छत्तीसगढ़ के निगम-मंडलों में भर्तियां अटकी, नए नियम बनेंगे तब होंगी नियुक्तियां

Arun Tiwari | May 07, 2026, 11:12 IST
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छत्तीसगढ़ सरकार ने निगम-मंडलों और स्वायत्त संस्थाओं में नई नियुक्तियों पर रोक लगाई है। भर्ती नियमों के बिना नियुक्तियां नहीं होंगी। विभागों को नए नियम बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

RAIPUR : छत्तीसगढ़ राज्य शासन ने प्रदेश के निगमों, मंडलों और स्वायत्त संस्थाओं में होने वाली नई नियुक्तियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जब तक संबंधित संस्थाओं के लिए विधिवत भर्ती नियम तैयार नहीं हो जाते, तब तक किसी भी प्रकार की सीधी भर्ती या नियुक्ति प्रक्रिया संचालित नहीं की जाएगी। सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और एकरूपता लाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।



जीएडी ने जारी क्या आर्डर:

जीएडी द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि कई निगमों और स्वायत्त संस्थाओं में बिना तय भर्ती नियमों के ही नियुक्तियां की जा रही थीं। शासन ने इसे गंभीर विषय मानते हुए अब सभी विभागों को अपने-अपने अधीन संस्थानों के लिए “आदर्श भर्ती नियम” तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इन नियमों के तैयार होने तक नई भर्ती प्रक्रिया पर रोक प्रभावी रहेगी।



क्या है आर्डर में:

अवर सचिव एसके सिंह की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि भर्ती नियमों का मसौदा तय समयसीमा के भीतर तैयार करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी होगी। यदि समय पर नियम नहीं बनाए जाते हैं, तो इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित प्रशासनिक विभाग को जवाबदेह माना जाएगा। शासन का मानना है कि स्पष्ट भर्ती प्रक्रिया लागू होने से नियुक्तियों में पारदर्शिता बढ़ेगी और अनियमितताओं पर रोक लगेगी।



आरक्षण नियम लागू होंगे:

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई नियमावली बनाते समय वर्तमान आरक्षण नीति और राज्य शासन में लागू अन्य प्रावधानों को यथावत रखा जाएगा। यानी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए जो आरक्षण व्यवस्था पहले से लागू है, वही आगे भी प्रभावी रहेगी।



विभागों को भर्ती नियम तैयार करने के लिए सक्षम माना गया है और इसके लिए उन्हें बार-बार सामान्य प्रशासन विभाग के पास फाइल भेजने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि अंतिम रूप से तैयार नियमों की एक प्रति जीएडी को उपलब्ध कराना अनिवार्य रहेगा।



आउटसोर्सिंग से चल रहा काम:

राज्य में लंबे समय से निगम-मंडलों और विभिन्न संस्थाओं में नियमित भर्ती के बजाय संविदा, आउटसोर्सिंग और अनियमित नियुक्तियों का दायरा लगातार बढ़ता गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में करीब सात लाख अनियमित और आउटसोर्स कर्मचारी विभिन्न विभागों की व्यवस्थाएं संभाल रहे हैं, जबकि नियमित कर्मचारियों की संख्या लगभग चार लाख के आसपास रह गई है। इससे सरकारी कामकाज का बड़ा हिस्सा अस्थायी कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है।



ये हैं विभागवार आंकड़े:

सरकारी तंत्र में लगभग 60 प्रतिशत कार्यभार अनियमित कर्मचारियों के कंधों पर होने की बात भी सामने आई है। यही स्थिति निगम-मंडलों और स्वायत्त संस्थाओं में भी देखने को मिल रही है। कई विभागों में नियमित पदों पर सीधी भर्ती नहीं होने के कारण आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर निर्भरता लगातार बढ़ी है।



विभागवार आंकड़ों पर नजर डालें तो ऊर्जा विभाग में करीब 27 हजार आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। नगरीय प्रशासन विभाग में इनकी संख्या लगभग 25 हजार बताई गई है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग में करीब 9 हजार, सहकारिता विभाग में 7 हजार 600 और आबकारी विभाग में लगभग 7 हजार 500 कर्मचारी आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत काम कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि स्थायी भर्ती की बजाय अस्थायी व्यवस्थाओं का दायरा तेजी से बढ़ा है।



एक समान भर्ती नियम:

सरकार का मानना है कि एक समान भर्ती नियम लागू होने से नियुक्ति प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी और भविष्य में विवाद या अनियमितताओं की संभावना कम होगी। साथ ही विभागों में आवश्यक पदों की भर्ती तय मानकों के अनुसार हो सकेगी। शासन के इस फैसले को आने वाले समय में प्रशासनिक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



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