बड़ी घोषणा : तीजन बाई का पैतृक गांव गनियारी बनेगा कला ग्राम
Raipur। छत्तीसगढ़ की लोककला की सबसे बुलंद आवाज अब खामोश हो चुकी है। लेकिन उनकी विरासत को हमेशा जिंदा रखने के लिए सरकार ने बड़े फैसले किए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने श्रद्धांजलि सभा में कई अहम घोषणाएं कीं। अब पंडवानी की दुनिया में हर साल पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई राज्य सम्मान दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों को लोककला से जोड़ने का माध्यम बनेगा।
गनियारी बनेगा कला की नई पहचान
सरकार ने तीजन बाई के पैतृक गांव गनियारी को कला ग्राम के रूप में विकसित करने का फैसला लिया है। मकसद सिर्फ गांव का विकास नहीं, बल्कि पंडवानी और छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को नई पहचान देना है। यहां लोक कलाकारों को मंच, प्रशिक्षण और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए बेहतर माहौल तैयार किया जाएगा। सरकार चाहती है कि गनियारी देशभर में लोककला के केंद्र के रूप में पहचाना जाए।
तंबूरा रहेगा संग्रहालय में, ताकि इतिहास बोले
तीजन बाई की पहचान सिर्फ उनकी आवाज नहीं थी, उनका तंबूरा भी उनकी कला का प्रतीक था। अब इस तंबूरे को रायपुर स्थित महंत घासीदास संग्रहालय में सुरक्षित रखा जाएगा। यहां आने वाले लोग उस विरासत को करीब से देख सकेंगे, जिसने पंडवानी को दुनिया के मंच तक पहुंचाया। सरकार इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक धरोहर के रूप में संरक्षित करेगी।
स्कूल भी तीजन बाई के नाम पर
सिर्फ संस्कृति विभाग ही नहीं, स्कूल शिक्षा विभाग ने भी बड़ा फैसला लिया है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने घोषणा की है कि दुर्ग जिले के गनियारी स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल का नाम बदलकर डॉ. तीजन बाई शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गनियारी रखा जाएगा। इससे गांव के बच्चों को अपनी धरती की महान कलाकार से प्रेरणा मिलेगी और उनकी उपलब्धियों को नई पीढ़ी याद रखेगी।
कलाकार जाते हैं, विरासत नहीं
सरकार के इन फैसलों को तीजन बाई के योगदान का स्थायी सम्मान माना जा रहा है। पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली कलाकार अब भले हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके नाम पर पुरस्कार, कला ग्राम, संग्रहालय और स्कूल जैसी पहलें उनकी विरासत को लंबे समय तक जीवित रखेंगी। अब नजर इस बात पर होगी कि ये घोषणाएं कितनी जल्दी जमीन पर उतरती हैं और लोककला को कितना नया संबल मिलता है।
IMP FACTS
तीजन बाई के नाम पर हर साल राज्य सम्मान दिया जाएगा।
गनियारी गांव को कला ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा।
तीजन बाई का तंबूरा महंत घासीदास संग्रहालय में रखा जाएगा।
गनियारी के सरकारी स्कूल का नाम डॉ. तीजन बाई के नाम पर होगा।
सरकार का लक्ष्य पंडवानी और लोककला की विरासत को आगे बढ़ाना है।
FAQ
- तीजन बाई के नाम पर कौन सा सम्मान शुरू किया जाएगा?
छत्तीसगढ़ सरकार ने पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई के नाम पर हर साल राज्य सम्मान देने की घोषणा की है। - तीजन बाई के गांव गनियारी को लेकर क्या फैसला हुआ है?
गनियारी गांव को कला ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि लोककला और पंडवानी को बढ़ावा मिल सके। - तीजन बाई का तंबूरा कहां सुरक्षित रखा जाएगा?
उनका प्रसिद्ध तंबूरा रायपुर स्थित महंत घासीदास संग्रहालय में संरक्षित रखा जाएगा।
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