ED ने कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल को किया गिरफ्तार, पांच दिन की रिमांड मंजूर
छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED (Enforcement Directorate) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने प्रदेश कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रहे रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार किया है।
इससे पहले आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो यानी EOW (Economic Offences Wing) ने उन्हें गिरफ्तार कर पूछताछ की थी। उन्हें रायपुर कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने 5 दिन की ED रिमांड मंजूर की।
इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोर्ट पहुंचकर रामगोपाल अग्रवाल से मुलाकात की और ED की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे परेशान करने की कार्रवाई बताया। यह गिरफ्तारी छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में एक बड़ा घटनाक्रम मानी जा रही है।
रामगोपाल अग्रवाल पर क्या हैं आरोप
EOW के मुताबिक आरोप है कि शराब घोटाला, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग से जुड़े पैसों को ठिकाने लगाने में रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका थी। इसी वजह से एजेंसी ने आगे की पूछताछ के लिए अतिरिक्त समय मांगा है।
यह आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और इनकी पुष्टि अदालत में साक्ष्यों के आधार पर होनी बाकी है।
तीन साल फरार रहने के बाद किया था सरेंडर
कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल करीब तीन साल तक फरार रहे थे। 8 जुलाई को उन्होंने EOW कार्यालय पहुंचकर सरेंडर किया था।
इसके बाद मेडिकल परीक्षण कर उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से 9 जुलाई को 17 जुलाई तक की पुलिस रिमांड मंजूर की गई थी। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उन्हें 5 अगस्त तक EOW की कस्टडी में भेज दिया गया था।
3400 करोड़ के शराब घोटाले की जांच
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला केस में जांच एजेंसियां कथित तौर पर सरकारी शराब कारोबार में अनियमितताओं, अवैध वसूली और पैसों के लेन-देन से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही हैं। एजेंसियों का आरोप है कि शराब कारोबार में एक संगठित नेटवर्क के जरिए बड़ी रकम का लेन-देन हुआ।
ED इस मामले में पहले भी कई लोगों से पूछताछ और कार्रवाई कर चुकी है। अब रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है।
क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले की जांच ED कर रही है। ED ने ACB (Anti Corruption Bureau) में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है।
ED की जांच में सामने आया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया था।
डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर बेची गई शराब
ED की तरफ से दर्ज कराई गई FIR की जांच ACB कर रही है। ACB से मिली जानकारी के मुताबिक साल 2019 से 2022 तक सरकारी शराब दुकानों से अवैध शराब डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर बेची गई।
इससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है, ऐसा एजेंसी का आरोप है।
अब आगे क्या होगा
रामगोपाल अग्रवाल को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां ED उनकी रिमांड की मांग कर सकती है। अगर रिमांड मंजूर होती है, तो एजेंसी उनसे विस्तृत पूछताछ करेगी।
आने वाले दिनों में इस मामले में और नाम और तथ्य सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है।
FAQ
- छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामला क्या है?
ED के मुताबिक तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए यह घोटाला अंजाम दिया गया। FIR में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। - रामगोपाल अग्रवाल ने सरेंडर कब किया था?
वे करीब तीन साल तक फरार रहे थे और 8 जुलाई को EOW कार्यालय पहुंचकर सरेंडर किया था। इसके बाद उन्हें अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर भेजा गया था।
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