लेबर कोड के विरोध का छत्तीसगढ़ में मिला-जुला असर, कोयला खदानें ठप तो शहरों में बाजार खुले

छत्तीसगढ़ में नए लेबर कोड के विरोध का असर दिखने को मिल रहा है। रायगढ़ और कोरबा में कोयला खदानें बंद रहीं, जबकि रायपुर-बिलासपुर में जनजीवन सामान्य रहा।

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Arun Tiwari
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Raipur. केंद्र सरकार के चार नए श्रम कानूनों के विरोध में बुलाए गए भारत बंद का छत्तीसगढ़ में मिला-जुला असर देखने को मिला। ट्रेड यूनियनों और श्रमिक संगठनों के आह्वान पर कई औद्योगिक और खनन क्षेत्रों में कामकाज प्रभावित हुआ।

वहीं, जबकि राजधानी रायपुर समेत अधिकांश शहरी इलाकों में जनजीवन सामान्य बना रहा। व्यापारिक संगठनों के समर्थन न देने के कारण दुकानें, बाजार, पेट्रोल पंप और शैक्षणिक संस्थान खुले रहे।

रायगढ़ में सबसे ज्यादा असर

रायगढ़ जिले में बंद का सबसे ज्यादा असर दिखा। यहां कोल खदान के पास ट्रेड यूनियन के सदस्यों ने सुबह से ही धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसके चलते जिले की चार कोयला खदानों में कामकाज पूरी तरह बंद रहा और कोयला परिवहन ठप हो गया।

यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि नए लेबर कोड मजदूर विरोधी हैं और इससे श्रमिकों के अधिकार कमजोर होंगे। उनका कहना है कि नए कानूनों में कार्य समय 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे करने और फिक्स्ड टर्म रोजगार जैसे प्रावधान हैं, जिससे स्थायी नौकरियों पर खतरा है।

कोरबा, भिलाई में प्रदर्शन

कोरबा जिले में भी राष्ट्रव्यापी औद्योगिक हड़ताल का असर देखने को मिला। दीपका, कुसमुंडा और मानिकपुर कोयला खदानों में एक दिवसीय हड़ताल के कारण काम प्रभावित रहा। इस दौरान श्रमिक नेताओं के साथ कांग्रेस कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि भी खदानों में पहुंचे और हड़ताल को समर्थन दिया।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह समर्थन श्रमिक सम्मान और अधिकारों की रक्षा के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भिलाई स्टील प्लांट के मेन गेट के बाहर भी नए श्रम कानूनों के विरोध में ट्रेड यूनियनों ने प्रदर्शन किया।

यूनियन पदाधिकारी और सदस्य नारेबाजी करते हुए केंद्र सरकार से चारों लेबर कोड वापस लेने की मांग कर रहे हैं। मनेन्द्रगढ़ में एचएमएस, एटक, इंटक और सीटू सहित कई श्रमिक संगठनों ने हड़ताल का समर्थन किया और इसे मजदूर हितों के खिलाफ बताया।

रायपुर, बिलासपुर में खास असर नहीं

वहीं दूसरी ओर रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और जांजगीर-चांपा जैसे जिलों में बंद का खास असर नहीं दिखा। रायपुर में चैंबर ऑफ कॉमर्स और अन्य व्यापारिक संगठनों का समर्थन नहीं मिलने से मालवीय रोड, एमजी रोड, सदर बाजार, पंडरी कपड़ा मार्केट सहित प्रमुख बाजारों में दुकानें खुली रहीं।

सड़कों पर ट्रैफिक सामान्य रहा और रोजमर्रा की गतिविधियां जारी रहीं। बिलासपुर में भी गोल बाजार, सदर बाजार और बुधवारी जैसे प्रमुख इलाकों में कारोबार सामान्य रहा। पेट्रोल पंप, स्कूल और कॉलेज खुले रहे, हालांकि ट्रेड यूनियनों ने नेहरू चौक पर विरोध प्रदर्शन का एलान किया।

जांजगीर-चांपा में अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस की रैली एसडीएम कार्यालय तक निकाली गई। साथ ही, कर्मचारियों ने अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा, लेकिन जिले में बंद का असर नहीं दिखा।

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