12 फरवरी को भारत बंद, एमपी में दिखेगा असर, जानें क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद

Aman Vaishnav | Feb 12, 2026, 08:55 IST
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mp 12 feb employee strike impact services
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केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने 12 फरवरी (आज) को अखिल भारतीय आम हड़ताल का ऐलान किया है। इस हड़ताल का असर मध्य प्रदेश में भी देखा जाएगा। सरकारी और प्राइवेट बैंक, बीएसएनएल, बीमा कंपनियां, डाकघर और केंद्रीय कार्यालयों में हड़ताल होगी।

News In Short

  • 12 फरवरी को केंद्रीय श्रमिक संगठनों की आम हड़ताल का आह्वान किया गया है।
  • हड़ताल का असर सरकारी और प्राइवेट बैंकों, बीएसएनएल, बीमा कंपनियों पर होगा।
  • 6 हजार बैंक शाखाओं में क्लियरिंग स्टाफ की कमी रहेगी।
  • भारतीय जीवन बीमा निगम और बीएसएनएल के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल होंगे।
  • स्कूल और कॉलेजों पर हड़ताल का असर नहीं पड़ेगा। बाजार भी बंद नहीं होंगे।

News In Detail

केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने 12 फरवरी, गुरुवार को अखिल भारतीय आम हड़ताल का ऐलान किया है। इस हड़ताल का असर मध्य प्रदेश में भी देखने को मिलेगा। सरकारी और प्राइवेट बैंक, बीएसएनएल, बीमा कंपनियां, डाकघर और केंद्रीय ऑफिसों में हड़ताल होगी। हालांकि रेल यात्रा पर इसका असर नहीं होने की संभावना है।

इस हड़ताल में ट्रेड यूनियन के कई संगठन शामिल हैं। जैसे आईएनटीयूसी, एआईटीयूसी, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, सेवा, बैंक, बीमा, केंद्रीय कर्मचारी और बीएसएनएल के संगठन।

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किसने बुलाई ये हड़ताल

यह हड़ताल दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने मिलकर बुलाई है। इनमें AITUC, INTUC, CITU, HMS, TUCC, SEWA, AIUTUC, AICCTU, LPF और UTUC शामिल हैं। इसके साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा (SKM), कृषि मजदूर संगठन, और छात्र व युवा संगठन भी इस बंद का समर्थन कर रहे हैं।

6 हजार बैंक शाखाएं रहेगी बंद

इस हड़ताल के कारण मध्य प्रदेश की सरकारी और प्राइवेट बैंकों की 6 हजार से ज्यादा शाखाओं पर असर पड़ेगा। ज्यादातर शाखाओं में क्लियरिंग स्टाफ की कमी होगी। इससे कामकाज भी लगभग ठप ही रहेगा।

30 करोड़ से ज्यादा मजदूर शामिल होंगे

आज के भारत बंद का असर पब्लिक सेक्टर के बैंक, ट्रांसपोर्ट, सरकारी दफ्तरों और कुछ इंडस्ट्री में देखने को मिल सकता है। खासकर केरल और ओडिशा जैसे राज्यों में इसका असर दिखेगा। यहां यूनियन की पकड़ काफी मजबूत है। यूनियनों का कहना है कि इस हड़ताल में देशभर से करीब 30 करोड़ मजदूर शामिल हो सकते हैं।

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की महासचिव अमरजीत कौर ने बताया कि इस बार प्रदर्शन में भागीदारी पहले से ज्यादा हो सकती है। 9 जुलाई 2025 के प्रदर्शन में करीब 25 करोड़ लोग शामिल हुए थे। यूनियनों के मुताबिक 600 से ज्यादा जिलों में बंद का असर पड़ सकता है। पिछले साल यह असर 550 जिलों तक ही सीमित था।

इस हड़ताल का मकसद क्या है?

यूनियन नेताओं का कहना है कि भारत बंद का मकसद मजदूरों के हक और सोशल सिक्योरिटी को मजबूत करने पर जोर देना है। वे चार नए लेबर कोड (बिजली बिल-2025, बीज बिल-2025 और VB-G RAM G एक्ट-2025) का विरोध कर रहे हैं।

नेताओं का मानना है कि ये कोड मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करते हैं। नौकरी की सुरक्षा कम करते हैं। मालिकों के लिए कर्मचारियों को रखना और निकालना और भी आसान बना देते हैं।

दूसरी मांगों में ड्राफ्ट सीड बिल, इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल, और शांति एक्ट को खत्म करना, MGNREGA को फिर से शुरू करना, और विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट, 2025 के लिए गारंटी को वापस लेना शामिल है।

