CM के इलाके में साढ़े 14 करोड़ की सड़क योजना, LOP महंत के जिले को नहीं मिला धेला
समझें क्या है पूरा मामला
- मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना में 87 करोड़ खर्च
- साल 2024-25 और 2025-26 में खर्च राशि
- सड़क बनाने, संधारण करने और मरम्मत करने के लिए खर्च फंड
- सीएम के इलाके में सबसे ज्यादा खर्च
- नेता प्रतिपक्ष के इलाके में एक रुपया भी खर्च नहीं
छत्तीसगढ़ में सियासत की सड़क बन रही है। सरकार ने पिछले दो साल में गांवों को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए 87 करोड़ रुपए खर्च किए। मुख्यमंत्री सड़क योजना के तहत नई सड़कों का निर्माण और खराब सड़कों की मरम्मत की गई। यह सड़क भी चीन्ह चीन्ह कर दी गई। मंत्रियों के इलाकों पर सड़कें खूब बनीं, लेकिन कांग्रेस विधायकों के जिलों में कंजूसी बरती गई।
इसका सबसे ज्यादा पैसा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के जशपुर जिले में खर्च किया गया। यहां पर सड़क बनाने में 14 खर्च किए गए जबकि नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत के इलाके सक्ती को एक धेला भी नहीं मिला। यहां पर एक इंच सड़क का निर्माण भी नहीं हुआ।
जशपुर पर मेहरबानी,महंत को कौड़ी नहीं :
छत्तीसगढ़ में पिछले दो वर्षों में ग्रामीण इलाकों को मुख्य मार्गों से जोड़ने और जर्जर सड़कों के उन्नयन के लिए सरकार ने करीब 87 करोड़ रुपए खर्च किए। लेकिन इन खर्चों के वितरण को लेकर विपक्ष सरकार पर पक्षपात के आरोप लगा रहा है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिले जशपुर को सबसे अधिक प्राथमिकता मिली। यहां सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों पर करीब 14.5 करोड़ रुपए खर्च किए गए। हालांकि वे सीएम हैं और इस नाते उनके इलाके को प्राथमिकता मिलेगी भी लेकिन इसके उलट नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के सक्ती जिले को सड़क बनाने के लिए एक रुपया भी नहीं मिला।
सड़क की मरम्मत के लिए जरुर 9 रुपए खर्च कर दिए गए। आंकड़े बताते हैं कि मुख्यमंत्री सड़क योजना के तहत जिन जिलों में बीजेपी के मंत्री और प्रभावशाली नेता हैं, वहां सड़क निर्माण के लिए अपेक्षाकृत अधिक राशि स्वीकृत की गई।
वहीं कांग्रेस के प्रतिनिधित्व वाले कई जिलों को या तो बेहद कम बजट मिला या पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। हालांकि कांग्रेस विधायक कवासी लखमा के जिले सुकमा में अच्छी खासी राशि दी गई। ये अलग बात है कि बस्तर सरकार की नजरों में प्राथमिकता पर है।
इन जिलों में सड़कों पर सबसे ज्यादा खर्च :
सीएम - जशपुर - 14 करोड़ 53 लाख रुपए
ओपी चौधरी - रायगढ़ - 8 करोड़ 63 लाख रुपए
विजय शर्मा - कबीरधाम - 8 करोड़ 32 लाख रुपए
राजेश अग्रवाल - सरगुजा - 11 करोड़ 64 लाख रुपए
रामविचार नेताम - बलरामपुर - 8 करोड़ 28 लाख रुपए
केदार कश्यप - नारायणपुर - 2 करोड़ 60 लाख रुपए
गजेंद्र यादव - दुर्ग - 2 करोड़ रुपए
अमर अग्रवाल - बिलासपुर - 1 करोड़ 40 लाख रुपए
प्रवीण कुमार बीजेपी विधायक - जीपीएम - 3 करोड़ 28 लाख रुपए
आशाराम नेताम बीजेपी विधायक - कांकेर - 5 करोड़ 48 लाख रुपए
इन जिलों में सबसे कम खर्च :
चरणदास महंत - सक्ती - जीरो
विक्रम मंडावी कांग्रेस विधायक - बीजापुर - जीरो
फूलसिंह राठिया कांग्रेस विधायक - कोरबा - जीरो
जांजगीर चांपा - जीरो
कांग्रेस विधायक :
राघवेंद्र कुमार सिंह
ब्यास कश्यप
बालेश्वर साहू
शेषराज हरवंस
चातुरी नंद - महासमुंद - 91 लाख रुपए
कविता प्राणलहरे - बिलाईगढ़ - 94 लाख रुपए
कवासी लखमा - सुकमा - 4 करोड़ 60 लाख रुपए
विपक्ष ने साधा निशाना :
विपक्ष सरकार पर विकास कार्यों में राजनीतिक भेदभाव का आरोप लगा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि योजनाओं का लाभ जरूरत और विकास की प्राथमिकता के आधार पर मिलना चाहिए, न कि राजनीतिक निष्ठा के आधार पर।
विपक्ष का सवाल है कि यदि मुख्यमंत्री सड़क योजना पूरे प्रदेश के लिए है, तो फिर कुछ जिलों को पूरी तरह बाहर क्यों रखा गया। सरकारी पक्ष का कहना है कि सड़क परियोजनाओं का चयन तकनीकी मानकों, प्रस्तावों की उपलब्धता और प्रशासनिक स्वीकृति के आधार पर किया जाता है।
निष्कर्ष :
मुख्यमंत्री सड़क योजना के तहत राशि के वितरण को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। विपक्ष इसे विकास में क्षेत्रीय और राजनीतिक असमानता का उदाहरण बता रहा है, जबकि सरकार पर अब यह स्पष्ट करने का दबाव है कि किन मानकों के आधार पर जिलों के बीच इतना बड़ा अंतर रखा गया।
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