सूर्यकांत ने उधारी के 5 करोड़ से किया 500 करोड़ का स्कैम, अनिल टुटेजा ने वाट्सएप पर कहा इस बारे में अवेयर हैं सीएम
यह उधारी भिलाई के पप्पू बंसल से ली गई। चार्जशीट में एक और बड़ी बात सामने आई है। घोटाले के दौरान जब कोल वाशरीज पर केंद्रीय एजेंसियों ने छापा मारा था। यह जानकारी गोपनीय रखी गई थी। खनिज सचिव ने जब अनिल टुटेजा से इस बारे में बात की थी। अनिल टुटेजा ने वाट्स एप पर रिप्लाई किया था कि सीएम को इस बारे में जानकारी है। ईओडब्ल्यू के अभियोग पत्र के मुताबिक आरोप है कि तत्कालीन सीएम भूपेश बघेल को इस बारे में जानकारी थी।
उधारी से जमाई अवैध वसूली की व्यवस्था
निखिल चंद्राकर वर्ष 2014-15 से सूर्यकांत तिवारी के साथ काम कर रहा था और उसके परिवार के आयकर, संपत्ति, किराया समेत अन्य वित्तीय कामकाज देखता था। जांच में यह सामने आया कि मई-जून 2020 के दौरान कोयला परिवहन से नकद रकम जमा करने की व्यवस्था प्रारंभ करने की तैयारी की जा रही थी। कार्यालय, वाहन, कर्मचारियों और जिला स्तर पर रकम इकट्ठा करने की व्यवस्था तैयार करने के लिए प्रारंभिक फंड की आवश्यकता थी।
नवनीत तिवारी ने अपने बयान में बताया कि इसी अवधि में वह और निखिल चंद्राकर भिलाई गए थे। जहां पप्पू बंसल से 5 करोड़ रूपये की नकद रकम प्राप्त की गई। उसके अनुसार यह रकम रायपुर लाकर सूर्यकांत तिवारी को दी गई थी। इस रकम का संबंध कोयला लेवी की प्रारंभिक व्यवस्था तैयार करने के खर्चे से पाया गया।
तत्कालीन सीएम को थी कार्रवाई की जानकारी
जून 2019 में कोरबा की कोल वाशरियों पर संयुक्त विभागीय कार्रवाई की गई थी। तत्कालीन आईएएस अनिल टुटेजा और तत्कालीन खनिज सचिव पी अंबलगन के बीच 15 जून 2019 की व्हाट्सएप बातचीत से यह सामने आया कि जून 2019 में कोरबा जिले की प्रमुख कोल वाशरियों पर एक साथ बड़ी और गोपनीय कार्रवाई की योजना बनाई गई थी। इस कार्रवाई में खनिज विभाग के साथ राजस्व, पुलिस, पर्यावरण, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा और आवश्यकतानुसार अन्य विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया।
प्रमुख कोल वाशरियों के कोयला भंडारण, दस्तावेजों, मासिक विवरण, वाहनों और भौतिक भंडार की जांच की गई। इसके बाद कारण बताओ नोटिस जारी करने, सीलबंदी, वाहनों की जब्ती और अर्थदंड की कार्रवाई हुई। 15 जून 2019 की व्हाट्सएप बातचीत में पी अंबलगन ने अनिल टुटेजा को कोरबा की कोल वाशरियों में होने वाली औचक कार्रवाई की जानकारी दी थी। बातचीत में बताया गया कि कार्रवाई को गोपनीय है और इसकी पूरी जानकारी केवल संचालक, खनिज और कलेक्टर,कोरबा को है।
खनिज,राजस्व और पुलिस अधिकारियों को कार्रवाई का कारण बताए बिना बुलाया गया। कार्रवाई का आधार अवैध कोयला अदला-बदली और सरकार को राजस्व हानि से संबंधित शिकायतों को बताया गया। पी अंबलगन द्वारा मामले की जानकारी मुख्यमंत्री तक पहुंचाने की बात कहे जाने पर अनिल टुटेजा ने Hcm is aware of it लिखा। यानी सीएम इस बारे में जानते हैं। यह कार्रवाई जीएसटी,पर्यावरण और अन्य प्रवर्तन विभागों ने की। यानी सीधे तौर पर यह कार्रवाई केंद्रीय एजेंसियों की तरफ से की गई थी।
घोटाले के लिए बदल दी ट्रांसपोर्ट प्रक्रिया
15 जुलाई को खनिज संचालनालय से एक आदेश जारी किया गया। उप संचालक महिपाल सिंह कंवर ने लिखा कि संचालक महोदय द्वारा दिए गए निर्देश के परिपालन में संशोधित पत्र का प्रारूप है। संशोधित प्रारूप पर कार्यवाही के बाद अंतिम आदेश जारी हुआ। इस आदेश से कोयले की ऑनलाइन ई-परमिट व्यवस्था समाप्त नहीं की गई।
ई-परमिट ऑनलाइन ही जारी होना था, लेकिन उसके पहले संबंधित जिला खनिज अधिकारी द्वारा डीओ का परीक्षण एवं अनुमोदन आवश्यक कर दिया गया। पहले रॉयल्टी और अन्य देय राशि जमा होने पर ऑनलाइन ई-परमिट जारी हो जाता था। आदेश के बाद इस प्रक्रिया में जिला खनिज अधिकारी की पूर्व स्वीकृति का अतिरिक्त चरण जुड़ गया। विवेचना के दौरान अनुराग दीवान को आदेश का वह प्रारूप दिखाया गया, जिसमें विभिन्न स्थानों पर हस्तलिखित काट-छांट एवं संशोधन थे।
उन्होंने संबंधित सुधारों को अपनी लिखावट का होना बताया और कहा कि समीर विश्नोई द्वारा बताए गए स्थानों पर उन्होंने ये संशोधन किए थे। यानी आईएएस समीर विश्नोई ने कोरबा कलेक्टर रानू साहू के प्रस्ताव पर इस तरह की व्यवस्था कर दी ताकि अवैध वसूली आसानी से की जा सके।