छत्तीसगढ़ की माटी से पद्मविभूषण तक : तीजन बाई के संघर्ष की अमर गाथा

Aishwarya Dwivedi | Jul 05, 2026, 13:59 IST
Share
तीजन-बाई-संघर्ष-से-पद्म-विभूषण
तीजन-बाई-संघर्ष-से-पद्म-विभूषण

गनियारी गांव की तीजनबाई ने समाज की बंदिशें तोड़कर पुरुषों के वर्चस्व वाली कापालिक शैली में पंडवानी गाकर इतिहास रचा। पद्मविभूषण से सम्मानित इस विद्रोही कलाकार की आवाज हमेशा अमर रहेगी।

यह कहानी छत्तीसगढ़ की एक ऐसी बेटी की है जिसने समाज की बेड़ियों को तोड़कर इतिहास रच दिया। गनियारी गांव की रहने वाली तीजनबाई ने पुरुषों के वर्चस्व वाली 'कापालिक' शैली में पंडवानी गाकर दुनिया को हैरान कर दिया। हाथ में तंबूरा लेकर जब वह मंच पर दहाड़ती थीं, तो साक्षात महाभारत जीवंत हो उठती थी। उनकी इस अनोखी कला ने उन्हें पद्मश्री से लेकर पद्मविभूषण तक पहुंचाया। आज भले ही उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया हो, लेकिन उनके संघर्ष की यह कहानी हमेशा अमर रहेगी।

गनियारी गांव की वो जिद्दी लड़की

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का एक छोटा सा गांव है गनियारी। इसी गांव में एक नन्ही लड़की रहती थी, जिसका नाम था तीजन। तीजन को बचपन से ही एक धुन सवार थी। वह अपने नाना को महाभारत की कहानियां गाते हुए सुनती थी।

बस यहीं से उसके दिल में 'पंडवानी' यानी पांडवों की वाणी बस गई। वह छिप-छिपकर नाना के गाए शब्दों को दोहराती। अपनी सुरीली और कड़क आवाज में वह दीवारों से बातें करती। लेकिन उस दौर में एक लड़की का गाना समाज को कतई मंजूर नहीं था।

जब समाज ने खड़ी की दीवारें

पंडवानी गाने के दो तरीके होते हैं। एक होता है वेदमती, जिसमें कलाकार चुपचाप बैठकर शांत भाव से गाता है। समाज चाहता था कि अगर तीजन गाए भी, तो इसी बंदिश में रहकर गाए।

दूसरा तरीका था कापालिक शैली। इसमें कलाकार मंच पर खड़ा होता है। वह पूरे रौब और हाव-भाव के साथ वीर रस में गाता है। इस शैली पर सिर्फ पुरुषों का अधिकार माना जाता था। लेकिन तीजन के भीतर की विद्रोही कलाकार को बैठकर गाना मंजूर नहीं था।

हाथ में तंबूरा और वो पहला विद्रोह

मात्र 13 साल की उम्र में तीजनबाई ने एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने पुरुषों की तरह मंच पर खड़े होकर कापालिक शैली में गाने की ठान ली। उन्होंने अपने हाथ में एक तंबूरा थामा।

यह तंबूरा सिर्फ एक वाद्य यंत्र नहीं था। मंच पर आते ही यह कभी अर्जुन का धनुष बन जाता, तो कभी भीम की गदा। जब तीजनबाई ने पहली बार गांव के मंच पर पैर पटका, तो रूढ़िवादी लोग भड़क उठे। उन्हें जाति और समाज से बाहर करने की धमकियां दी गईं। लेकिन तीजनबाई ने हार नहीं मानी।

तीजन बाई का जीवन
तीजन बाई का जीवन


हबीब तनवीर की पारखी नजर

कहते हैं कि हीरे की चमक अंधेरे में भी छिपती नहीं है। तीजनबाई की इस अनोखी प्रतिभा पर मशहूर रंगकर्मी हबीब तनवीर की नजर पड़ी। उन्होंने तीजनबाई के भीतर सुलग रही उस आग को पहचाना।

हबीब तनवीर ने तीजनबाई को बड़े शहरों के मंचों पर मौका दिया। अब तीजनबाई सिर्फ छत्तीसगढ़ की गलियों तक सीमित नहीं थीं। उनकी आवाज देश की राजधानी दिल्ली तक गूंजने लगी थी। लोग एक महिला को इस रौद्र रूप में महाभारत गाते देख दांतों तले उंगली दबा लेते थे।

सात समंदर पार गूंजी पांडव वाणी

तीजनबाई की कला का जादू ऐसा चला कि देश की सीमाएं छोटी पड़ गईं। वे हाथ में तंबूरा लिए सात समंदर पार विदेशों में भी प्रस्तुति देने गईं। फ्रांस, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड जैसे देशों के लोग उनकी भाषा भले न समझें, लेकिन उनके भाव देखकर झूम उठते थे।

जब वे मंच पर अपनी कड़क आवाज में 'जयद्रथ वध' या 'जरासंध वध' का प्रसंग सुनाती थीं, तो दर्शकों के रोंगटे खड़े हो जाते थे। छत्तीसगढ़ की माटी की महक उन्होंने पूरी दुनिया में फैला दी थी।

तीन पद्मों की गौरवगाथा

तीजनबाई की इस अद्भुत साधना का मूल्यांकन उन्हें मिले सम्मानों से किया जा सकता है। भारत सरकार ने उन्हें देश के तीन सबसे बड़े नागरिक पुरस्कारों से नवाजा। उन्हें पद्मश्री मिला, फिर पद्मभूषण और अंत में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया।

पूरे देश में सत्यजीत रे, अमिताभ बच्चन और उस्ताद जाकिर हुसैन जैसी गिनी-चुनी हस्तियां हैं, जिनके पास ये तीनों सम्मान हैं। इन महान दिग्गजों के बीच छत्तीसगढ़ की यह साधारण सी दिखने वाली आदिवासी महिला अकेली प्रतिनिधि बनकर खड़ी थी।

तंबूरा खामोश हुआ, पर आवाज अमर रहेगी

समय का चक्र घूमा और आज लोक गायिका तीजन बाईका देह पंचतत्व में विलीन हो गया। गनियारी का वो तंबूरा आज हमेशा के लिए शांत हो गया है। लेकिन जब भी छत्तीसगढ़ की लोक कला का नाम लिया जाएगा, तीजनबाई का नाम सबसे पहले चमकेगा।

सौजन्य से - संजय दुबे

यह खबरें भी पढ़ें...

लोक गायिका ने दिया सीएम मोहन यादव को 'जीजाजी' का सम्मान, नया टाइटल छाया सोशल मीडिया पर

Sharda Sinha Death : बिहार की लोक गायिका ने एम्स में ली अंतिम सांस

विमान दुर्घटना में नेपाल की लोक गायिका नीरा छन्त्याल का निधन, एक माह पहले ही यू ट्यूब पर शेयर किया था नया वीडियो

नहीं रहीं मशहूर गायिका आशा भोसले, मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन

Tags:
  • छत्तीसगढ़
  • भारत सरकार
  • कलाकार
  • महाभारत
  • लोक गायिका तीजन बाई
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती

By VINAY VERMA

मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती