छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशलिटी अस्पताल अब ठेके पर, इलाज होगा महंगा

Aishwarya Dwivedi | Jul 14, 2026, 15:30 IST
सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल का निजीकरण
छत्तीसगढ़ में जगदलपुर के बाद बिलासपुर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल को ठेके पर देने की तैयारी है। इससे इलाज और जरूरी जांचें महंगी होने से मरीजों की जेब कटेगी।

समझें क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ सरकार सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों को निजी हाथों में सौंप रही है। जगदलपुर के बाद अब बिलासपुर अस्पताल को ठेके पर देने की तैयारी है। इस फैसले से सरकारी अस्पतालों में इलाज बेहद महंगा हो सकता है। ओपीडी में आयुष्मान कार्ड काम नहीं करने से मरीजों पर बोझ बढ़ेगा। सरकारी डॉक्टरों और लैब कर्मचारियों में इस फैसले से भारी नाराजगी है।



क्यों लिया जा रहा यह फैसला

छत्तीसगढ़ सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव कर रही है। सरकार सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों को निजी हाथों में सौंप रही है। जगदलपुर अस्पताल के बाद अब बिलासपुर की तैयारी चल रही है। इन अस्पतालों को सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP - Public Private Partnership) मोड पर चलाया जाएगा।



सरकार का दावा है कि इससे व्यवस्थाएं बेहतर होंगी। लेकिन विशेषज्ञ इस दावे पर बड़े सवाल उठा रहे हैं। सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग निजी एजेंसियां करेंगी। मशीनों का खर्च भी सरकार ही उठाएगी। फिर भी अस्पताल का संचालन निजी हाथों में रहेगा।



मरीजों की जेब पर सीधा असर

इस फैसले से आम मरीजों को बड़ा नुकसान होगा। ओपीडी (OPD - Out Patient Department) में इलाज कराने वाले मरीजों की जेब ढीली होगी। ओपीडी में आयुष्मान भारत (ABY - Ayushman Bharat Yojana) कार्ड काम नहीं करता। कार्ड का लाभ केवल भर्ती मरीजों को ही मिलता है।



गंभीर बीमारियों में पहले जांच कराना जरूरी होता है। सिर दर्द या कमर दर्द में डॉक्टर सीटी स्कैन लिखते हैं। न्यूरोलॉजिस्ट या ऑर्थोपेडिक डॉक्टर एमआरआई (MRI - Magnetic Resonance Imaging) जांच की सलाह देते हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही दवा लिखी जाती है।



इन जांचों का खर्च मरीज को खुद देना होगा। सीटी और एमआरआई जांच काफी महंगी होती हैं। मरीजों के सात से दस हजार रुपये खर्च हो जाएंगे। जगदलपुर में पहले ओपीडी शुल्क बहुत अधिक रखा गया था। वहां सात सौ से एक हजार रुपये शुल्क था।



विवाद बढ़ने पर कमिश्नर को हस्तक्षेप करना पड़ा। मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर रितेश अग्रवाल खुद वहां पहुंचे। उन्होंने निजी एजेंसी को सख्त चेतावनी दी। इसके बाद ओपीडी शुल्क में कुछ कमी की गई। लेकिन मरीजों की परेशानी अभी कम नहीं हुई है।



छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशलिटी अस्पताल अब ठेके पर


डॉक्टरों में बढ़ रहा है आक्रोश

इस नीति से एमडी (MD - Doctor of Medicine) डॉक्टरों को बड़ा झटका लगा है। एमएस (MS - Master of Surgery) डिग्रीधारी डॉक्टर भी बेहद परेशान हैं। निजी एजेंसियां अपने हिसाब से डॉक्टरों की भर्ती करेंगी। इससे सरकारी डॉक्टरों के अधिकार कम हो जाएंगे।



अस्पतालों में नियमित सरकारी भर्तियां बंद हो सकती हैं। संविदा पर होने वाली नियुक्तियां भी प्रभावित होंगी। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर खत्म हो जाएंगे। चिकित्सा शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। विभाग खुद अस्पतालों का संचालन क्यों नहीं कर पा रहा है?



सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर अस्पताल बनाए हैं। बस्तर में दो सौ करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार है। वहां कार्डियोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभाग शुरू किए गए हैं। न्यूरोलॉजी और यूरोलॉजी की सुविधाएं भी वहां मौजूद हैं। इतने बड़े सेटअप को ठेके पर देना समझ से परे है।



जांच के नाम पर बड़ा खेल

प्रदेश के जिला अस्पतालों में भी ठेका प्रथा लागू है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ब्लड जांच ठेके पर दी गई है। एक निजी कंपनी को एक हजार से अधिक अस्पतालों का काम मिला है। इस कंपनी का नाम लाइफकेयर लिमिटेड (HLL - Hindustan Latex Limited) है।



यह काम बिना किसी टेंडर के दिया गया है। बिना निविदा काम सौंपने से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अब एक्स-रे जांच को भी ठेके पर देने की तैयारी है। इस फैसले से सरकारी कर्मचारियों में भारी गुस्सा है। लैब टेक्नीशियन और रेडियोग्राफर आंदोलन की राह पर हैं।



कर्मचारियों का कहना है कि वे क्या काम करेंगे? उन्हें प्रतिनियुक्ति पर भेजने की तैयारी की जा रही है। इससे नियमित भर्ती के रास्ते हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे। बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। नियमों को ताक पर रखकर फैसले लिए जा रहे हैं।



सुपर स्पेशलिटी सेवाएं और चुनौतियां

जगदलपुर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में कई गंभीर बीमारियों का इलाज होता है। यहां दिल, गुर्दा और लिवर की बीमारियां ठीक की जाती हैं। न्यूरो सर्जरी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग भी वहां कार्यरत हैं। बस्तर के मरीजों को अब रायपुर नहीं भागना पड़ता।



अधिकारियों का दावा है कि सरकारी दर पर इलाज मिल रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। महंगी जांचों के कारण गरीब मरीज परेशान हो रहे हैं। सरकारी अस्पतालों का निजीकरण स्वास्थ्य ढांचे को कमजोर कर रहा है।



छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र में निजीकरण का विरोध तेज हो रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बड़ा राजनीतिक रूप ले सकता है। मरीजों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की पहली जिम्मेदारी है।



FAQ

  1. छत्तीसगढ़ में कौन से सुपर स्पेशलिटी अस्पताल ठेके पर दिए जा रहे हैं?
    उत्तर: सरकार जगदलपुर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के बाद अब बिलासपुर अस्पताल को ठेके पर देने की तैयारी कर रही है। इन अस्पतालों को पीपीपी मोड पर चलाया जाएगा।
  2. अस्पतालों को ठेके पर देने से मरीजों को क्या नुकसान होगा?
    उत्तर: इससे ओपीडी में इलाज कराने वाले मरीजों के लिए जांचें महंगी हो जाएंगी। ओपीडी में आयुष्मान कार्ड काम नहीं करता है, जिससे मरीजों को जेब से पैसे देने होंगे।

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