सौर ऊर्जा के दावे फेल, यूनिवर्सिटी हर महीने भर रही 50 लाख तक का बिजली बिल
NEWS IN SHORT
- 14.5 करोड़ का सोलर प्लांट दो साल से बंद।
- हर महीने 40-50 लाख बिजली बिल का भार।
- नेट मीटरिंग सिस्टम अब तक नहीं हुआ लागू।
- मॉनिटरिंग रूम और पैनल उपयोगहीन पड़े हुए हैं।
- ओपन यूनिवर्सिटी सोलर सिस्टम से लगातार बचत कर रही।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी (सीयू) में ऊर्जा बचत और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के नाम पर लगाया गया 2 मेगावाट का सोलर पावर प्लांट पिछले दो वर्षों से पूरी तरह बंद पड़ा है। इस परियोजना पर करीब 14 करोड़ 50 लाख रुपए खर्च किए गए थे, लेकिन इसका लाभ विश्वविद्यालय को लगभग नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि यूनिवर्सिटी को हर महीने 40 से 50 लाख रुपए तक का बिजली बिल चुकाना पड़ रहा है। जिससे आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
दूसरी ओर, पं. सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी में 255 किलोवाट क्षमता का छोटा सोलर सिस्टम सुचारू रूप से काम कर रहा है। इससे संस्थान को हर महीने लगभग 1 लाख रुपए की बचत हो रही है, जो यह दर्शाता है कि सही संचालन और मॉनिटरिंग से सोलर सिस्टम लाभकारी साबित हो सकता है।
सीयू में 17 भवनों की छतों पर सोलर पैनल
सीयू में 17 भवनों की छतों पर सोलर पैनल लगाए गए थे और एक मॉनिटरिंग रूम भी बनाया गया था, लेकिन अब यह व्यवस्था लगभग ठप पड़ी है। नैक निरीक्षण के दौरान विश्वविद्यालय ने बड़े दावे किए थे कि कैंपस की बिजली जरूरत से अधिक उत्पादन होगा, लेकिन वास्तविकता इसके उलट निकली। पिछले दो वर्षों में विश्वविद्यालय बिजली बिलों पर करीब 10 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है।
जानकारी के अनुसार, सोलर प्लांट का ठेका मेकान कंपनी को दिया गया था, जिसे सिस्टम स्थापित कर नेट मीटरिंग के साथ संचालन करना था। हालांकि, अब तक नेट मीटरिंग सिस्टम भी लागू नहीं हो सका है, जिससे सोलर उत्पादन का सीधा लाभ ग्रिड से जोड़कर नहीं मिल पा रहा है।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर जिम्मेदार अधिकारियों की प्रतिक्रिया भी अस्पष्ट रही। सीयू के इंजीनियर आकाश बंसल ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया, जबकि ओएसडी निशांत यादव ने कहा कि जानकारी मीडिया सेल से साझा की जाएगी। वहीं मीडिया सेल प्रभारी डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने भी कहा कि सोलर पैनल और संबंधित दस्तावेजों की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस स्थिति ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली और करोड़ों की परियोजना के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
निष्कर्ष
सीयू का 14.5 करोड़ का सौर ऊर्जा दो साल से बंद है, जिससे हर महीने लाखों का बिजली बिल बढ़ रहा है। नेट मीटरिंग न होने और रखरखाव की कमी से परियोजना निष्फल साबित हो रही है। वहीं ओपन यूनिवर्सिटी का छोटा सोलर सिस्टम सफल उदाहरण बनकर सामने आया है।
यह खबरें भी पढ़ें...
छत्तीसगढ़ में 5 लाख घरों को मिलेगा सौर ऊर्जा का उपहार, सीएम साय ने की घोषणा, ऐसे मिलेगा योजना का लाभ
सौर ऊर्जा से समृद्धि की ओर छत्तीसगढ़, अब हर घर को मुफ्त बिजली और कमाई करने का मौका भी
राजस्थान में सौर ऊर्जा से जोड़कर देंगे 150 यूनिट मुफ्त बिजली, कैबिनेट ने प्रस्ताव पर लगाई मुहर