सक्ती दोहरे हत्याकांड : तांत्रिक साधना के चक्कर में पूरे परिवार को आजीवन कारावास
NEWS IN SHORT
- सक्ती: तांदुलडीह दोहरे हत्याकांड में चारों आरोपियों को आजीवन कारावास
- अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के चक्कर में दो सगे भाइयों की हत्या
- मां और तीन परिजनों पर लगे गंभीर आरोप, अदालत ने सुनाई सख्त सजा
- परिवार के धार्मिक अनुष्ठानों के पीछे छुपा हत्याकांड का सच
- कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: तांदुलडीह हत्या मामले में न्याय कायम
NEWS IN DETAIL
Sakti।छत्तीसगढ़ सक्ती जिले के ग्राम तांदुलडीह में अक्टूबर 2024 में हुई दोहरे हत्याकांड की सुनवाई में न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। न्यायालय ने मृतकों की मां फिरीतबाई सिदार, बहनों अमरिका और चंद्रिका सिदार तथा भाई विशाल सिदार को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक आरोपी पर एक-एक हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया।
संदिग्ध परिस्थितियों में हुई दो भाइयों की मौत
मृतक विक्रम (विकास) और विक्की सिदार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे प्रदेश का ध्यान खींचा। पुलिस जांच में सामने आया कि परिवार तंत्र साधना और अंधविश्वास में लिप्त था। बाराद्वार थाना क्षेत्र के इस गांव में सात दिनों तक घर का एक कमरा पूरी तरह बंद रखा गया, जिसमें लगातार पूजा, हवन और धार्मिक अनुष्ठान चल रहे थे।
परिवार की तांत्रिक गतिविधियां
जांच में यह तथ्य उजागर हुआ कि फिरीतबाई सिदार अपने तीन बेटों और दो बेटियों के साथ लगातार धार्मिक अनुष्ठान कर रही थी। कमरे में उज्जैन के एक कथित बाबा की तस्वीर रखी गई थी और परिवार के सदस्य उपवास के साथ पूजा में जुटे थे। पड़ोसियों ने कई दिनों तक दरवाजे के भीतर से आवाजें और चीख-पुकार सुनी, जिससे संदेह पैदा हुआ।
घटना का खौफनाक मंजर
17 अक्टूबर 2024 को डायल-112 के जरिए सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। दरवाजा खोलने पर दोनों भाई अचेत अवस्था में पड़े मिले। अमरिका सिदार कथित रूप से मंत्र जाप कर रही थी, जबकि फिरीतबाई, चंद्रिका और विशाल अन्य अनुष्ठानों में लीन थे। दोनों भाइयों को अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित किया।
आरोपियों का दावा और पुलिस की शंका
पुलिस पूछताछ में परिवार के सदस्यों ने दावा किया कि दोनों युवक सत्संग सुनने गए हैं और विशेष साधना से वापस जीवित किए जा सकते हैं। इस बयान से पुलिस को पूरे घटनाक्रम पर संदेह हुआ।
मृतकों के विरोध और हत्या की योजना
जांच में पता चला कि अमरिका सिदार ने कई वर्ष पहले उज्जैन से एक गुरु की दीक्षा ली थी। इसके बाद परिवार में तंत्र साधना और अंधविश्वास आधारित गतिविधियाँ बढ़ गईं। मृतक दोनों भाई इस तरह की प्रथाओं का लगातार विरोध कर रहे थे।
पुलिस का दावा है कि विरोध के चलते परिवार के अन्य सदस्यों ने उन्हें विशेष पूजा में शामिल होने के बहाने बुलाया और हत्या कर दी। हत्या के बाद पूरी घटना को धार्मिक साधना का रूप देने का प्रयास किया गया।
घटनास्थल से बरामद महत्वपूर्ण सामग्री
एफएसएल, पुलिस और चिकित्सकीय टीम ने संयुक्त जांच की। घटनास्थल से पूजा सामग्री, हवन सामग्री, धार्मिक साहित्य, नोटबुक, जड़ी-बूटियां, कीटनाशक और कपड़े बरामद किए गए। इन साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया।
न्यायालय की कार्रवाई
