खत्म होगा शिक्षकों का अटैचमेंट! डीपीआई के आदेश से मची शिक्षकों में हलचल, मंगाई रिपोर्ट

VINAY VERMA | May 20, 2026, 13:08 IST
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छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षकों के अटैचमेंट सिस्टम पर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। 5 जून 2025 से प्रदेश में सभी संलग्न शिक्षकों का अटैचमेंट स्वतः समाप्त माना जाएगा। डीपीआई ने सभी विभागों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के अटैचमेंट को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि 5 जून 2025 से प्रदेश के सभी विभागों में कार्यरत संलग्न शिक्षकों का अटैचमेंट स्वतः समाप्त माना जाएगा। यानी 5 जून 2025 के बाद से अटैचमेंट को लेकर जो आदेश जारी किए गए हैं, वे अमान्य हो जाएंगे।



DPI ने सभी संभागीय संयुक्त संचालकों को निर्देश जारी किए हैं। आदेश के बाद शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से विभिन्न कार्यालयों और विभागों में अटैच चल रहे शिक्षकों के सामने अब मूल स्कूल लौटने की स्थिति बन गई है। नहीं लौटने वालों पर कार्रवाई की तैयारी है।



डीपीआई ने मांगी तत्काल रिपोर्ट:

डीपीआई द्वारा जारी पत्र में सभी अधिकारियों से संलग्न शिक्षकों की विस्तृत जानकारी तत्काल भेजने को कहा गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि रिपोर्ट उसी दिन उपलब्ध कराई जाए, ताकि इसे विभागीय स्तर और विधानसभा में प्रस्तुत किया जा सके। अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि सूची पूरी तरह अद्यतन और तथ्यात्मक हो। किसी भी तरह की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा। विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि अब अटैचमेंट व्यवस्था पर कड़ाई से कार्रवाई होगी।



विधानसभा शून्यकाल के बाद बढ़ी सख्ती:

डीपीआई के पत्र में विधानसभा शून्यकाल का उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि उसी के आधार पर यह कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है। साथ ही स्थानांतरण नीति वर्ष 2025 का हवाला देते हुए कहा गया है कि 5 जून 2025 के बाद सभी प्रकार के संलग्नीकरण समाप्त माने जाएंगे। सरकार का मानना है कि वर्षों से चली आ रही अटैचमेंट व्यवस्था ने स्कूलों में शिक्षकों की वास्तविक उपलब्धता को प्रभावित किया है। कई स्कूलों में पद तो थे, लेकिन शिक्षक दूसरे विभागों में काम कर रहे थे।



स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने की कोशिश:

सरकार इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था के सुधार से जोड़कर देख रही है। अधिकारियों का कहना है कि संलग्न शिक्षकों की वापसी से स्कूलों में स्टाफ की उपलब्धता बेहतर होगी। ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों के कई स्कूल लंबे समय से शिक्षक संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे में मूल पदस्थापना पर शिक्षकों की वापसी से पढ़ाई व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने को भी इस फैसले की बड़ी वजह बताया जा रहा है।



शिक्षकों में बढ़ी बेचैनी:

आदेश सामने आने के बाद प्रदेशभर में शिक्षकों के बीच असमंजस और बेचौनी बढ़ गई है। बड़ी संख्या में शिक्षक वर्षों से विभिन्न कार्यालयों, परियोजनाओं और विभागों में संलग्न होकर काम कर रहे थे। अब अचानक वापसी के आदेश से कई लोगों की कार्यप्रणाली और निजी व्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं। कुछ शिक्षक संगठन इस फैसले पर आपत्ति की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के एक साथ इतने अटैचमेंट खत्म करने से कई विभागीय काम प्रभावित हो सकते हैं।



ग्राउंड पोस्टिंग, सरकार का फोकस:

सरकार और शिक्षा विभाग का रुख फिलहाल पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। संकेत साफ हैं कि अब ऑफिस अटैचमेंट संस्कृति पर लगाम लगाई जाएगी। विभाग चाहता है कि शिक्षक वहीं रहें, जहां उनकी मूल पदस्थापना है। डीपीआई ने अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से पूरी प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। आने वाले दिनों में इस फैसले का असर पूरे शिक्षा विभाग में बड़े प्रशासनिक फेरबदल के रूप में दिखाई दे सकता है।



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