। रामगढ़ महोत्व में आए सीएम ने 1 करोड़ रुपए तो तत्काल देने का ऐलान कर दिया। तो अब रामगढ़ बचेगा या कोल ब्लॉक सबसे बड़ा सवाल यही है।



रामगढ़ के वजूद पर संकट

नए कोल ब्लॉक की अनुमति से ऐतिहासिक रामगढ़ पहाड़ी पर वजूद का संकट मंडरा रहा है। कांग्रेस, सरकार,अडानी,बीजेपी और रामगढ़ के बीच यह कहानी उलझ गई है। दअसल यह मसला कोल ब्लॉक को लेकर है। यह केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक है।



यह खदान भी राजस्थान की है और एमडीओ अनुबंध अडानी कंपनी का है। इस खदान का 95 प्रतिशत क्षेत्र जंगल है। और इसमें 1742 हेक्टेयर वन भूमि में 5 लाख से अधिक पेड़ काटे जाएंगे । यह खदान सरगुजा के प्रसिद्ध रामगढ़ पहाड़ का भी विनाश करेगी । यह वही खदान है जिसके लिए तमनार से पेड़ कटना चालू हो गए हैं।



इस कोल ब्लॉक के धमाके से रामगढ़ की पहाड़ी दहल जाएगी और इसके टूटने का संकट आ जाएगा। इस कोल ब्लॉक की अनुमति को कांग्रेस की भूपेश सरकार ने रद्द किया था। लेकिन जून 2025 में बीजेपी सरकार ने इस कोल ब्लॉक से कोयला निकालने की अनुमति दे दी। यही कारण है कि यहां से कोयला निकालने के लिए होने वाले धमाकों से इसके करीब स्थित रामगढ़ पहाड़ी के अस्तित्व का संकट आ गया है।



सीएम ने बताया सांस्कृतिक धरोहर

रामगढ़ महोत्सव में पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि रामगढ़ सरगुजा की हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक चेतना, कला, आस्था और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात यह स्थल संस्कृति, इतिहास, साहित्य एवं पर्यटन का अद्भुत संगम है।



उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती केवल प्राकृतिक संपदा से ही समृद्ध नहीं है, बल्कि इसकी सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत भी विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान रखती है। रामगढ़ जैसी धरोहरें हमारी ऐतिहासिक अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव की अमूल्य निधि हैं, जिनका संरक्षण और संवर्धन हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।



उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन तथा पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें और स्थानीय लोगों को भी रोजगार के नए अवसर प्राप्त हों।



क्यों खास है रामगढ़ पहाड़ी

छत्तीसगढ़ के सरगुजा में ऐतिहासिक रामगढ़ पहाड़ी है। यह आदिवासियों की आस्था का केंद्र तो है ही लेकिन इसका एक और इतिहास है जो इसे खास बनाता हैं। रामगढ़ वो पहाड़ी है जहां भगवान राम दो बार आए। पहली बार विश्वामित्र के साथ दंडकारण्य के राक्षसों का वध करने और दूसरी वार वनवास के समय।



यहां के लोग बताते हैं कि वनवास के दौरान भगवान राम ने यहां पर काफी वक्त गुजारा है। महाकवि कालीदास भी यहां लंबे समय तक रहे हैं। कहा जाता है कि उनकी महान रचना मेघदूतम उन्होंने यहीं लिखी थी। इसके अलावा यहां पर आदिवासी समुदाय के कई देवी देवताओं का स्थान भी है। यहां पर प्राचीन नाट्यशाला भी है। यही कारण है कि रामगढ़ पहाड़ी को खास माना जाता है।



कोल ब्लॉक का हो रहा विरोध

पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टीएस सिंहदेव ने केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखकर रामगढ़ पहाड़ी के संरक्षण की मांग की थी। हसदेव अरण्य क्षेत्र में नए कोल प्रोजेक्ट के कारण सरगुजा की सांस्कृतिक धरोहर रामगढ़ पर्वत पर संभावित खतरे को देखते पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव की पहल पर रामगढ़ संरक्षण और संवर्द्धन समिति नाम के गैर राजनीतिक संस्था का गठन किया गया है।



