8 साल बाद मिली खुशी, पर TET से उलझा MP में 35 हजार शिक्षकों का प्रमोशन
Sourabh Bhatnagar | Jul 30, 2026, 08:16 IST
mp teacher promotion tet issue
मध्य प्रदेश में 8 साल बाद प्रमोशन शुरू हुए, लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग अटका है। यहां 35 हजार शिक्षकों का प्रमोशन टीईटी के पेंच में फंसा है। सरकार के सामने तीन विकल्प हैं। शिक्षक संगठन ने भी जल्द फैसले की मांग की है।
समझें क्या है पूरा मामला
- मप्र में 8 साल बाद प्रमोशन का रास्ता खुला है।
- स्कूल शिक्षा विभाग में अब भी प्रमोशन अटके हैं।
- टीईटी की अनिवार्यता को लेकर सरकार असमंजस में है।
- करीब 35 हजार शिक्षकों का मामला उलझा हुआ है।
- विभाग ने सरकार के सामने तीन विकल्प रखे हैं।
42 हजार में सिर्फ 7 हजार पात्र
सवाल यह है कि प्रमोशन किसे दिया जाए। एक विकल्प है कि सिर्फ टीईटी पास शिक्षकों को प्रमोशन मिले। दूसरा विकल्प है कि सभी शिक्षकों को डीपीसी में शामिल किया जाए। विभाग ने सभी शिक्षकों की सीआर (Confidential Report) पहले ही जुटा ली है। लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है। सूत्रों के मुताबिक मामला अब उच्च स्तर पर विचाराधीन है।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
माना जा रहा है कि सरकार भी टीईटी के पक्ष में जाएगी। ऐसा हुआ तो नतीजा साफ होगा। 35 हजार शिक्षकों को दो साल में टीईटी पास करनी होगी। आरटीई (Right To Education) एक्ट में एक पुरानी छूट भी थी।
2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट मिली थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह छूट खत्म हो गई। अब टीईटी हर शिक्षक के लिए जरूरी मानी जा रही है।
इस उलझन का असर आरक्षित वर्ग पर भी पड़ रहा है। टीईटी में करीब चार हजार शिक्षक फंसे हैं। ये अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग से हैं। ट्राइबल डिपार्टमेंट में भी प्रमोशन शुरू नहीं हो पाया है। वहां भी अधिकारी टीईटी पर स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं।
सरकार के सामने तीन विकल्प
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शिक्षक संगठन की मांग
संभागवार प्रमोशन की स्थिति
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अन्य विभागों में भी विवाद
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, पीडब्ल्यूडी (Public Works Department) और वन विभाग इसमें शामिल हैं। कुल मिलाकर 8 विभागों में यह विवाद है। कर्मचारियों को आशंका है कि नियमों की अलग व्याख्या हो रही है।
इससे पात्र कर्मचारी प्रमोशन से वंचित हो सकते हैं। दरअसल चयन वर्ष 2025 के लिए एक तारीख तय है। विभाग 31 दिसंबर 2024 को विचारण तिथि मान रहे हैं। इसी तारीख की सूची से पात्रता तय हो रही है। कुछ कर्मचारी इसके बाद रिटायर भी हो गए। ऐसे कर्मचारियों को भी प्रोफार्मा प्रमोशन दिया जा रहा है। कर्मचारियों की मांग है कि नियम एक जैसा हो। हर विभाग में 31 दिसंबर 2024 की तारीख ही मानी जाए। पात्रता, वरिष्ठता और अनुशासनात्मक स्थिति के लिए यही तारीख आधार बने।
FAQ
- प्रश्न 1: मध्य प्रदेश में शिक्षकों का प्रमोशन क्यों अटका है?
उत्तर: मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग में 42 हजार शिक्षकों में से सिर्फ 7 हजार ही टीईटी पात्र हैं। बाकी 35 हजार शिक्षकों के पास टीईटी योग्यता नहीं है। सरकार तय नहीं कर पा रही कि प्रमोशन किसे दिया जाए। इसी वजह से डीपीसी की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। - प्रश्न 2: टीईटी क्या है और यह जरूरी क्यों है?
उत्तर: टीईटी यानी टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट, शिक्षक बनने की एक अनिवार्य योग्यता परीक्षा है। यह शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत लागू हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी साफ कहा है कि बिना टीईटी पास किए किसी को शिक्षक नहीं रखा जा सकता। इसीलिए मप्र सरकार भी इस मामले में टीईटी को अनिवार्य मान सकती है। - प्रश्न 3: मध्य प्रदेश सरकार के सामने शिक्षकों के प्रमोशन के लिए कौन से विकल्प हैं?
उत्तर: सरकार के सामने तीन विकल्प हैं। पहला, सिर्फ डीएड पास शिक्षकों को प्रमोशन दिया जाए। दूसरा, डीटीड पास होने तक इंतजार किया जाए। तीसरा, सशर्त प्रमोशन दिया जाए और बाद में डीटीड पास करने पर पुरानी तारीख से लाभ मिले।
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