SHFW में गैर-चिकित्सक को प्रभार, स्वास्थ्य विभाग के फैसले पर उठे सवाल

VINAY VERMA | Sept 08, 2026, 22:11 IST
गैर-चिकित्सक को SHFW की कमान
गैर-चिकित्सक को SHFW की कमान
छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग में SHFW रायपुर के संचालक पद का अतिरिक्त प्रभार अपर संचालक इन्द्रजीत बर्मन को दिया गया है। गैर-चिकित्सक अधिकारी को जिम्मेदारी मिलने से कैडर, योग्यता और प्रमोशन व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

Raipur। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में एक ऐसा आदेश सामने आया है, जिसने विभाग के भीतर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान (SHFW), रायपुर के संचालक पद का अतिरिक्त प्रभार अपर संचालक इन्द्रजीत बर्मन को सौंप दिया गया है। खास बात यह है कि यह जिम्मेदारी एक गैर-चिकित्सक कैडर के अधिकारी को दी गई है। इसके बाद विभाग में पद की पात्रता और कैडर को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।



आदेश से नई हलचल

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने आदेश जारी किया है। आदेश के मुताबिक अपर संचालक इन्द्रजीत बर्मन को मौजूदा दायित्वों के साथ संचालक, राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। आदेश राज्यपाल के नाम से अवर सचिव दिव्या वैष्णव के हस्ताक्षर से जारी हुआ है।



पहली बार ऐसा प्रयोग?

विभागीय स्तर पर सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि राज्य के प्रमुख स्वास्थ्य प्रशिक्षण संस्थान की जिम्मेदारी पहली बार गैर-चिकित्सक कैडर के अधिकारी को क्यों दी गई? SHFW स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण संस्थान है। ऐसे में इस पद पर नियुक्ति को लेकर कैडर और योग्यता की बहस तेज हो गई है।



प्रमोशन पद पर भी सवाल

मामला सिर्फ अतिरिक्त प्रभार तक सीमित नहीं है। विभाग में चर्चा है कि संचालक का यह पद प्रोमोशन पद है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पद की प्रकृति ही पदोन्नति से जुड़ी है, तो इसके लिए संबंधित स्वास्थ्य या चिकित्सा कैडर की जगह गैर-चिकित्सक अधिकारी को जिम्मेदारी क्यों दी गई?





चिकित्सा संघ की चुप्पी क्यों?

इस फैसले ने चिकित्सा अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। विभाग में पहले भी गैर-चिकित्सक कैडर के अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण पद दिए जाने को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। लेकिन इन मामलों में चिकित्सा अधिकारी संघ की ओर से स्पष्ट और प्रभावी विरोध सामने नहीं आता। अब सवाल है कि जब पद कैडर और प्रमोशन से जुड़ा है, तो संघ चुप क्यों है?



विभाग को देना होगा जवाब

आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और संबंधित विभागों, जिला प्रशासन एवं अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है। अब असली सवाल आदेश जारी होने का नहीं, बल्कि उस पद की पात्रता और कैडर व्यवस्था का है। अगर यह पद चिकित्सा कैडर के लिए निर्धारित है तो गैर-चिकित्सक अधिकारी को प्रभार देने का आधार क्या है? और अगर ऐसा करना नियमों में है, तो विभाग को यह स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करनी चाहिए।



स्वास्थ्य विभाग के इस फैसले ने एक बार फिर विभागीय पदों पर कैडर व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है। फिलहाल बर्मन को अतिरिक्त प्रभार मिल गया है, लेकिन इस नियुक्ति ने सवालों का ऐसा दरवाजा खोल दिया है, जिसे बंद करना अब विभाग के लिए आसान नहीं होगा।



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