सक्ती राजपरिवार यौन उत्पीड़न केस: सुप्रीम कोर्ट ने युवराज को भेजा नोटिस

Harrison Masih | Jul 28, 2026, 19:03 IST
सक्ती राजपरिवार यौन उत्पीड़न केस
छत्तीसगढ़ के सक्ती राजपरिवार से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और आरोपी को नोटिस जारी किया है। पीड़िता ने हाईकोर्ट द्वारा आरोपी को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ SLP दायर की है। आरोपी राजपरिवार का युवराज है।

समझें क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के चर्चित राजपरिवार से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। हाईकोर्ट ने आरोपी धर्मेंद्र सिंह उर्फ धर्मेंद्र सिदार को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। शीर्ष अदालत ने अब राज्य सरकार और आरोपी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है।



यह मामला सक्ती के पूर्व रियासतदार परिवार से जुड़ा होने के कारण शुरू से ही चर्चा में रहा है। निचली अदालत में आरोपी को दोषी ठहराया गया था, लेकिन हाईकोर्ट ने उसे बरी कर दिया था।



अब यह मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पहुंच गया है। आने वाले समय में इस पर अहम फैसला आ सकता है।



जनवरी 2022 में दर्ज हुई थी शिकायत

यह घटना 9 जनवरी 2022 की बताई जाती है। पीड़िता ने सक्ती थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि जब वह घर में अकेली थी, तब आरोपी पिछले रास्ते से उसके कमरे में घुसा।



आरोप है कि आरोपी धर्मेंद्र सिदार, जो पीला महल का निवासी है और सक्ती के पूर्व रियासत में युवराज के तौर पर राज्याभिषेक हो चुका था, ने पीड़िता का गला दबाकर उसके साथ जबरदस्ती की। शिकायत में यह भी कहा गया था कि आरोपी ने पीड़िता के कपड़े फाड़े और गंभीर यौन उत्पीड़न का प्रयास किया।



फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सुनाई थी सजा

सक्ती के फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 21 मई 2025 को इस मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी धर्मेंद्र सिंह को दोषी करार दिया था। कोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता (IPC - Indian Penal Code) की धारा 376(1) के तहत 7 साल की सश्रम कारावास और 10,000 रुपए का जुर्माना लगाया था।



इसके साथ ही IPC की धारा 450 के तहत भी आरोपी को 5 साल की सश्रम कारावास और 5,000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। यह फैसला निचली अदालत के स्तर पर पीड़िता के पक्ष में आया था।



हाईकोर्ट ने किया था बरी

इसके बाद यह मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंचा, जहां हाईकोर्ट ने आरोपी धर्मेंद्र सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया। इस फैसले ने निचली अदालत के फैसले को पूरी तरह पलट दिया।



हाईकोर्ट के इस फैसले से पीड़िता संतुष्ट नहीं हुई और उन्होंने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।



सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई SLP

पीड़िता ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका यानी SLP (Special Leave Petition) दायर की। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के डिवीजन बेंच ने सुनवाई की।



सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता को याचिका दायर करने की अनुमति देते हुए इसमें हुई देरी को माफ कर दिया। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ राज्य और आरोपी दोनों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।



अब आगे क्या होगा

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और आरोपी को जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इस अवधि के बाद मामले में आगे की सुनवाई हो सकती है।



यह मामला अब एक बार फिर सुर्खियों में है। आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि हाईकोर्ट का बरी करने का आदेश बरकरार रहेगा या पलटा जाएगा।



FAQ

  1. सक्ती राजपरिवार यौन उत्पीड़न मामला क्या है?
    यह मामला छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के पूर्व रियासतदार (राजपरिवार) से जुड़े आरोपी धर्मेंद्र सिंह उर्फ धर्मेंद्र सिदार के खिलाफ दर्ज कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों से संबंधित है। जनवरी 2022 में पीड़िता की शिकायत के बाद मामला दर्ज हुआ। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराकर सजा सुनाई थी, लेकिन बाद में बिलासपुर हाईकोर्ट ने उसे बरी कर दिया।


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