SECL की कोल माइंस पर गांव वालों का हल्ला बोल, प्रशासन की दादागिरी, सरपंच ने दिया साथ तो एसडीएम ने दी बर्खास्त करने की धमकी
Raipur. छत्तीसगढ़ में कोयले पर संग्राम मचा हुआ है। प्रशासन की सख्ती और गांववालों के विरोध ने संघर्ष के हालात पैदा कर दिए हैं। प्रशासन सरपंच को बर्खास्त करने पर उतारु हो गया है। एससीएल की कोल माइंस का विरोध आस पास के गांव वाले कर रहे हैं। जमीन अधिग्रहण के बाद सर्वे करने पहुंचे सरकारी अमले का जमकर विरोध हुआ।
वहां की एसडीएम को यह नागवार गुजरा। एसडीएम ने सरपंच को तत्काल नोटिस थमा दिया और बर्खास्त करने की धमकी भी दे दी। नोटिस में लिखा है कि आप बताएं कि आपको सरपंच क्यों बना रहने दिया जाए। इस कोल माइंस के विरोध में सूरजपुर में संघर्ष की स्थिति बन गई है।
SECL कोल माइंस का विरोध तेज:
छत्तीसगढ़ में कोयला खनन को लेकर एक बार फिर टकराव की स्थिति बन गई है। SECL की प्रस्तावित कोल माइंस (SECL Coal Mines) के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध अब बड़ा रूप लेता जा रहा है। इस विरोध में गांव के सरपंच भी खुलकर ग्रामीणों के साथ खड़े हो गए हैं। मामला सूरजपुर जिले के उन गांवों से जुड़ा है जहां SECL ने कोयला खनन के लिए जमीन अधिग्रहण की है।
जब सरकारी अमला सर्वे के लिए मौके पर पहुंचा तो स्थानीय ग्रामीणों ने इसका जोरदार विरोध किया। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन और आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है, जबकि उन्हें न तो पर्याप्त मुआवजा मिला है और न ही पुनर्वास की ठोस व्यवस्था की गई है। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और सर्वे कार्य को रोक दिया।
स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब गांव मदन नगर की सरपंच सुंदरी बाई ने भी ग्रामीणों का समर्थन करते हुए प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध किया। सरपंच का कहना है कि जब तक गांव के लोगों को न्याय नहीं मिलेगा, वे खनन परियोजना का विरोध करते रहेंगे।
एसडीएम ने दी बर्खास्तगी की धमकी :
एसडीएम ने सरपंच सुंदरी बाई को कारण बताओ नोटिस थमाकर उन्हें पद से बर्खास्त करने की धमकी दी है। नोटिस के मुताबिक 2 अप्रैल 2026 को जब प्रशासनिक टीम DGPS सर्वे के लिए मौके पर पहुंची तब बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एकत्र होकर सर्वे टीम को घेर लिया। कुछ लोगों ने हथियारनुमा वस्तुएं लेकर टीम को डराने-धमकाने की कोशिश की और निरीक्षण कार्य में बाधा डाली।
स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि अधिकारियों को पुलिस बल बुलाना पड़ा। इस पूरे विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व ग्राम पंचायत मदननगर की सरपंच सुंदरी बाई द्वारा किया गया। उनके नेतृत्व में ग्रामीणों ने न केवल सर्वे कार्य में बाधा डाली बल्कि शासकीय कार्य में व्यवधान उत्पन्न किया, जो नियमों का उल्लंघन है। SDM प्रतापपुर ने सरपंच को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
नोटिस में उनसे पूछा गया है कि क्यों न उनके खिलाफ छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए पद से हटाया जाए। सरंपच को एसडीएम न्यायालय में उपस्थित होकर जवाब देने को कहा गया है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि वे नहीं आईं तो एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों का विरोध जारी :
एसईसीएल की इन कोल माइंस (coal mining) का विरोध करीब आधा दर्जन गांवों के लोग कर रहे हैं। कुछ जगह यह आरोप लगे कि विरोध में सरपंच साथ नहीं देते और वे प्रशासन के साथ हो जाते हैं। इन आरोपों के चलते सरपंच सुंदरी बाई भी लोगों के साथ विरोध करने पहुंच गईं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रहा है।
उनका कहना है कि वे अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे हैं। लेकिन उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
क्या कहता है प्रशासन और एसईसीएल :
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि खनन परियोजना सभी कानूनी प्रक्रियाओं के तहत संचालित की जा रही है और विकास कार्यों में बाधा डालना उचित नहीं है। सरपंच का कर्तव्य है कि वे कानून का पालन करें और शांति व्यवस्था बनाए रखें। उधर SECL प्रबंधन ने भी अपने पक्ष में कहा है कि परियोजना से क्षेत्र का विकास होगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और सरकार को राजस्व मिलेगा।
कंपनी का दावा है कि प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजा और पुनर्वास की प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार की जा रही है। हालांकि जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। ग्रामीणों और प्रशासन के बीच बढ़ता टकराव यह संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गंभीर रूप ले सकता है। फिलहाल सूरजपुर में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
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