राज्यसभा सांसद संदीप पाठक का भाजपा में विलय बाद बढ़ा विरोध, घर की दीवार पर लिखा गद्दार
NEWS IN SHORT
- संदीप पाठक का भाजपा में विलय, छत्तीसगढ़ में विरोध।
- गद्दार शब्द से अपमानित, कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ा।
- पाठक की पार्टी बदली, विश्वास संकट उत्पन्न हुआ।
- भाजपा को छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बढ़त मिली।
- पाठक को साख वापस पाने की चुनौती का सामना।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ की राजनीति में उस वक्त उबाल आ गया, जब आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व दिग्गज रणनीतिकार और राज्यसभा सांसद संदीप पाठक के पैतृक गांव बटहा में भारी विरोध प्रदर्शन हुआ। 24 अप्रैल को राघव चड्ढा के नेतृत्व में 7 सांसदों के भाजपा में ऐतिहासिक विलय के बाद, पाठक अब अपनों के ही निशाने पर हैं। गुस्साए कार्यकर्ताओं ने पाठक के घर की दीवारों पर काले अक्षरों में ‘गद्दार’ लिख दिया और नारेबाजी करते हुए कहा कि जिसे छत्तीसगढ़ अपना 'रोल मॉडल' मानता था, वह 'अवसरवादी' निकला।
मुंगेली से सत्ता के गलियारों तक का सफर और बिखराव
दरअसल संदीप पाठक को छत्तीसगढ़ के चाणक्य के रूप में पहचान मिल रही थी। स्थानीय कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि वे छत्तीसगढ़ में 'आप' के चेहरे के रूप में राज्य का नेतृत्व करेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने राघव चड्ढा के साथ बीजेपी ज्वाइन कर ली। जिसके बाद उनके पैतृक गांव बटहा में घर की दीवारों पर 'गद्दार' और 'सैप्टिक टैंक' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है। जो की यह दर्शाता है कि स्थानीय लोग इसे केवल पार्टी बदलना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़िया विश्वास के साथ घात मान रहे हैं।
शून्य की ओर लौटती आप
छत्तीसगढ़ में आम आदमी पार्टी पहले से ही अपना आधार तलाश रही थी। संदीप पाठक के भाजपा में जाने से प्रदेश इकाई को तीन बड़े झटके लगे हैं
संगठनात्मक ढांचा: पाठक ही छत्तीसगढ़ में पार्टी के संगठन विस्तार की धुरी थे। उनके जाने से जमीनी कार्यकर्ता नेतृत्व विहीन महसूस कर रहे हैं।
भरोसे का संकट: कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जिसे उन्होंने बदलाव का प्रतीक माना, उसने व्यक्तिगत लाभ के लिए विचारधारा से समझौता कर लिया।
राजनीतिक नैरेटिव: आप के स्थानीय नेताओं का कहना है कि पाठक ने छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान को दिल्ली और पंजाब की राजनीति के आगे छोटा कर दिया है।
छत्तीसगढ़ में भाजपा के लिए नया समीकरण
संदीप पाठक के भाजपा में शामिल होने से छत्तीसगढ़ भाजपा को एक 'रणनीतिक बढ़त' मिली है:
भविष्य की राह: चुनौती या अवसर?
मुंगेली में उनके घर के बाहर हुआ प्रदर्शन यह चेतावनी है कि छत्तीसगढ़ की जनता और राजनीति 'पैराशूट लैंडिंग' या 'अवसरवाद' को आसानी से स्वीकार नहीं करती।
भारतीय राजनीति में बड़े उलटफेर के बाद अब राज्यसभा की तस्वीर बदल गई है। सभापति ने राघव चड्ढा, संदीप पाठक और हरभजन सिंह समेत 'आप' के 7 बागी सांसदों के भाजपा में विलय को औपचारिक मंजूरी दे दी है।
राज्यसभा में बढ़ा भाजपा का कद
राज्यसभा सचिवालय की आधिकारिक मंजूरी के बाद 'आप' के 7 सांसद अब भाजपा का हिस्सा हैं। इस विलय से उच्च सदन में भाजपा की सदस्य संख्या बढ़कर 113 हो गई है। इस रणनीतिक मजबूती से अब सरकार के लिए राज्यसभा में महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराना और भी आसान हो जाएगा।
निष्कर्ष
संदीप पाठक के लिए चुनौती अब केवल दिल्ली की राजनीति में खुद को साबित करना नहीं है, बल्कि अपने ही गृह राज्य छत्तीसगढ़ में अपनी खोई हुई साख को वापस पाना है। जहाँ एक ओर भाजपा उन्हें थिंक टैंक मानकर स्वागत कर रही है, वहीं बटहा गाँव की गलियों में गूँजते नारे उनके राजनीतिक करियर पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं।
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