सरगुजा बैंक घोटाला: 28 करोड़ के गबन की जांच अब ED के हाथ, रायपुर तलब की गई फाइलें
Ambikapur. सरगुजा जिले के जिला केंद्रीय सहकारी बैंक में करोड़ों रुपए के घोटाले का मामला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस घोटाले की जांच शुरू कर दी है, और इसकी जांच रिपोर्ट रायपुर तलब की गई है। सूत्रों के अनुसार, अंबिकापुर से सभी जरूरी फाइलें रायपुर भेज दी गई हैं।
बैंक में घोटाला करीब एक साल पहले सामने आया था, जब तत्कालीन सरगुजा कलेक्टर, विलास भोस्कर ने बैंक की शंकरगढ़ और कुसमी ब्रांचों के खातों की जांच करवाई थी। जांच में करीब 28 करोड़ रुपए की गड़बड़ी सामने आई थी। इस मामले में बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी, और 12 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था।
घोटाले की शुरुआत और खुलासा:
घोटाला तब सामने आया जब शंकरगढ़ और कुसमी शाखाओं के खातों की जांच में बड़ी अनियमितताएँ पाई गईं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, शंकरगढ़ शाखा के बैंक मैनेजर अशोक कुमार सोनी ने बैंक में फर्जी खाते खोलकर बड़ी मात्रा में पैसे की हेराफेरी की। इन फर्जी खातों से नकद राशि की निकासी के अलावा कई ऑनलाइन ट्रांसफर भी किए गए।
ये हैं मुख्य आरोपी
अशोक सोनी करीब 10 साल तक विभिन्न शाखाओं में पदस्थ रहे और फर्जी खातों के जरिए बड़ी रकम की हेराफेरी की। उनकी गतिविधियों के तहत आदिम जाति सहकारी समिति जमड़ी का बैंक अकाउंट बिना किसी दस्तावेज के खोला गया, जिसमें 19 करोड़ 24 लाख रुपए जमा किए गए और 19 करोड़ 22 लाख 73 हजार रुपए निकाल लिए गए। यह राशि किसानों के खातों और पंचायतों के खातों से ट्रांसफर कर जमा की गई थी।
कुसमी शाखा में धोखाधड़ी:
कुसमी शाखा में नरेगा धनेशपुर का बोगस अकाउंट खोला गया, जिसमें 3 करोड़ 19 लाख रुपए का ट्रांजैक्शन किया गया। जनपद पंचायत शंकरगढ़ का भी बोगस अकाउंट खोला गया, जिसमें 91 लाख 57 हजार रुपए की राशि जमा कर उसे निकाल लिया गया।
अन्य संदिग्ध ट्रांजैक्शन:
जमुना अलंकार मंदिर अंबिकापुर के नाम पर एक करोड़ 82 लाख रुपए RTGS के माध्यम से ट्रांसफर किए गए। इन ट्रांजैक्शनों में से 44 का बैंक वाउचर नहीं मिला। कई अन्य संदिग्ध खाते पाए गए, जिनमें भारी ट्रांजैक्शन किए गए थे, जैसे अशोक कुमार सोनी के व्यक्तिगत खाते में 1 करोड़ 36 लाख रुपए, कंप्यूटर ऑपरेटर प्रकाश कुमार सिंह के खाते में 4 लाख 64 हजार रुपए, और महामाया कंस्ट्रक्शन कंपनी के खाते में 30 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए थे।
आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई:
घोटाले के मामले में 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से 4 बैंक अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है, जबकि 3 कर्मचारी घोटाला उजागर होने से पहले रिटायर हो चुके थे।
ED की जांच और मनी लॉन्ड्रिंग:
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस घोटाले की जांच शुरू कर दी है, और इसमें मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की भी जांच की जाएगी। ED की जांच के बाद घोटाले से जुड़े अन्य तथ्यों का भी खुलासा होने की संभावना है। सहकारी बैंक के CEO श्रीकांत चंद्राकर ने बताया कि ED की टीम अभी तक सरगुजा नहीं आई है, लेकिन उन्होंने जांच से संबंधित सभी रिपोर्ट शनिवार को ED को भेज दी हैं।
कार्रवाई:
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सरगुजा के तत्कालीन कलेक्टर विलास भोस्कर ने बैंक के घोटालों की जांच के लिए ED या CBI से जांच कराने की अनुशंसा की थी। इसके बाद राज्य शासन ने ED को पत्र भेजा और प्रवर्तन निदेशालय ने जांच के लिए मंजूरी दे दी।
निष्कर्ष
सहकारी बैंक के घोटाले (Surguja Bank Scam) के इस मामले की जांच अब ED द्वारा की जा रही है, और इसमें जो भी नए तथ्य सामने आएंगे, उनसे कई अन्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों में भी संभावित गड़बड़ियों का खुलासा हो सकता है। यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े नेटवर्क से भी जुड़ा हो सकता है, जो आगे की जांच में सामने आ सकता है।
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