1500 का बिल सीधे 7000 पार : स्मार्ट मीटर के खिलाफ लोगों में भारी आक्रोश

Umeshwari Baghel | Jul 26, 2026, 19:37 IST
पुराने बिल का समायोजन या गड़बड़ी
स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल बढ़ने की शिकायतें बढ़ गई हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि 1500-2000 रुपए के बिल अब 5000-7000 रुपए तक पहुंच रहे हैं। बिजली विभाग ने जांच की बात कही है और रीडिंग समायोजन को वजह बताया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • स्मार्ट मीटर लगा तो बढ़ गया बिजली बिल, उपभोक्ताओं में गुस्सा
  • 1500 का बिल पहुंचा 7000 तक, स्मार्ट मीटर पर उठे सवाल
  • स्मार्ट मीटर या बढ़ी परेशानी? उपभोक्ता परेशान
  • बिजली विभाग के दावों पर जनता को भरोसा नहीं
  • स्मार्ट मीटर के बाद क्यों बढ़े बिजली बिल? जांच की मांग

Bilaspur : प्रदेश में स्मार्ट बिजली मीटर लगने के बाद बिजली बिल बढ़ने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने से पहले उनका मासिक बिजली बिल सामान्य रहता था, लेकिन मीटर बदलने के बाद अचानक बिलों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। लोगों का दावा है कि पहले जहां 1500 से 2000 रुपए तक बिल आता था, वहीं अब कई घरों में 5000 से 7000 रुपए तक के बिल पहुंच रहे हैं।



उपभोक्ताओं का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली खपत अचानक बढ़ी हुई दिखाई जा रही है। उनका कहना है कि घर में बिजली उपयोग की आदतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, फिर भी बिल दो से तीन गुना तक बढ़ गए हैं। इससे आम परिवारों के घरेलू बजट पर असर पड़ रहा है।



पुराने बिल का समायोजन या गड़बड़ी


शिकायत लेकर पहुंचे उपभोक्ता, जांच के बाद भी नहीं मिली राहत

बिजली बिल को लेकर परेशान कई उपभोक्ता बिजली विभाग के कार्यालय पहुंच रहे हैं। यहां उनकी शिकायतों पर मीटर की जांच की जा रही है। हालांकि उपभोक्ताओं का कहना है कि जांच के बाद भी उन्हें राहत नहीं मिल रही है। विभाग की ओर से कई मामलों में मीटर को सही बताते हुए बिल को सही ठहरा दिया जाता है।



लोगों का कहना है कि अगर स्मार्ट मीटर में कोई तकनीकी समस्या नहीं है तो फिर अचानक इतनी ज्यादा बिजली खपत कैसे दर्ज हो रही है, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए। उपभोक्ता मांग कर रहे हैं कि स्मार्ट मीटर से जुड़े बढ़े हुए बिलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और वास्तविक कारण सार्वजनिक किया जाए।



छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर के खिलाफ लोगों में भारी आक्रोश


बिजली विभाग ने कहा- मीटर में नहीं है कोई अंतर

बिजली विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटर और पुराने इलेक्ट्रॉनिक मीटर की कार्यप्रणाली में कोई खास अंतर नहीं है। विभाग के अनुसार स्मार्ट मीटर बिजली खपत को रियल टाइम में रिकॉर्ड करता है और इससे रीडिंग ज्यादा सटीक तरीके से दर्ज होती है।



अधीक्षण यंत्री (शहर) पी. श्रीनिवास राजू ने बताया कि जिन उपभोक्ताओं की शिकायतें मिल रही हैं, उनकी जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में पुराने मीटर की रीडिंग सही तरीके से दर्ज नहीं हो पाई थी या कुछ खपत की गणना बाकी रह गई थी। अब उसका समायोजन नए बिलों में दिखाई दे रहा है।



उनका कहना है कि स्मार्ट मीटर वास्तविक बिजली खपत की जानकारी देता है और इससे उपभोक्ताओं को भी अपनी खपत समझने में आसानी होगी।



बिलासपुर में 1 लाख से ज्यादा स्मार्ट मीटर लगाए गए

बिलासपुर शहर में स्मार्ट मीटर लगाने का काम तेजी से चल रहा है। विभाग के अनुसार शहर में कुल 1.45 लाख स्मार्ट मीटर लगाने की स्वीकृति मिली है। इनमें से करीब 1.05 लाख से ज्यादा स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।



मीटर बदलने के बाद बड़ी संख्या में उपभोक्ता बिल बढ़ने की शिकायत कर रहे हैं। हालांकि बिजली विभाग का कहना है कि सभी मामलों को एक जैसा नहीं माना जा सकता। हर उपभोक्ता की बिजली खपत, पुराने रिकॉर्ड और मीटर की स्थिति के आधार पर जांच की जा रही है।



कवर्धा में भी स्मार्ट मीटर को लेकर नाराजगी

स्मार्ट मीटर को लेकर नाराजगी सिर्फ बिलासपुर तक सीमित नहीं है। छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में उपभोक्ता बढ़े हुए बिजली बिलों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।



कवर्धा जिले के पांडातराई क्षेत्र में भी स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों का विरोध सामने आया है। यहां उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल में कई गुना बढ़ोतरी हो गई। लोगों का कहना है कि पहले जिन घरों में करीब 500 रुपए तक बिल आता था, वहां अब 2000 से 2500 रुपए तक बिल पहुंच रहा है।



स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली दरों में बढ़ोतरी के साथ यदि बिल भी अचानक बढ़ जाएंगे तो गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए परेशानी बढ़ जाएगी।



पुराने बिल का समायोजन या गड़बड़ी


उपभोक्ताओं की मांग- सामने आए असली वजह

स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी मांग यही है कि बढ़े हुए बिलों की पारदर्शी जांच हो। लोगों का कहना है कि विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि बिल बढ़ने की वजह वास्तव में ज्यादा बिजली खपत है या पुराने बिलिंग सिस्टम की कोई कमी।



उपभोक्ता चाहते हैं कि शिकायतों का समाधान केवल मीटर जांच तक सीमित न रहे, बल्कि पूरी बिलिंग प्रक्रिया की समीक्षा की जाए। वहीं बिजली विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था से भविष्य में बिजली खपत और बिलिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी। फिलहाल स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की नाराजगी और बिजली विभाग के दावों के बीच जांच और समाधान का इंतजार बना हुआ है।



FAQ

  1. स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल बढ़ने की शिकायत क्यों हो रही है?
    कई उपभोक्ताओं का दावा है कि पहले जहां 1,500–2,000 रुपए तक बिल आता था, वहीं स्मार्ट मीटर लगने के बाद 5,000–7,000 रुपए तक के बिल आने लगे हैं। हालांकि बिजली विभाग का कहना है कि हर मामले की अलग-अलग जांच की जा रही है।
  2. बिजली विभाग बढ़े हुए बिलों पर क्या सफाई दे रहा है?
    बिजली विभाग के अनुसार स्मार्ट मीटर और पुराने इलेक्ट्रॉनिक मीटर की कार्यप्रणाली में मूलभूत अंतर नहीं है। विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटर रियल टाइम में सटीक रीडिंग दर्ज करता है और कुछ मामलों में पुराने बिलों का समायोजन भी नए बिल में दिखाई दे सकता है।

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