मध्य प्रदेश बैंक कर्मचारियों संघ के को-ऑर्डिनेटर वीके शर्मा ने बताया कि इस हड़ताल में सरकारी बैंकों के साथ-साथ प्राइवेट बैंक भी शामिल होंगे। भारतीय स्टेट बैंक यूनियन ने हड़ताल का समर्थन किया है। वह सीधे तौर पर हड़ताल में शामिल नहीं होगा।
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किसानों की रोजी रोटी पर पड़ेगा असर

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते पर अपनी चिंता जाहिर की है। ग्रुप के कन्वीनर हन्नान मोल्लाह ने कहा कि इस डील से भारतीय बाजार सस्ते अमेरिकी माल से भर जाएंगे। इससे हमारे किसानों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा।

इन सेवाओं पर पड़ेगा असर

इस वजह से बैंक, बीमा, डाक, बीएसएनएल और ट्रांसपोर्ट सेवाओं पर असर पड़ेगा। भोपाल के होशंगाबाद रोड पर स्थित डाक भवन के सामने सभी कर्मचारी हड़ताल का समर्थन करने के लिए एकत्र होंगे। इसके पहले एक रैली और सभा भी आयोजित की जाएगी।

स्कूल, कॉलेजों पर नहीं पड़ेगा असर

संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि स्कूल और कॉलेजों पर कोई असर नहीं होगा। इसके अलावा भोपाल और पूरे प्रदेश में बाजार बंद करने का कोई आह्वान नहीं किया गया है। हालांकि ट्रांसपोर्ट कारोबार पर असर पड़ सकता है, क्योंकि मध्य प्रदेश से पूरे देश में ट्रांसपोर्ट का काम होता है।

क्या-क्या बंद हो सकता है?

  • सरकारी बैंक और बीमा ऑफिस
  • सरकारी ऑफिस और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां
  • कुछ राज्यों में राज्य परिवहन बस सेवाएं
  • फैक्ट्रियां और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स
  • कोयला, स्टील और दूसरे अहम सेक्टर (यह स्थान के हिसाब से बदल सकता है)
  • विरोध वाले इलाकों में MNREGA के तहत ग्रामीण रोजगार के काम
  • दुकानें

भारत बंद का इन पर नहीं होगा असर

  • अस्पताल और इमरजेंसी सेवाएं चालू रहेंगी।
  • एंबुलेंस और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं बनी रहेंगी।
  • मेट्रो सर्विस पर नहीं होगा असर।
  • प्राइवेट ऑफिस और IT कंपनियां खुले रहेंगी।
  • सरकारी स्कूल और कॉलेजों में पढ़ाई जारी रहेगी।
  • ट्रेन सेवाएं भी प्रभावित नहीं होंगी।

यूनियनों की प्रमुख मांगें

लेबर कोड की वापसी: मजदूर संगठनों का कहना है कि नए लेबर कोड से मजदूरों के अधिकार कम हो गए हैं। इसलिए इन्हें वापस लिया जाए।

मनरेगा में सुधार: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को और मजबूत करने और इसमें बजट बढ़ाने की मांग की जा रही है।

सिविल सर्विस नीतियों का विरोध: सरकार की कुछ नीतियों का विरोध हो रहा है जो सिविल सेवाओं को कमजोर कर रही हैं उन्हें वापस लिया जाए।

पुरानी पेंशन योजना: नई पेंशन योजना के मुकाबले पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने की मांग है।

नई शिक्षा नीति का विरोध: शिक्षा नीति 2020 को वापस लेने की मांग भी की जा रही है।

राहुल गांधी ने किसानों का किया समर्थन

राहुल गांधी ने अपने X अकाउंट पर पोस्ट कर लिखा कि आज देशभर में लाखों मजदूर और किसान अपने हक के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। मजदूरों को डर है कि चार नई श्रम संहिताएं उनके अधिकारों को कमजोर कर सकती हैं। किसानों को लगता है कि व्यापार समझौतों से उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा।

इसके अलावा मनरेगा को कमजोर या खत्म करने से गांवों का आखिरी सहारा भी खत्म हो सकता है। जब उनके भविष्य से जुड़े अहम फैसले किए गए, तब उनकी आवाज को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। अब सवाल ये है कि क्या मोदी जी इनकी सुनेंगे, या फिर उनके ऊपर किसी grip की पकड़ बहुत मजबूत है? मैं मजदूरों और किसानों के मुद्दों के साथ पूरी मजबूती से खड़ा हूं।

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