एमपी में सीआर विवाद: पदोन्नति रुकने पर भड़के कर्मचारी, दी आंदोलन की चेतावनी
Amresh Kushwaha | Aug 06, 2026, 09:45 IST
एमपी में सीआर विवाद
मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की सीआर को लेकर असंतोष बढ़ गया है। कर्मचारी संगठनों ने सरकार को 11 सूत्री मांगपत्र सौंपने की तैयारी की है। आरोप है कि बिना सूचना दी गई निम्न ग्रेडिंग से कर्मचारियों का करियर प्रभावित हुआ है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश में कर्मचारियों की गोपनीय चरित्रावली को लेकर विवाद बढ़ा है।
- कर्मचारी संगठनों ने सरकार को 11 सूत्री मांगपत्र सौंपने की तैयारी की है।
- आरोप है कि निम्न ग्रेडिंग से पदोन्नति पर असर पड़ रहा है।
- मार्च 2026 के निर्देशों का कई विभागों में पालन नहीं हो रहा है।
- संगठन ने साफ कहा है कि पारदर्शिता नहीं तो आंदोलन होगा।
सीआर को लेकर बढ़ी नाराजगी
इसकी वजह से बिना सूचना दिए निम्न ग्रेडिंग कर दी जाती है। इसका सीधा असर कर्मचारियों की पदोन्नति पर पड़ रहा है। इससे हजारों कर्मचारियों का करियर प्रभावित हुआ है। संगठनों का कहना है कि यह स्थिति लंबे समय से चली आ रही है।
कर्मचारियों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि सुधार के आदेश सिर्फ कागजों पर रह गए हैं। मार्च 2026 में सीआर के प्रकटन, आपत्ति और अपग्रेडेशन को लेकर निर्देश जारी हुए थे। इसके बावजूद अधिकांश विभागों में इन निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है। इसी वजह से कर्मचारी संगठनों में नाराजगी और बढ़ गई है। अब वे सीधे सरकार से जवाब मांग रहे हैं।
पहला चरण, तुरंत असर वाली मांगें
इसके साथ ही सीआर का प्रकटन और डाउनलोड सुविधा एक ही दिन में उपलब्ध कराने की मांग की गई है। कोरोना काल के दौरान की गई निम्न ग्रेडिंग को खत्म करने की भी मांग रखी गई है। इसमें साल 2023-24 और 2024-25 की समयावधि शामिल है।
संगठन ने यह भी मांग की है कि सीआर का मूल्यांकन अपग्रेड के आधार पर किया जाए। साथ ही ग श्रेणी या निम्न ग्रेडिंग मिलने पर कर्मचारी को अनिवार्य रूप से सूचना दी जाए। इसके अलावा पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय समिति बनाने की मांग भी रखी गई है। संगठन का कहना है कि ये सभी मांगें तत्काल पूरी होनी चाहिए।
दूसरा चरण, जवाबदेही तय हो
दूसरी मांग है कि बिना नोटिस दिए प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज करने वाले अधिकारियों पर आर्थिक दंड लगाया जाए। इसमें उनकी वेतनवृद्धि रोकने का प्रावधान भी शामिल है। संगठन का मानना है कि इससे जिम्मेदार अधिकारी सतर्क रहेंगे।
तीसरा चरण, स्थायी व्यवस्था की मांग
तीसरा सुझाव है कि कर्मचारियों के आवेदनों की ई-फाइल ट्रैकिंग हो। इसके साथ ही हर महीने प्रगति रिपोर्ट देना भी अनिवार्य किया जाए। संगठन का कहना है कि इन बदलावों से भविष्य में विवाद की गुंजाइश ही नहीं बचेगी।
लागू होने पर मिलेगी बड़ी राहत
पदोन्नति से पहले उन्हें न्याय पाने का अवसर भी मिल सकेगा। अभी यह देखना बाकी है कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है। कर्मचारी संगठनों ने साफ कर दिया है कि अगर पारदर्शिता नहीं आई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर कर्मचारी संगठन के आधिकारिक बयान और मांगपत्र पर आधारित है। इसमें किसी विभाग या अधिकारी पर बिना आधार आरोप नहीं लगाया गया है। सरकारी तंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता बनी रहे, यह हर नागरिक और कर्मचारी दोनों के हित में जरूरी है।
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