12 फरवरी को भारत बंद का छत्तीसगढ़ में दिखेगा असर, कोयला खदानें रहेगी बंद

आज 12 फरवरी को देशभर में ट्रेड यूनियनों और जन संगठनों ने हड़ताल का आह्वान किया है। हड़ताल का मकसद श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना है। छत्तीसगढ़ में भी इस हड़ताल का बड़ा असर देखने मिलेगा। इस दौरान कोल इंडिया की खदानों का काम बंद रहेगा।

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Aman Vaishnav
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nationwide strike impact chhattisgarh february 12

News In Short

  • 12 फरवरी को देशभर में ट्रेड यूनियनों और जन संगठनों की हड़ताल है।

  • रायपुर में मशाल रैली निकालकर हड़ताल को सफल बनाने का संकल्प लिया गया है।

  • छत्तीसगढ़ में कोल इंडिया की खदानें आज बंद रहेंगी।

  • देशभर में करीब 30 करोड़ मजदूरों के हड़ताल में शामिल होने का अनुमान है।

News In Detail

आज 12 फरवरी को देश के 10 प्रमुख ट्रेड यूनियनों और 100 से ज्यादा जन संगठनों ने केंद्र सरकार की चार श्रम संहिताओं और अन्य नीतियों के खिलाफ हड़ताल का आह्वान किया है। इसका असर छत्तीसगढ़ में भी दिखाई देगा।

यूनियनों का कहना है कि हड़ताल श्रमिकों, कर्मचारियों और सार्वजनिक संस्थाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए की जा रही है। प्रदेश भर में कई संगठनों ने हड़ताल को सफल बनाने की अपील की है। हालांकि, चैंबर ऑफ कॉमर्स ने इस हड़ताल का समर्थन नहीं किया है।

हड़ताल के समर्थन में निकली रैली

बुधवार 11 फरवरी को रायपुर में हड़ताल के समर्थन में कर्मचारी भवन बूढ़ापारा से एक मशाल रैली निकाली गई थी। इस रैली में बड़ी तादाद में श्रमिक, कर्मचारी और अलग-अलग संगठनों के लोग शामिल हुए थे। 

सभा को सफल बनाने का संकल्प

रायपुर में एक सभा को संबोधित करते हुए ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच के संयोजक धर्मराज महापात्र ने कहा कि चारों श्रम संहिताएं मजदूरों के हक को कमजोर करेंगी। उन्होंने प्रदेश के सभी श्रमिकों से अपील की कि वे हड़ताल में ज्यादा से ज्यादा हिस्सा लें और इसे सफल बनाएं। सभा के आखिरी में हड़ताल को सफल बनाने का संकल्प लिया गया था।

कोयला खदानें रहेंगी बंद

रायगढ़ जिले में ट्रेड यूनियन के लोग 12 फरवरी की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत विरोध प्रदर्शन करेंगे। इंटक, एटक, सीटू और एचएमएस के सदस्य एसईसीएल की छाल खदान के पास धरना देंगे। इस दौरान कोल इंडिया की कोयला खदानें बंद रहेंगी।

हड़ताल के कारण छाल, जामपाली, बरौद और बेजारी की कोल इंडिया खदानों में काम नहीं होगा। इन खदानों के बंद होने से कोयला परिवहन भी रुक जाएगा। हालांकि, स्कूल, दुकानें और आवागमन सामान्य रूप से चलते रहेंगे। इसके अलावा, जीवन बीमा कार्यालय के पास भी एक दिन का धरना प्रदर्शन किया जाएगा।

30 करोड़ से ज्यादा मजदूर शामिल होंगे

आज के भारत बंद का असर पब्लिक सेक्टर के बैंक, ट्रांसपोर्ट, सरकारी दफ्तरों और कुछ इंडस्ट्री में देखने को मिल सकता है। खासकर केरल और ओडिशा जैसे राज्यों में इसका असर दिखेगा। यहां यूनियन की पकड़ काफी मजबूत है। यूनियनों का कहना है कि इस हड़ताल में देशभर से करीब 30 करोड़ मजदूर शामिल हो सकते हैं।

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की महासचिव अमरजीत कौर ने बताया कि इस बार प्रदर्शन में भागीदारी पहले से ज्यादा हो सकती है। 9 जुलाई 2025 के प्रदर्शन में करीब 25 करोड़ लोग शामिल हुए थे। यूनियनों के मुताबिक 600 से ज्यादा जिलों में बंद का असर पड़ सकता है। पिछले साल यह असर 550 जिलों तक ही सीमित था।

इस हड़ताल का मकसद क्या है?

यूनियन नेताओं का कहना है कि भारत बंद का मकसद मजदूरों के हक और सोशल सिक्योरिटी को मजबूत करने पर जोर देना है। वे चार नए लेबर कोड (बिजली बिल-2025, बीज बिल-2025 और VB-G RAM G एक्ट-2025) का विरोध कर रहे हैं।

नेताओं का मानना है कि ये कोड मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करते हैं। नौकरी की सुरक्षा कम करते हैं। मालिकों के लिए कर्मचारियों को रखना और निकालना और भी आसान बना देते हैं।

दूसरी मांगों में ड्राफ्ट सीड बिल, इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल, और शांति एक्ट को खत्म करना, MGNREGA को फिर से शुरू करना, और विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट, 2025 के लिए गारंटी को वापस लेना शामिल है।

यूनियनों की प्रमुख मांगें

लेबर कोड की वापसी: मजदूर संगठनों का कहना है कि नए लेबर कोड से मजदूरों के अधिकार कम हो गए हैं। इसलिए इन्हें वापस लिया जाए।

मनरेगा में सुधार: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को और मजबूत करने और इसमें बजट बढ़ाने की मांग की जा रही है।

सिविल सर्विस नीतियों का विरोध: सरकार की कुछ नीतियों का विरोध हो रहा है जो सिविल सेवाओं को कमजोर कर रही हैं उन्हें वापस लिया जाए।

पुरानी पेंशन योजना: नई पेंशन योजना के मुकाबले पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने की मांग है।

नई शिक्षा नीति का विरोध: शिक्षा नीति 2020 को वापस लेने की मांग भी की जा रही है।

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