नीरजा मोदी स्कूल को मिली राहत, स्टूडेंट्स शिफ्ट करने पर एक महीने की रोक

राजस्थान में जयपुर का नीरजा मोदी स्कूूल एक महीने तक बच्चों को दूसरे ​स्कूलों में शिफ्ट नहीं करेगा। इसके लिए हाई कोर्ट ने राहत दे दी है। सीबीएसई से संबद्धता खत्म होने पर वह दूसरे स्कूलों में बच्चों को शिफ्ट कर रहा था।

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Mukesh Sharma
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Photograph: (the sootr)

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  • हाई कोर्ट से नीरजा मोदी स्कूल को मिली अंतरिम राहत
  • 9 वीं व 11 वीं कक्षा के छात्र हो रहे थे दूसरे स्कूल में शिफ्ट  
  • हाई कोर्ट ने एक महीने तक छात्रों को शिफ्ट करने पर लगाई रोक 
  • संबद्धता रद्द करने के आदेश में फिलहाल दखल नहीं  
  • सीबीएसई को तीन सप्ताह में प्रतिवेदन तय करना होगा 

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Jaipur: राजस्थान हाई कोर्ट से जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल को अंतरिम राहत मिली है। कोर्ट ने स्कूल से 9 व 11 वीं कक्षा के छात्रों को दूसरे स्कूल में शिफ्ट करने की प्रक्रिया पर एक महीने की रोक लगा दी है। जस्टिस बिपिन गुप्ता की बैंच ने स्कूल की याचिका पर यह अंतरिम आदेश दिए है। सीबीएसई से संबद्धता समाप्त होने पर यह स्कूल छात्रों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट कर रहा था। स्कूल ने सीबीएसई के संबद्धता समाप्त करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। 

संबद्धता समाप्त के मामले में दखल नहीं

कोर्ट ने फिलहाल स्कूल की सीबीएसई से संबद्धता समाप्त होने के मामले में दखल देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने स्कूल प्रबंधन को एक सप्ताह में सीबीएसई को अपना प्रतिवेदन देने और सीबीएसई को इस प्रतिवेदन को तीन सप्ताह में तय करने को कहा है। कोर्ट ने तब तक क्लास 9 और 11 के स्टूडेंट्स को दूसरी स्कूल में शिफ्ट करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।  

स्कूल की याचिका सुनवाई लायक ही नहीं

सीबीएसई के एडवोकेट एमएस राघव ने कोर्ट को कहा कि स्कूल की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। सीबीएसई के प्रावधानों के अनुसार स्कूल के पास बोर्ड में रिप्रजेंटेशन देने का विकल्प खुला है। लेकिन, स्कूल ने वैकल्पिक उपाय का इस्तेमाल किए बिना ही सीधे हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। इसलिए याचिका को खारिज की जाए। स्कूल में छात्र सुरक्षा मानकों का भी गंभीर उल्लंघन हुआ है। ऐसे असुरक्षित माहौल में बच्चों को पढ़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती।  

तथ्यों को नजरअंदाज किया सीबीएसई ने

स्कूल की ओर से सीनियर एडवोकेट अजीत कुमार शर्मा और एडवोकेट  रचित शर्मा ने कोर्ट को बताया कि सीबीएसई ने हमारे जवाब पर विचार नहीं किया। जवाब में कई दस्तावेजी सबूत लगाए थे। लेकिन उन तथ्यों को नजरअंदाज किया है। 
अब प्रतिवेदन भी सीबीएसई को ही तय करना है और उससे न्याय की उम्मीद नहीं है। प्रतिवेदन तय करने की कोई समय सीमा भी तय नहीं है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने सीबीएसई को स्कूल का प्रतिवेदन तीन सप्ताह में तय करने के निर्देश दिए है। 

चौथे माले से कूदकर छात्रा ने दी थी जान

नीरजा मोदी स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ने वाली 9 साल की अमायरा ने 1 नवंबर 2025 को स्कूल के चौथे फ्लोर से कूदकर जान दे दी थी। घटना के बाद सीबीएसई द्वारा गठित कमेटी ने रिपोर्ट दी थी कि
स्कूल में एंटी बुलिंग और पोक्सो कमेटी सिर्फ कागजों तक ही सीमित है और कोई काम नहीं कर रही।

डेढ़ साल से बुलिंग की शिकार थी अमायरा

अमायरा डेढ़ साल से बुलिंग की शिकार हो रही थी। पेरेंटस ने भी चार बार स्कूल में इसकी शिकायत की। लेकिन कमेटी के काम नहीं करने के कारण इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। कमेटी ने स्कूल में एकेडमिक और सुरक्षा से जुड़ी कई  कमियों को उजागर किया था। इसके आधार पर सीबीएसई ने 30 दिसंबर 2025 को स्कूल की संबद्धता रद्द कर दी है।

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