छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र बनाने नया नियम, GAD ने जारी किया आदेश
छत्तीसगढ़ में पुराने राजस्व रिकॉर्ड के कारण जाति प्रमाण पत्र बनवाने में आ रही परेशानी को लेकर सरकार ने रास्ता साफ किया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के पूर्वजों के राजस्व अभिलेखों में ‘चमार’ या ‘मोची’ दर्ज है, वे जांच के आधार पर ‘रोहिदास’ जाति के नाम से प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आवेदक को विधिवत आवेदन करना होगा और सक्षम अधिकारी रिकॉर्ड की जांच करेंगे।
नाम के बीच अंतर
सामान्य प्रशासन विभाग से यह आदेश जारी किया गया है। जिलों में प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई है। इससे उन परिवारों को राहत मिल सकती है, जिनके पुराने दस्तावेजों में दर्ज जाति नाम और वर्तमान में इस्तेमाल किए जाने वाले नाम के बीच अंतर है।
एक ही SC सूची में नाम
सरकार के आदेश के तहत छत्तीसगढ़ के लिए अधिसूचित अनुसूचित जातियों की सूची का हवाला दिया गया है। सूची में चमार, चमारी, बेरवा, भांबी, जाटव, मोची, रैगर, नोना, रोहिदास, रामनामी, सतनामी, सूर्यवंशी, सूर्यराम नामी, अहिरवार, मांगन और रैदास समेत संबंधित जाति नाम शामिल हैं। इसी आधार पर शासन ने प्रमाण पत्र जारी करने की स्थिति स्पष्ट की है।
रिकॉर्ड में नाम अलग, परेशानी बरकरार
कुछ जिलों में लोगों के पुराने राजस्व रिकॉर्ड में चमार या मोची दर्ज होने की वजह से रोहिदास नाम से प्रमाण पत्र बनवाने में दिक्कत आ रही थी। आवेदकों को अपने पुराने दस्तावेजों और वर्तमान जाति पहचान के बीच संबंध साबित करने की जरूरत पड़ रही थी। अब सरकार ने कहा है कि निर्धारित जांच प्रक्रिया पूरी होने पर योग्य आवेदक को रोहिदास जाति का प्रमाण पत्र दिया जा सकता है।
जांच के बाद ही मिलेगा प्रमाण पत्र
यह आदेश बिना जांच सभी आवेदकों को प्रमाण पत्र देने की छूट नहीं देता। सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र में बताए गए जांच बिंदुओं के अनुसार मामले का परीक्षण किया जाएगा। जांच में आवेदक के रोहिदास जाति से संबंधित होने की पुष्टि होने पर सक्षम अधिकारी प्रमाण पत्र जारी कर सकेंगे।
आरक्षण पर नहीं पड़ेगा असर
शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि चमार, मोची और रोहिदास नाम संबंधित अनुसूचित जाति सूची के एक ही सरल क्रमांक 14 में शामिल हैं। इसलिए इस प्रक्रिया से संवैधानिक अधिकारों या आरक्षण संबंधी प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं होगा। आदेश का उद्देश्य रिकॉर्ड में दर्ज नाम और प्रमाण पत्र में इस्तेमाल होने वाले नाम के बीच आ रही परेशानी को निर्धारित जांच प्रक्रिया के जरिए दूर करना है।
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