संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय एक बार फिर सवालों के घेरे में

Umeshwari Baghel | Jul 05, 2026, 21:52 IST
संत गहिरा गुरु यूनिवर्सिटी परीक्षा विवाद
संत गहिरा गुरु यूनिवर्सिटी की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। उत्तरपुस्तिका के पहले पेज पर कॉलेज और परीक्षा केंद्र का नाम लिखवाया जा रहा है, जिससे कॉपी जांच की गोपनीयता और निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका है।

समझें क्या है पूरा मामला

Raipur। छत्तीसगढ़ के संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। नई शिक्षा नीति यानी NEP के तहत चल रही सेमेस्टर परीक्षाओं में उत्तरपुस्तिका के पहले पेज पर परीक्षा केंद्र और कॉलेज का नाम लिखवाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जानकारों का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था से परीक्षा की गोपनीयता प्रभावित हो सकती है।



मामला उत्तर छत्तीसगढ़ से जुड़ा है। विश्वविद्यालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार उत्तरपुस्तिका के मुख्य पेज पर परीक्षा केंद्र की मुहर, केंद्राध्यक्ष का नाम और कॉलेज से जुड़ी जानकारी दर्ज की जा रही है। इसी को लेकर अब यह सवाल उठ रहा है कि जब कॉपी जांचने वाले को पहले से कॉलेज या केंद्र की पहचान मिल जाएगी, तो निष्पक्ष मूल्यांकन की व्यवस्था कैसे सुरक्षित रहेगी।



उत्तरपुस्तिका पर जानकारी लिखने से विवाद

जानकारी के अनुसार, बीएससी सेकेंड सेमेस्टर बायो ग्रुप हिंदी माध्यम की एक उत्तरपुस्तिका के पहले पेज पर कॉलेज का नाम दर्ज मिला है। इसमें गवर्नमेंट कॉलेज सिल्पी का उल्लेख होने की बात सामने आई है। यही बात विवाद का मुख्य कारण बनी है।



आरोप है कि उत्तरपुस्तिका पर इस तरह की जानकारी लिखे जाने से यह पता लगाना आसान हो सकता है कि किस कॉलेज की कॉपी जांच के लिए कहां पहुंची है। परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले गिरोह अक्सर इसी तरह की जानकारी जुटाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय की यह व्यवस्था गोपनीयता के लिहाज से कमजोर मानी जा रही है।



परीक्षा की निष्पक्षता पर उठे सवाल

परीक्षा प्रणाली में उत्तरपुस्तिका की पहचान गोपनीय रखना बेहद जरूरी माना जाता है। इसका मकसद यह होता है कि कॉपी जांचने वाले शिक्षक को छात्र, कॉलेज या परीक्षा केंद्र से जुड़ी कोई जानकारी न मिले। इससे मूल्यांकन निष्पक्ष और पारदर्शी रहता है।



मौजूदा व्यवस्था में अगर उत्तरपुस्तिका पर परीक्षा केंद्र और कॉलेज का नाम साफ लिखा रहेगा, तो कॉपी जांचने वाले को यह पता चल सकता है कि वह किस संस्थान की कॉपी देख रहा है। यही स्थिति परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है।



पहले केवल कोड से होती थी पहचान

पूर्व व्यवस्था में उत्तरपुस्तिकाओं पर केवल परीक्षा केंद्र कोड की मुहर लगाई जाती थी। कॉलेज का नाम या केंद्राध्यक्ष से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक रूप से कॉपी पर दर्ज नहीं होती थी। इससे कॉपी जांचने वाले शिक्षक के लिए यह जानना मुश्किल होता था कि उत्तरपुस्तिका किस कॉलेज या केंद्र की है।



इस व्यवस्था को गोपनीयता के लिहाज से सुरक्षित माना जाता था। अब नए निर्देशों के बाद पहचान से जुड़ी जानकारी उत्तरपुस्तिका पर ही दर्ज हो रही है। इसी वजह से विश्वविद्यालय प्रबंधन की सतर्कता पर सवाल उठ रहे हैं।



