साय कैबिनेट में फेरबदल की चर्चा तेज, नॉन परफॉर्मर होंगे बाहर, बड़े विभाग बदलेंगे
RAIPUR : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अब नवीन कैबिनेट नजर आएगी। कैबिनेट में फेरबदल की चर्चाएं फिर शुरु हो गई हैं। हालांकि पहले भी यह चर्चाएं चली हैं लेकिन इस बार कुछ ज्यादा ही हलचल है। सीएम विष्णुदेव साय के लगातार हो रहे दिल्ली दौरों ने इन चर्चाओं को और पुख्ता कर दिया है।
सीएम की राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात कुछ इसी तरफ इशारा कर रही है। मोदी कैबिनेट के विस्तार के बाद साय कैबिनेट में बदलाव नजर आएगा। नितिन नवीन छत्तीसगढ़ के लंबे समय तक प्रभारी रहे हैं। यहां की राजनीतिक नब्ज पर उनका हाथ है। अब जो कैबिनेट बनेगी वो नितिन नवीन के हिसाब की होगी। नॉन परफॉर्मर मंत्री बाहर होंगे तो कुछ नए चेहरे शामिल होंगे। बड़े विभागों में भी बदलाव होने वाला है।
तीन से चार मंत्रियों की छुट्टी :
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन अब उन राज्यों पर फोकस करने लगे हैं जिनका आधा कार्यकाल पूरा हो गया है। इनमें मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़ और राजस्थान की खासतौर पर चर्चा है। ढाई साल पूरे होने के बाद अब छत्तीसगढ़ सरकार में बड़े बदलाव की चर्चा है।
विष्णुदेव साय कैबिनेट होने वाले इस बदलाव में कुछ मंत्रियों की छुट्टी होगी तो कुछ नए चेहरे शामिल होंगे। नितिन नवीन की कार्यकारिणी बन चुकी है और मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार भी होने वाला है। इसके बाद साय कैबिनेट का नंबर आएगा। सूत्रों की मानें तो सीएम के दिल्ली दौरों में इस संबंध में प्रमुख नेताओं से चर्चा हुई है।
सूत्र बताते हैं कि नॉन परफॉर्मर रहने वाले तीन से चार मंत्रियों की कैबिनेट से विदाई होगी। इन मंत्रियों के पास बेहद अहम मंत्रालय हैं। इन मंत्रियों का विधानसभा से लेकर अपने क्षेत्र तक में प्रदर्शन कुछ खास नजर नहीं आया है। इसके अलावा लेन देन की चर्चाएं भी बहुत हो रही हैं। इन सब रिपोर्ट के आधार पर ही मंत्रियों को बाहर किया जाएगा।
कुछ बड़े विभाग बदलेंगे :
मंत्रियों को बाहर करने के अलावा कुछ मंत्रियों के विभाग भी बदले जाएंगे। कुछ बड़े विभागों में काम अप टू मार्क नहीं माना जा रहा। इन विभागों को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। ऐसे में जो नए चेहरे आएंगे उनको यह विभाग दिए जा सकते हैं। साय कैबिनेट में सीएम समेत कुल 14 मंत्री हैं। यह कैबिनेट की फुल स्ट्रैंथ है।
अगर नए मंत्रियों को शामिल करना है तो कुछ मंत्रियों को बाहर करना पड़ेगा। महिला चेहरे में लता उसेंडी की चर्चा है। वहीं पुराने चेहरों में मैनेजमेंट में माहिर अमर अग्रवाल को लिया जा सकता है।
सीएम ने दिया फीडबैक :
दिल्ली ने सरकार और संगठन के कामकाज का फीडबैक लिया है। जिलों में मंत्रियों की सक्रियता से लेकर अधिकारियों के रवैये, कार्यकर्ताओं की नाराजगी, जनता की शिकायतों और संगठन के साथ सरकार के तालमेल जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री साय की बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात हुई।
रायपुर लौटने के बाद जब मुख्यमंत्री से प्रदेश प्रभारी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा यहां तो कोई न कोई संगठन प्रभारी रहेगा ही। मुख्यमंत्री का यह जवाब छोटा था, लेकिन इसके राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। प्रदेश प्रभारी संगठन और सरकार के बीच समन्वय में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में प्रभारी का बदलाव केवल संगठनात्मक नियुक्ति नहीं माना जाता, बल्कि इसे प्रदेश बीजेपी की आगे की रणनीति से भी जोड़कर देखा जाता है।
मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड बना सबसे बड़ा मुद्दा :
प्रदेश संगठन की बैठक में प्रभारी मंत्रियों से उनके जिलों का फीडबैक लिया गया। उनसे पूछा गया कि सरकार की योजनाएं जमीन पर कितनी पहुंची हैं, जनता की शिकायतों का समाधान कितना हुआ,कार्यकर्ताओं के साथ उनका संवाद कैसा है और संगठन के साथ तालमेल किस स्तर पर है।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ जिलों से कार्यकर्ताओं की नाराजगी की बातें भी सामने आई हैं। खासकर मंत्रियों और अधिकारियों के रवैये को लेकर कार्यकर्ताओं की शिकायतों को संगठन ने गंभीरता से लिया है। यही वजह है कि अब राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहा है कि क्या ढाई साल के रिपोर्ट कार्ड के आधार पर कैबिनेट में बदलाव हो सकता है।
बीजेपी के लिए 2028 विधानसभा चुनाव बेहद अहम है। उसकी तैयारी शुरू हो चुकी है। पिछली विधानसभा में जिन सीटों पर पार्टी को हार मिली थी, उन्हें मजबूत करना संगठन की प्राथमिकताओं में शामिल है।बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना, कमजोर क्षेत्रों में नेताओं की जिम्मेदारी तय करना और सरकार की योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
यानी ढाई साल बाद लिया जा रहा फीडबैक केवल अब तक के कामकाज का हिसाब नहीं है। यह इस बात की भी परीक्षा है कि अगले चुनाव तक सरकार और संगठन को किस तरह तैयार किया जाए।
FAQ
- छत्तीसगढ़ कैबिनेट में फेरबदल क्यों हो रहा है?
ढाई साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद मंत्रियों के कामकाज और प्रदर्शन (रिपोर्ट कार्ड) के आधार पर यह बदलाव किया जा रहा है। - छत्तीसगढ़ कैबिनेट में किन मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है?
सूत्रों के अनुसार, जिन 3 से 4 मंत्रियों का विधानसभा से लेकर अपने क्षेत्र तक में प्रदर्शन कमजोर रहा है और जिनकी कार्यशैली को लेकर शिकायतें मिली हैं, उनकी छुट्टी हो सकती है।
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