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NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ में 30 दिनों से चल रहे रसोइयों के धरने के दौरान दो महिला रसोइयों की मौत।
- रायपुर के तूता धरना स्थल पर तबीयत बिगड़ने के बाद दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
- मृतकों में बेमेतरा की दुलारी यादव और बालोद की रुकमणि सिन्हा शामिल।
- रसोइया न्यूनतम मानदेय, स्थायीकरण और सामाजिक सुरक्षा की मांग कर रहे थे।
- डीपीआई ने मौत का धरना या हड़ताल से सीधा संबंध होने से इनकार किया।
NEWS IN DETAIL
Raipur. छत्तीसगढ़ के लगभग 86,000 रसोइया पिछले 30 दिनों से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। रायपुर के तूता धरना स्थल में 2 महिला रसाइयों की तबीयत बिगड़ गई, जिनकी इलाज के दौरान मौत हो गई।
रसोइया न्यूनतम मानदेय, स्थायीकरण और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक मृत रसोइया का नाम दुलारी यादव है।
वह बेमेतरा जिले के सालधा गांव की रहने वाली थी। वहीं बालोद के कुसुमकासा गांव की रुकमणि सिन्हा की जान गई है। दोनों की हालत 25 जनवरी को बिगड़ी थी।
इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां मौत हो गई। वहीं 2 रसोइयों की मौत पर कांग्रेस ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि न्यूनतम मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों की मांग कर रही रसोइयों की आवाज को भाजपा सरकार लगातार नजरअंदाज कर रही है। सरकार की नाकामी से महिलाओं की जान गई।
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ये है पूरा मामला :
छत्तीसगढ़ स्कूल मिड-डे मील यूनियन के बैनर तले नवा रायपुर में रसोइयों की हड़ताल 29 दिसंबर 2025 से जारी है।
बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक के सालधा गांव स्थित सरकारी प्राथमिक स्कूल में पदस्थ दुलारी यादव 29 दिसंबर से आंदोलन स्थल पर बैठी थी।
आंदोलन के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद 25 जनवरी 2026 को उन्हें रायपुर के डॉ. बीआर अम्बेडकर मेमोरियल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।
हालत गंभीर होने पर उन्हें एक निजी अस्पताल में रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि दुलारी यादव को पहले से हार्ट की प्रॉब्लम थी।
हालत बिगड़ने पर उन्हें मेकाहारा ले जाया गया, जहां से उन्हें भिलाई स्थित शंकराचार्य इंस्टीट्यूट रेफर किया गया। डॉक्टर्स ने मेटाबोलिक एसिडोसिस से मौत की आशंका जताई है।
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दो रसाईयों की मौत से कोई वास्ता नहीं : डीपीआई
इस मामले पर डीपीआई ने सफाई दी है। लोक शिक्षण संचालनालय के अनुसार हड़ताल पर बैठे रसोईयों के प्रतिनिधियों की संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय एवं सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग से चर्चा हुई थी।
इस दौरान शासन द्वारा रसोईयों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए उनके मानदेय में 25 प्रतिशत की वृद्धि, अर्थात 500 रूपए की वृद्धि किए जाने की कार्यवाही की जानकारी दी गई थी और हड़ताल समाप्त कर अपने-अपने निवास स्थान लौटने का आग्रह किया गया था।
इसके बावजूद कुछ रसोईयों द्वारा धरना स्थल पर बने रहने का निर्णय लिया गया। जिन दो रसोईयों की मृत्यु की खबर प्रसारित की जा रही है, उनमें से एक रसोईया बालोद जिले की निवासी थी, जो 20 एवं 21 जनवरी को धरना स्थल पर उपस्थित रही थी, किंतु बाद में अपने निवास स्थान लौट गई थी।
वहां उसकी तबीयत खराब होने पर उसे दल्ली राजहरा स्थित शासकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान आज उसकी मृत्यु हो गई।
दूसरी महिला रसोईया बेमेतरा जिले के बेरला विकासखण्ड की निवासी थी, जो पहले से ही गंभीर बीमारी से पीड़ित थी।
उन्हें भिलाई स्थित शंकराचार्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हुई।
डीपीआई ने सफाई देते हुए कहा कि दोनों ही मामलों में संबंधित रसोईयों की मृत्यु का धरना स्थल अथवा हड़ताल से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। राज्य शासन सभी रसोईयों के प्रति पूर्णतः संवेदनशील है तथा उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण को लेकर सजग है।
शासन द्वारा रसोईयों के हित में आवश्यक निर्णय एवं कार्यवाही लगातार की जा रही है।
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