छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की फटकार…जान जोखिम में डालने वाले जवानों से भेदभाव क्यों

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाइयों में शामिल पुलिस जवानों को उनका हक नहीं मिल पाया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अधिकारियों को दो महीने के भीतर उचित कदम उठाने के लिए निर्देश दिए हैं।

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Rajesh Lahoti
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chhattisgarh high court naxal soldiers discrimination

News In Short

  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस जवानों के भेदभाव पर सख्त टिप्पणी की है।

  • कांकेर में किए गए ऑपरेशन में 29 नक्सली मारे गए थे।

  • 187 जवानों में से 54 को ही प्रमोशन मिला, बाकी को नजरअंदाज किया गया है।

  • अदालत ने डीजीपी को दो महीने में फैसले का आदेश दिया है।

  • याचिकाकर्ताओं का आरोप कि हम भी ऑपरेशन में उसी खतरे के बीच शामिल थे।

News In Detail

बिलासपुर: नक्सल मोर्चे पर जान जोखिम में डालने वाले जवानों के साथ भेदभाव क्यों? छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में देश की सबसे बड़ी एंटी नक्सल कार्रवाइयों में से एक में शामिल पुलिस जवानों को उनका हक आज तक नहीं मिला है। अब इस पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तीखा रुख अपनाया है।

अदालत ने DGP को दिया निर्देश

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि वीरता दिखाने वाले जवानों की फाइलें धूल फांकती नहीं रह सकती हैं। अदालत ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है। 

कहा है कि वे आउट ऑफ टर्न प्रमोशन से जुड़े लंबित मामलों पर दो महीने के भीतर कानून के मुताबिक फैसला करें। यह अहम आदेश न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू ने दीपक कुमार नायक एवं अन्य बनाम राज्य शासन मामले में पारित किया है।

कांकेर का वो ऑपरेशन, जिसने नक्सलियों की कमर तोड़ी

याचिकाकर्ता दीपक कुमार नायक, अग्नु राम कोर्राम और संगीत भास्कर तीनों कांकेर जिले में पदस्थ पुलिस जवान हैं।। इन तीनों जवानों ने कोर्ट में बताया कि 15 और 16 अप्रैल 2024 को बीएसएफ के साथ मिलकर जो बड़ा एंटी नक्सल ऑपरेशन चलाया गया था। इसमें वे मोर्चे पर थे। इस ऑपरेशन में 40 से 50 खतरनाक माओवादियों से सीधी मुठभेड़ हुई थी।

यह ऑपरेशन कांकेर के कालपर, हापाटोला, छेटेबेठिया इलाके में हुआ था। इसमें 29 नक्सली ढेर किए गए थए। इनमें 15 पुरुष और 14 महिला नक्सली शामिल थीं। इतना ही नहीं मौके से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया गया था। यह ऑपरेशन सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी माना गया है।

187 जवान, लेकिन इनाम सिर्फ 54 को

अदालत में बताया गया कि इस अभियान में कुल 187 पुलिसकर्मी शामिल थे। शासन ने पुलिस विनियम 70(क) के तहत सिर्फ 54 जवानों को ही आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि हम भी उसी ऑपरेशन में उसी खतरे के बीच शामिल थे। हमें क्यों नजरअंदाज किया गया है?

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