NEP परीक्षाओं में पारदर्शिता जरूरी

नई शिक्षा नीति के तहत सेमेस्टर आधारित परीक्षा प्रणाली को लागू किया जा रहा है। ऐसे समय में विश्वविद्यालयों से उम्मीद की जाती है कि वे मूल्यांकन और परीक्षा संचालन में ज्यादा पारदर्शिता और सुरक्षा बरतें। देश में परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों पर पहले ही लगातार बहस होती रही है। ऐसे माहौल में किसी भी विश्वविद्यालय की छोटी प्रशासनिक चूक भी बड़े विवाद का कारण बन सकती है।



संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के मामले में भी सवाल यही है कि परीक्षा की गोपनीयता को मजबूत करने के बजाय ऐसी जानकारी क्यों लिखवाई जा रही है, जिससे पहचान उजागर हो सकती है।



विश्वविद्यालय प्रबंधन से सफाई की जरूरत

इस मामले में विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से स्पष्ट जवाब आना जरूरी है। अगर यह व्यवस्था निर्देशों के तहत लागू की गई है, तो उसके पीछे का कारण बताया जाना चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कॉपी जांच की प्रक्रिया में गोपनीयता बनाए रखने के लिए क्या सुरक्षा उपाय किए गए हैं।



शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में भरोसा तभी कायम रहता है, जब छात्र और अभिभावक दोनों को यह भरोसा हो कि मूल्यांकन निष्पक्ष तरीके से होगा। इसलिए विश्वविद्यालय को उत्तरपुस्तिका की पहचान से जुड़ी व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए।



क्या बदलाव होना चाहिए?

परीक्षा केंद्र और कॉलेज की जानकारी को उत्तरपुस्तिका पर खुलकर लिखने के बजाय कोड आधारित व्यवस्था लागू की जा सकती है। इससे प्रशासनिक रिकॉर्ड भी सुरक्षित रहेगा और मूल्यांकन की गोपनीयता भी बनी रहेगी। विश्वविद्यालय को ऐसी प्रणाली अपनानी चाहिए, जिसमें किसी भी स्तर पर कॉपी की पहचान उजागर न हो।



फिलहाल यह मामला परीक्षा व्यवस्था की गंभीर खामी की ओर इशारा करता है। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रबंधन इस पर क्या कदम उठाता है और क्या भविष्य की परीक्षाओं में उत्तरपुस्तिकाओं की गोपनीयता को लेकर व्यवस्था बदली जाती है।



IMP FACTS

मामला संत गहिरा गुरु यूनिवर्सिटी, उत्तर छत्तीसगढ़ से जुड़ा है।



यूनिवर्सिटी में NEP के तहत सेमेस्टर परीक्षाएं कराई जा रही हैं।



उत्तरपुस्तिका के पहले पेज पर कॉलेज और परीक्षा केंद्र का नाम लिखवाया जा रहा है।



इससे परीक्षा की गोपनीयता और निष्पक्ष मूल्यांकन पर सवाल उठे हैं।



पहले उत्तरपुस्तिका पर सिर्फ परीक्षा केंद्र कोड लिखा जाता था।



नई व्यवस्था से कॉपी जांचने वाले को कॉलेज की पहचान पता चल सकती है।



विवाद बीएससी सेकेंड सेमेस्टर बायो ग्रुप की उत्तरपुस्तिका से सामने आया।



FAQ

  1. संत गहिरा गुरु यूनिवर्सिटी पर विवाद क्यों उठा है?
    उत्तरपुस्तिका के पहले पेज पर कॉलेज और परीक्षा केंद्र का नाम लिखवाने से परीक्षा की गोपनीयता पर सवाल उठे हैं।
  2. इससे परीक्षा व्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है?
    कॉपी जांचने वाले को कॉलेज की पहचान पता चल सकती है, जिससे निष्पक्ष मूल्यांकन पर शक पैदा हो सकता है।
  3. पहले उत्तरपुस्तिका पर क्या व्यवस्था थी?
    पहले उत्तरपुस्तिका पर सिर्फ परीक्षा केंद्र कोड लिखा जाता था, जिससे कॉलेज और केंद्र की पहचान गोपनीय रहती थी।

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