धान में हर स्तर पर लूट, लगाम लगी तो 50 फीसदी से ज्यादा बचेगा राशन, सरकार का दावा क्यों हो रहा फेल

VINAY VERMA | Feb 12, 2026, 14:11 IST
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rice production corruption chhattisgarh
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छत्तीसगढ़ आज भ्रष्टाचार के ऐसे भंवर में फंसा है, जहां किसान की मेहनत और सरकारी खजाने पर दो पैरों वाले चूहे डाका डाल रहे हैं। धान खरीदी केंद्रों से लेकर राशन की दुकानों तक फैले इस मकड़जाल में हर स्तर पर सेंधमारी हो रही है।

News In Short

  • छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में शामिल है।
  • प्रदेश में 25 लाख से अधिक किसान धान बेचते हैं।
  • करीब 80 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की खेती होती है।
  • इस साल लगभग 39 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई है।
  • सरकार 2739 खरीदी केंद्रों के जरिए धान लेती है।

News In Detail

छत्तीसगढ़ में धान से चावल बनने की पूरी प्रक्रिया फिर सवालों में है। सरकारें बदलती रहीं, नियम-कायदे सख्त होने के दावे होते रहे, लेकिन हकीकत यह है कि चूहे की धान पार्टी आज भी बदस्तूर जारी है। धान खरीदी से लेकर चावल के वितरण तक हर स्तर पर ऐसी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं कि यदि सचमुच लगाम लग जाए तो प्रदेश का 50 प्रतिशत से अधिक राशन बच सकता है।

धान खरीदी को लेकर राज्य में पहले भी बड़े घोटाले उजागर हो चुके हैं। नान घोटाले में 36 हजार करोड़ रुपए तक की हेराफेरी के आरोप लगे थे। अब एक बार फिर आंकड़े और जमीनी हालात संकेत दे रहे हैं कि भ्रष्टाचार का यह सिलसिला थमा नहीं है, बल्कि नए तरीकों से फल-फूल रहा है। द सूत्र ने पड़ताल की तो सामने आया कि खरीदी केंद्र से मंडी, गोदाम से मिलिंग और राशन दुकान तक खेल चल रहा है।

मंडी स्तर पर खेल

धान खरीदी की शुरुआत मंडी से होती है। किसान जब धान बेचने लाता है तो सबसे पहले सूखत के नाम पर 2 प्रतिशत धान कम कर लिया जाता है। हर साल किसान संगठन इस पर सवाल उठाते हैं। सरकार शेड, चबूतरा और जल्द उठाव का वादा करती है, लेकिन जमीनी हालात नहीं बदलते हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि खुले में रखे धान के कारण नमी, धूप और बारिश से नुकसान होता है। इसका खामियाजा सीधे किसान को उठाना पड़ता है। इस स्तर पर होने वाली लापरवाही भी गड़बड़ी की पहली सीढ़ी मानी जाती है।

संग्रहण केंद्र में सरकारी चूहे सबसे ज्यादा सक्रिय

धान खरीदी के बाद अगला पड़ाव संग्रहण केंद्र होता है। यहीं से चूहे की धान पार्टी की सबसे ज्यादा चर्चा होती है। गोदामों में चूहों द्वारा धान खाने की घटनाएं आम हैं। बोरियों में कंकड़, मिट्टी और खराब धान मिलाने की शिकायतें यहीं से आती हैं।

बारिश के मौसम में रखरखाव की लापरवाही से धान भीग जाता है। आंकड़ों के मुताबिक इस स्तर पर नुकसान 5 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। इसी साल अलग-अलग केंद्रों से 500 करोड़ रुपए से अधिक की गड़बड़ी की खबरें सामने आ चुकी हैं।

छत्तीसगढ़ के किसान नेता तेजराम विद्रोही का कहना है कि संग्रहण केंद्रों पर ही सबसे बड़ा खेल होता है। उनके मुताबिक यहीं से धान गायब होता है। बाद में चूहों के नाम पर फाइलें बंद कर दी जाती हैं। ट्रांसपोर्टेशन के दौरान लोडिंग अनलोडिंग के दौरान भी बड़े स्तर पर नुकसान बता गड़बड़ी की जाती है।

मिलिंग स्तर पर बड़ा हेरफेर

धान से चावल बनने की प्रक्रिया यानी मिलिंग को भी सबसे संवेदनशील कड़ी माना जाता है। आंकड़ों के अनुसार इस स्तर पर करीब 10 प्रतिशत धान में हेरफेर होता है। आरोप है कि कई मिलर्स सरकारी धान से बने अच्छे चावल को बाजार में ऊंचे दाम पर बेच देते हैं।

इसके बदले घटिया क्वालिटी का चावल खरीदकर शासन की मिलीभगत से नागरिक आपूर्ति निगम के जरिए राशन दुकानों तक पहुंचा दिया जाता है। जांच में कई बार इस तरह की गड़बड़ियों का खुलासा भी हुआ है। नान घोटाले के दौरान भी मिलिंग में बड़े स्तर पर हेरफेर की बातें सामने आई थीं।

राशन दुकानों तक पहुंचते बिक जाता है चावल

प्रदेश में करीब 71 लाख राशन कार्डधारी हैं। चर्चा आम है कि बड़ी संख्या में कार्डधारी सरकारी राशन दुकानों से मिलने वाला चावल 17 से 20 रुपए प्रति किलो की दर से व्यापारियों को बेच देते हैं।

स्थानीय स्तर पर कई बार इस पर रोक लगाने की कोशिश हुई, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। नतीजा यह है कि सरकारी चावल खुले बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाता है।

50 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान का दावा

किसान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र शर्मा का दावा है कि प्रदेश में धान की गड़बड़ी हर स्तर पर हो रही है। उनका कहना है यदि मंडी, गोदाम, मिलिंग और राशन वितरण इन चारों स्तरों को जोड़कर देखें तो नुकसान 50 प्रतिशत से भी ज्यादा बैठता है।

भाजपा के पिछले कार्यकाल में 36 हजार करोड़ का नान घोटाला इसी सिस्टम की देन था। नई सरकार में भी यह सिलसिला जारी है

चूहा एक छोटा सा भाग

उप मुख्यमंत्री अरुण साव का कहना है कि मंडी से मिलर तक धान पहुंचने के आंकड़ों में अंतर कई कारणों से आता है। इसमें एक चूहा भी है। हालांकि वह बहुत छोटा सा पार्ट है। धान से चावल वितरण तक के चरण में कुछ अधिकारी गड़बड़ी करते हैं उन पर कार्रवाई की जाती है। हम लगातार इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

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