शिक्षकों की पदोन्नति पर बड़ा विवाद, TET की शर्त से नाराजगी, संघ ने खोला मोर्च
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ विद्यालय शिक्षक कर्मचारी संघ ने प्रदेश में शिक्षकों की पदोन्नति को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को पत्र सौंपा है। संघ ने मांग की है कि मध्य प्रदेश की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी विभागीय नियमों के तहत शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी की जाए। संघ ने छत्तीसगढ़ भर्ती पदोन्नति अधिनियम 2026 के प्रावधानों के अनुसार पदोन्नति कराने की मांग की है।
यह मांग ऐसे समय में उठी है जब लोक शिक्षण संचालनालय यानी DPI (Directorate of Public Instruction) ने हाल ही में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET (Teacher Eligibility Test) उत्तीर्ण शिक्षकों की पदोन्नति के निर्देश दिए हैं।
संघ का कहना है कि इस निर्देश से प्रदेश भर के शिक्षकों में नाराजगी है।
मध्य प्रदेश के पत्र का दिया हवाला
संघ के प्रांताध्यक्ष संजय तिवारी ने मंत्री को लोक शिक्षण संचालनालय, मध्य प्रदेश का पत्र भी सौंपा। इसमें स्पष्ट किया गया है कि TET का पदोन्नति से कोई संबंध नहीं है।
संघ का कहना है कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में शिक्षाकर्मियों की भर्ती लगभग एक ही समय और समान नियमों के तहत हुई थी। इसी आधार पर संघ का तर्क है कि दोनों राज्यों में पदोन्नति के नियमों में अंतर नहीं होना चाहिए।
DPI के निर्देश से बढ़ी नाराजगी
संजय तिवारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ में DPI ने हाल ही में संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों की बैठक लेकर TET उत्तीर्ण शिक्षकों की पदोन्नति के निर्देश दिए हैं।
संघ के मुताबिक इस निर्देश की वजह से उन शिक्षकों में नाराजगी बढ़ी है, जिन्होंने TET पास नहीं किया है, लेकिन वे पदोन्नति के लिए पात्र मानी जाने वाली सेवा शर्तें पूरी करते हैं।
उत्तराखंड के आदेश का भी दिया उदाहरण
संघ ने उत्तराखंड के आदेश का भी हवाला देते हुए कहा कि वहां सभी शिक्षकों की पदोन्नति कर वर्ष 2028 तक TET उत्तीर्ण करने का अवसर दिया गया है।
संघ ने इन राज्यों के आदेशों का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में भी इसी तर्ज पर पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। यानी संघ चाहता है कि पहले पदोन्नति दी जाए और TET पास करने के लिए बाद में समय दिया जाए।
संघ का मुख्य तर्क
संघ के मुताबिक पदोन्नति एक सेवा-संबंधी अधिकार है, जबकि TET एक पात्रता परीक्षा है, जिसका सीधा संबंध पदोन्नति प्रक्रिया से नहीं होना चाहिए। संघ इसे कर्मचारियों के हितों से जुड़ा मुद्दा मानता है।
यह मांग अभी सिर्फ शिक्षक संघ का पक्ष है, इस पर शासन का औपचारिक जवाब अभी सामने नहीं आया है।
अब आगे क्या
मंत्री को सौंपे गए पत्र के बाद अब यह देखना अहम होगा कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है। अगर छत्तीसगढ़ भर्ती पदोन्नति अधिनियम 2026 के तहत बदलाव होता है, तो इसका सीधा असर प्रदेश के हजारों शिक्षकों पर पड़ेगा।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और शिक्षक संघ के बीच आगे बातचीत हो सकती है।
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