अपर सत्र न्यायाधीश प्रशांत कुमार शिवहरे की अदालत में अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्य, गवाहों के बयान और जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की। सभी तथ्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने चारों आरोपियों को दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अपर लोक अभियोजक उदय वर्मा ने शासन की ओर से प्रभावी पैरवी की और न्यायालय ने उनका पक्ष भी गंभीरता से सुना। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि अंधविश्वास और तंत्र साधना के नाम पर हत्या जैसी गंभीर घटना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
IMP FACTS
स्थान: ग्राम तांदुलडीह, सक्ती जिला, छत्तीसगढ़।
घटना समय: अक्टूबर 2024।
मृतक: विक्रम (विकास) सिदार और विक्की सिदार, दो सगे भाई।
आरोपी: मां फिरीतबाई सिदार, बहनें अमरिका और चंद्रिका सिदार, भाई विशाल सिदार।
हत्या का तरीका: तंत्र साधना और धार्मिक अनुष्ठान के बहाने बुलाकर हत्या।
सजा: चारों आरोपी दोषी, आजीवन सश्रम कारावास और 1‑1 हजार रुपये अर्थदंड।
पुलिस जांच: पूजा सामग्री, हवन सामग्री, नोटबुक, जड़ी-बूटियां, कीटनाशक बरामद।
न्यायालय: अपर सत्र न्यायाधीश प्रशांत कुमार शिवहरे की अदालत।
मुख्य कारण: मृतक भाईयों का तंत्र साधना और अंधविश्वास का विरोध।
सामाजिक संदेश: अंधविश्वास और तांत्रिक प्रथाओं में परिवार को शामिल करने से गंभीर अपराध हो सकता है।
समाज और कानून के लिए संदेश
यह मामला समाज में बढ़ते अंधविश्वास और तंत्र साधना पर स्पष्ट चेतावनी है। न्यायालय ने दिखाया कि किसी भी धार्मिक या आध्यात्मिक बहाने के पीछे अपराध छिपा हो, तो कानून सख्त कार्रवाई करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के अंधविश्वास और तांत्रिक गतिविधियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। परिवार और समाज को चाहिए कि वे इस तरह के खतरनाक अनुष्ठानों से दूर रहें और बच्चों एवं युवाओं को सुरक्षित रखें।
FAQ
- तांदुलडीह दोहरे हत्याकांड में आरोपी कौन हैं?
इस मामले में चार मुख्य आरोपी हैं। मृतकों की मां फिरीतबाई सिदार, उनकी दो बहनें अमरिका और चंद्रिका सिदार, और भाई विशाल सिदार। अदालत ने सभी को दोषी मानते हुए आजीवन सजा सुनाई। आरोप है कि इन चारों ने तंत्र साधना और धार्मिक अनुष्ठानों के बहाने अपने ही परिवार के दो बेटों की हत्या की थी। - दोनों भाई कौन थे और उनकी जान कैसे गई?
मृतक दो सगे भाई थे, विक्रम (विकास) और विक्की सिदार। परिवार में बढ़ते अंधविश्वास और तंत्र साधना के कारण दोनों भाई इन प्रथाओं का विरोध करते थे। पुलिस जांच के मुताबिक, उन्हें पूजा और गुरु मंत्र के बहाने बुलाया गया और फिर हत्या कर दी गई। घटना के समय वे अचेत अवस्था में पाए गए और अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। - न्यायालय ने आरोपियों को क्या सजा दी और क्यों?
न्यायालय ने चारों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा प्रत्येक आरोपी पर एक-एक हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया। अदालत ने यह फैसला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और पुलिस जांच रिपोर्टों के आधार पर लिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अंधविश्वास और तंत्र साधना के नाम पर हत्या जैसी गंभीर घटना को किसी भी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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