रविशंकर महाराज बनाम CBI: फोन टैपिंग पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Harrison Masih | Jun 16, 2026, 11:14 IST
रविशंकर महाराज बनाम CBI: हाईकोर्ट में सुनवाई 2026
हाईकोर्ट में ‘रविशंकर जी महाराज बनाम CBI’ मामले में फोन इंटरसेप्शन से जुड़े सबूतों की वैधता पर बड़ा सवाल उठा है। याचिका में नए दूरसंचार नियम के तहत फोन टैपिंग आदेश की समीक्षा प्रक्रिया का पालन न होने का आरोप है। कोर्ट ने दोनों पक्षों से जवाब मांगा है।

समझें क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रविशंकर महाराज बनाम CBI मामले की सुनवाई हुई। याचिका में CBI की फोन टैपिंग से जुटाए सबूतों की कानूनी वैधता पर सवाल उठाया गया है। नए दूरसंचार नियम 2024 के तहत टैपिंग आदेश को 7 कार्य दिवसों में रिव्यू कमेटी के सामने रखना जरूरी होता है। ऐसा न होने पर सबूत अमान्य हो सकते हैं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 24 घंटे और CBI को 24 जून 2026 तक जवाब देने का निर्देश दिया है।



डिवीजन बेंच में हुई सुनवाई

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में यह मामला सुना गया। याचिकाकर्ता ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी CBI (CBI - Central Bureau of Investigation) के खिलाफ यह याचिका दायर की है।



याचिका में नए दूरसंचार नियम 2024 के तहत की गई फोन टैपिंग से जुटाए सबूतों को चुनौती दी गई है।



क्या है कानूनी दलील

याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट मनु शर्मा ने दूरसंचार नियम 2024 के नियम 3(3)(b) का हवाला दिया।



उनका कहना है कि 28 जून 2025 को जो फोन इंटरसेप्शन यानी टैपिंग का आदेश जारी हुआ था, उसे 7 कार्य दिवसों के भीतर रिव्यू कमेटी के सामने पुष्टि के लिए रखना जरूरी था।



यदि कमेटी तय समय में उसकी पुष्टि नहीं करती तो वह आदेश अपने आप बेअसर हो जाता है। ऐसी स्थिति में उस अवधि के बाद की गई टैपिंग से जुटाए गए किसी भी सबूत को ट्रायल कोर्ट में नहीं माना जा सकता।



याचिकाकर्ता ने क्या कहा

याचिकाकर्ता ने मद्रास हाईकोर्ट के एक अहम फैसले यानी द डायरेक्टर, CBI बनाम पी. किशोर का हवाला भी दिया। हालांकि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पाया कि मुख्य याचिका में 28 जून 2025 के इंटरसेप्शन आदेश को सीधे चुनौती नहीं दी गई थी।



बाद में एक अंतरिम आवेदन देकर यह अतिरिक्त आधार जोड़ने की अनुमति मांगी गई थी। नए नियमों के उल्लंघन की बात लिखित रूप में स्पष्ट नहीं थी।



कोर्ट ने क्या निर्देश दिए

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि मौखिक रूप से रखी सभी दलीलें एक नए और स्पष्ट शपथ पत्र में दर्ज कर 24 घंटे के भीतर कोर्ट में दाखिल करें। साथ ही उसकी कॉपी CBI के अधिवक्ता वैभव ए. गोवर्धन को भी सौंपें।



CBI को निर्देश दिया गया है कि केंद्र सरकार और जांच एजेंसी के सक्षम प्राधिकारी से स्पष्ट निर्देश लेकर 24 जून 2026 तक हर हाल में अपना जवाबी हलफनामा कोर्ट में पेश करें। मामले की अगली सुनवाई 24 जून 2026 को होगी।



एक और याचिका भी जुड़ी है

CBI के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इसी FIR (FIR - First Information Report) से जुड़े एक सह-आरोपी की याचिका भी हाईकोर्ट में विचाराधीन है। उसे भी 24 जून को सूचीबद्ध किया जा चुका है।



क्यों है यह मामला अहम

नए दूरसंचार नियम 2024 के तहत फोन टैपिंग के आदेश की समय पर रिव्यू न होने पर सबूत अमान्य होने का यह संभवतः पहला बड़ा कानूनी सवाल है।



यदि हाईकोर्ट याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला करता है तो CBI की टैपिंग से जुटाए सबूतों की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठ सकते हैं। यह मामला भविष्य में जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ी मिसाल बन सकता है।



FAQ

  1. रविशंकर महाराज बनाम CBI मामला क्या है?
    यह मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चल रही एक याचिका से जुड़ा है, जिसमें फोन इंटरसेप्शन (कॉल टैपिंग) के जरिए जुटाए गए साक्ष्यों की कानूनी वैधता को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि नए दूरसंचार नियम 2024 के तहत तय प्रक्रिया और रिव्यू कमेटी की मंजूरी के बिना की गई टैपिंग अवैध है, इसलिए उससे मिले सबूत अदालत में स्वीकार नहीं किए जाने चाहिए।
  2. दूरसंचार नियम 2024 में फोन टैपिंग के क्या नियम हैं?
    नियम 3(3)(b) के तहत टैपिंग आदेश को 7 कार्य दिवसों के भीतर रिव्यू कमेटी के सामने रखना जरूरी है। कमेटी की पुष्टि न होने पर आदेश अपने आप निष्प्रभावी हो जाता है। इसके बाद जुटाए सबूत ट्रायल कोर्ट में मान्य नहीं होंगे।


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