छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, कहा- जजों को IPC की धारा 304 का अंतर तक नहीं पता

Umeshwari Baghel | Oct 14, 2026, 17:03 IST
छत्तीसगढ़ HC पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के एक फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। हत्या के मामले में सजा बदलने के तरीके पर शीर्ष अदालत ने सवाल उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने कानूनी प्रावधानों को सही तरीके से नहीं समझा। अदालत ने पूछा कि जब जजों को धारा 304 के दोनों हिस्सों का अंतर नहीं पता तो उनसे सबूतों के सही आकलन की उम्मीद कैसे की जाए।

हत्या के मामले में हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के एक फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। मामला हत्या के एक केस से जुड़ा है। इसमें हाईकोर्ट ने आरोपी की सजा में बदलाव किया था। इसी फैसले की समीक्षा के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई।



जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने कानून को सही तरीके से समझे बिना फैसला दिया। खासतौर पर आईपीसी की धारा 304 के दोनों हिस्सों को लेकर गंभीर टिप्पणी की गई। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा कि हाईकोर्ट ने उपलब्ध सबूतों का सही तरीके से आकलन क्यों नहीं किया।



सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट की हालत देखिए। जजों को आईपीसी की धारा 304 पार्ट-1 और पार्ट-2 का अंतर तक नहीं पता।




अदालत ने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में जजों से सबूतों को सही तरीके से समझने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी हत्या के मामले में सजा बदलने को लेकर थी। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले में कानूनी खामियों की ओर इशारा किया।



पहले आरोपी को मिली थी उम्रकैद

यह मामला छत्तीसगढ़ के सरायपाली से जुड़ा है। यहां अतिरिक्त सत्र न्यायालय में आरोपी के खिलाफ हत्या का मुकदमा चला था। आरोपी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत केस दर्ज था। सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी पाया। इसके बाद आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।



ट्रायल कोर्ट के इस फैसले को आरोपी ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी। उसने सजा के खिलाफ अपील दायर की। हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद आरोपी को आंशिक राहत मिल गई। अदालत ने उसकी अपील को कुछ हद तक स्वीकार कर लिया।




हाईकोर्ट ने बदल दी हत्या की धारा

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आरोपी की दोषसिद्धि में बदलाव कर दिया। पहले आरोपी को आईपीसी की धारा 302 के तहत दोषी ठहराया गया था। हाईकोर्ट ने इसे बदलकर धारा 304 पार्ट-2 कर दिया।



धारा 302 हत्या से संबंधित है। वहीं धारा 304 उन मामलों में लागू होती है जहां गैर-इरादतन हत्या का अपराध बनता है। हाईकोर्ट के इसी फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए। शीर्ष अदालत ने कहा कि फैसला लेते समय जरूरी तथ्यों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।



हथियार और चोटों पर ध्यान नहीं दिया?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने मामले के कई अहम पहलुओं को नजरअंदाज किया। इनमें मृतक को लगी चोटों की प्रकृति भी शामिल है। इसके अलावा घटना में इस्तेमाल हथियारों पर भी ध्यान देना जरूरी था।




अदालत ने घटना की शुरुआत और परिस्थितियों को भी महत्वपूर्ण बताया। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार इन तथ्यों का सही आकलन जरूरी था। शीर्ष अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से ऐसा लगता है कि इन पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया।



क्या है धारा 304 पार्ट-1 और पार्ट-2?

आईपीसी की धारा 304 गैर-इरादतन हत्या की सजा से संबंधित है। इसके दो हिस्से हैं। दोनों के बीच कानूनी अंतर समझना जरूरी है। धारा 304 पार्ट-1: यह तब लागू होती है जब आरोपी का इरादा मौत पहुंचाने का हो।



यह ऐसी शारीरिक चोट पहुंचाने के इरादे पर भी लागू हो सकती है जिससे मौत होने की संभावना हो। इसमें उम्रकैद या दस साल तक की कैद हो सकती है। साथ में जुर्माने का प्रावधान भी है।



धारा 304 पार्ट-2: यह तब लागू होती है जब आरोपी को पता हो कि उसके काम से मौत हो सकती है। हालांकि उसका मौत पहुंचाने या ऐसी चोट देने का इरादा नहीं होता। इसमें दस साल तक की कैद या जुर्माना अथवा दोनों हो सकते हैं।



दोनों धाराओं में आरोपी की मंशा महत्वपूर्ण होती है। घटना की परिस्थितियां और उपलब्ध सबूत भी देखे जाते हैं। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों हिस्सों के अंतर पर जोर दिया।




हाईकोर्ट का फैसला रद्द हो सकता है?

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को लेकर कारण बताने का नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सवाल उठाया कि हाईकोर्ट का फैसला रद्द क्यों नहीं किया जाए। साथ ही ट्रायल कोर्ट की ओर से सुनाई गई हत्या की सजा दोबारा बहाल क्यों नहीं की जाए।



इस संबंध में आरोपी और छत्तीसगढ़ सरकार से जवाब मांगा गया है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला रद्द करने का अंतिम आदेश नहीं दिया है। नोटिस के बाद संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।



अब आगे क्या होगा?

इस मामले में अगली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। आरोपी और राज्य सरकार के जवाब पर आगे विचार किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट यह देखेगा कि हाईकोर्ट ने किन आधारों पर धारा बदली। इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट के फैसले की भी समीक्षा होगी। अब यह देखना होगा कि हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रहता है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले से आरोपी की दोषसिद्धि और सजा की स्थिति स्पष्ट होगी।

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