जन सूचना अधिकारी पर ढाई लाख का जुर्माना, जानकारी छुपाने पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई
NEWS IN SHORT
- सूचना आयोग ने RTI के तहत चार मामलों में जुर्माना लगाया।
- जन सूचना अधिकारी से 2,56,000 रूपए वसूलने का आदेश।
- अन्य चार मामलों में 1.75 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
- छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग का अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना आदेश।
NEWS IN DETAIL
Raipur. छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिसमें सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत पांच मामलों में से चार में जन सूचना अधिकारियों पर जुर्माना लगाया गया है। आयोग ने एक मामले में 126,000 पृष्ठों की जानकारी देने के लिए जन सूचना अधिकारी से 2,56,000 रूपए वसूलने का आदेश जारी किया। विकास तिवारी, सामाजिक कार्यकर्ता छत्तीसगढ़ ने बताया की उन्होंने अपनी द्वितीय अपील के माध्यम से यह मामला प्रस्तुत किया था। चार मामलों में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के जन सूचना अधिकारियों पर कुल 25,000 रूपए से लेकर 1 लाख रूपए तक के जुर्माने का आदेश दिया गया है।
सूचना अधिकारियों पर जुर्माना
राज्य सूचना आयोग द्वारा दिए गए आदेश में सबसे बड़ा जुर्माना एक मामले में लगाया गया है, जिसमें 126,000 पृष्ठों की जानकारी देने के लिए जन सूचना अधिकारी से 2,56,000 रूपए वसूलने का आदेश जारी किया गया है। यह एक ऐतिहासिक कदम है क्योंकि राज्य सूचना आयोग ने अपने सत्यापन वर्ष से लेकर आज तक कभी भी इतना बड़ा जुर्माना नहीं लगाया था।
सूचना का अधिकार क्या है?
पहली बार इतने बड़े जुर्माने का आदेश
विकास तिवारी ने यह भी बताया कि यह पहला मौका है जब छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग ने इतना बड़ा जुर्माना लगाया है। इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम की गंभीरता और प्रभावी कार्यवाही के जरिए जन सूचना अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
सामाजिक प्रभाव और भविष्य की दिशा
यह निर्णय न केवल प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह अन्य जन सेवकों और अधिकारियों को भी चेतावनी देता है कि यदि वे अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करेंगे तो उन्हें कड़ी सजा का सामना करना पड़ेगा। यह फैसला सूचना के अधिकार को सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
राज्य सूचना आयोग का यह कदम निश्चित ही छत्तीसगढ़ के नागरिकों के लिए एक सकारात्मक संदेश है और यह बताता है कि सूचना का अधिकार वास्तव में किसी भी नागरिक का मौलिक अधिकार है, जिसे हर हालत में सम्मानित किया जाना चाहिए।
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