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Photograph: (the sootr)
News In Short
- अब माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के कर्मचारी न तो काम रोक सकेंगे और न ही हड़ताल पर जा सकेंगे।
- यह आदेश 01 फरवरी 2026 से 30 अप्रेल 2026 तक प्रभावी रहेगा।
- यह व्यवस्था प्रदेश में बोर्ड परीक्षाओं को सुचारू बनाने के लिए की गई है।
- राजस्थान में फरवरी से अप्रैल का समय बोर्ड परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण।
- शिक्षा विभाग इस बार 10 और 12वीं कक्षाओं की बोर्ड परीक्षा फरवरी में लेगा।
News In Detail
​जयपुर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (आरबीएसई) की परीक्षाओं को देखते हुए बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने बोर्ड और उसके सभी कार्यालयों से जुड़ी सेवाओं को 'अत्यावश्यक सेवा' घोषित कर दिया है। परीक्षा के दौरान तीन महीने तक बोर्ड कर्मचारियों की हड़ताल पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
फरवरी से अप्रेल तक रहेगी रोक
​राजस्थान के गृह (ग्रुप-9) विभाग की ओर से जारी आदेश के बाद अब बोर्ड के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर न तो काम रोक सकेंगे और न ही हड़ताल पर जा सकेंगे। यह आदेश 01 फरवरी 2026 से 30 अप्रेल 2026 तक प्रभावी रहेगा। इस बार शिक्षा विभाग ने 10 व 12वीं कक्षाओं की बोर्ड परीक्षाएं फरवरी में कराने का फैसला किया है।
​क्यों उठाना पड़ा यह सख्त कदम?
सरकार की नजर में यह बात आई थी कि कर्मचारियों की संभावित हड़ताल से बोर्ड परीक्षाओं प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ​चूंकि, फरवरी से अप्रैल का समय बोर्ड परीक्षाओं के आयोजन, पेपर सैटिंग और मूल्यांकन की दृष्टि से अत्यंत अहम होता है। ऐसे में किसी भी प्रकार की हड़ताल से प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक सकता था।
​बोर्ड परीक्षाओं पर नहीं आने दिया जाएगा संकट
​यह निर्णय विशेष रूप से बोर्ड परीक्षाओं को सुचारू रूप से संपन्न कराने के उद्देश्य से लिया गया है। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान न केवल परीक्षा कराता है, बल्कि गोपनीय दस्तावेजों की सुरक्षा और समय पर परिणाम जारी करने के लिए भी जिम्मेदार है। सरकार के इस रुख से साफ है कि वह शिक्षा क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अराजकता या देरी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
अब हड़ताल की तो होगी जेल
सरकार ने हड़ताल पर रोक के लिए राजस्थान अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (आरइएसएमए), 1970 की शक्तियों का प्रयोग किया है। ​अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि सरकार ने इसके दो महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों का उपयोग किया है। ​धारा 2 (1) के तहत बोर्ड की समस्त सेवाओं को 'अत्यावश्यक सेवा' घोषित किया गया है। वहीं, ​धारा 3 (1) के तहत बोर्ड के कार्यों से जुड़ी किसी भी हड़ताल पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसका उल्लंघन करने पर सरकार संबंधित कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ ही कानूनी गिरफ्तारी भी कर सकती है।
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