टीएस सिंहदेव ने कहा कि केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक से रामगढ़ के अस्तित्व को खतरा है। सिंहदेव के साथ आदिवासी समुदाय भी इस कोल ब्लॉक का विरोध कर रहा है। विष्णुदेव सरकार बनने के बाद पुराने रिपोर्ट से उलट नई रिपोर्ट पेश कर कोल ब्लॉक को मंजूरी दी गई। पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने रामगढ़ की ऐतिहासिक धरोहर को बचाने की मुहिम शुरू की है।



सिंहदेव ने कहा कि खदान के कारण ऐतिहासिक रामगढ़ पहाड़ के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे के खिलाफ अगर खड़ा नहीं हुआ तो खुद को माफ नहीं कर पाऊंगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में रामगढ़ पर्वत की विरासत को बचाने और हाथियों के लिये बनाए जा रहे लेमरू प्रोजेक्ट के लिए तत्कालीन केते एक्सटेंशन कोल प्रोजेक्ट को खारिज कर दिया था।



निष्कर्ष : रामगढ़ बचेगा या कोल ब्लॉक

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कोल ब्लॉक बचेगा या रामगढ़। कोल ब्लॉक अडानी के पास है और उसको पर्यावरण मंत्रालय से कोयला खनन और 4 लाख से ज्यादा पेड़ काटने की अनुमति मिल गई है। यदि यह कोयला खनन होता है तो इसका सीधा असर रामगढ़ पर पड़ेगा। वहीं सीएम कहते हैं कि रामगढ़ सांस्कृतिक धरोहर है यहां पर राम की पुण्य स्मृतियां हैं, इसको विश्व के नक्शे पर लाया जाएगा।



अब यह दोनों बातें कैसे मुमकिन होंगी यह विचार का विषय है। पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल कह चुके हैं कि यदि कोल ब्लॉक से रामगढ़ को खतरा हुआ तो कितना भी बड़ा आदमी हो कोयला नहीं निकालने दिया जाएगा। लेकिन यह कोल ब्लॉक अडानी है इसलिए ऐसा कैसे होगा इसका जवाब तो फिलहाल सियासत के पास नहीं होगा।



छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन शुरू

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के साथ कई गांवों के आदिवासी समुदाय के लोग लगातार आंदोलित हैं। अति महत्वपूर्ण जैव विविधता संपन्न क्षेत्र में खनन से जंगल, जल स्रोत और उनकी परंपरागत आजीविका पर गहरा असर होगा। हाथियों और अन्य वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट होगा और बड़े पैमाने पर पेड़ कटाई से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ जाएगा, इस मुद्दे पर महीनों से आंदोलन चल रहा है, कई ग्राम सभाओं ने विरोध प्रस्ताव भी पारित किये, लेकिन सरकार में किसी की सुनवाई नहीं है।



FAQ

  1. रामगढ़ पहाड़ी पर खतरा क्यों मंडरा रहा है?
    केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक में खनन, पेड़ों की कटाई और विस्फोटों से रामगढ़ पहाड़ी, जंगल और जल स्रोतों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
  2. केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक का संचालन कौन करेगा?
    यह कोल ब्लॉक राजस्थान सरकार से जुड़ा है, जबकि खनन संचालन का एमडीओ अनुबंध अडानी कंपनी के पास बताया गया है।
  3. रामगढ़ पहाड़ी को बचाने के लिए क्या मांग की जा रही है?
    आदिवासी समुदाय, सामाजिक संगठन और कांग्रेस नेता कोल ब्लॉक की मंजूरी रद्द करने तथा रामगढ़ को संरक्षित सांस्कृतिक धरोहर घोषित करने की मांग कर रहे हैं।

यह खबरें भी पढ़े...

हसदेव पर तीसरा हमला! खनन के लिए अडानी को मंजूरी, हाई कंजर्वेशन ज़ोन में 4.48 लाख पेड़ों की बलि



मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जारी करेंगे 10वीं-12वीं के परिणाम , मंत्रालय में होगी घोषणा



टीएस सिंहदेव ने फिर की पीसीसी चीफ की दावेदारी, बैज चाहते हैं दोबारा मौका, भूपेश खेमे में हलचल



भगवान राम पर भारी अडानी की आरी, वन गमन पथ और जानकी रसोई को मिटाने की तैयारी



Tags:
  • टीएस सिंहदेव
  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
  • कोल ब्लॉक
  • अडानी
  • रामगढ़ पहाड़ी