तेलंगाना में 47 माओवादियों का सामूहिक सरेंडर, DVC कमांडर भी शामिल

Harrison Masih | Apr 25, 2026, 17:56 IST
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तेलंगाना में 47 माओवादियों ने पुलिस के सामने सामूहिक आत्मसमर्पण किया, जिसमें दक्षिण बस्तर DVC के वरिष्ठ कमांडर भी शामिल हैं। इस सरेंडर के साथ 32 हथियार, 515 जिंदा कारतूस और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद हुई।

तेलंगाना में नक्सल विरोधी अभियानों को बड़ी सफलता मिली है। मंगलवार को 47 माओवादियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। सुरक्षा एजेंसियां इसे नक्सल संगठन के लिए एक बड़ा झटका मान रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इस सामूहिक सरेंडर के बाद दक्षिण बस्तर डिवीजनल कमेटी (DVC) लगभग खत्म होने की कगार पर पहुंच गई है।



दो बड़े नेताओं की अगुवाई में हुआ सरेंडर

इस बड़े आत्मसमर्पण की अगुवाई नक्सल संगठन के दो वरिष्ठ कमांडरों ने की, हेमला आयथु उर्फ विज्जा (दक्षिण बस्तर DVC प्रभारी), पोडियम लाचू उर्फ मनोज (9वीं बटालियन कमांडर) इन दोनों नेताओं के साथ कुल 47 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए।



सरेंडर करने वालों का कैडर विवरण

सरेंडर करने वाले नक्सलियों में विभिन्न स्तर के कैडर शामिल थे:



  • 1 SCM स्तर का नेता
  • 3 DVCM / CyPCM स्तर के सदस्य
  • 24 ACM / PPCM कैडर
  • 19 पार्टी सदस्य

यह दर्शाता है कि यह केवल सामान्य कैडर नहीं बल्कि संगठन की संरचना से जुड़े महत्वपूर्ण सदस्य भी हैं।



भारी मात्रा में हथियार बरामद

आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने सुरक्षा बलों को बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री भी सौंप दी:



  • 1 LMG (लाइट मशीन गन)
  • 4 AK-47 राइफल
  • 3 SLR राइफल
  • 2 INSAS राइफल
  • 12 सिंगल शॉट गन
  • 2 पिस्टल/रिवॉल्वर
  • 2 BGL गन
  • 515 जिंदा कारतूस
  • लगभग 100 किलो कोर्डटेक्स वायर (विस्फोटक उपयोग हेतु)

पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता

तेलंगाना सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इस पूरे सरेंडर के लिए लगभग 1.5 करोड़ रूपए की सहायता राशि वितरित की जाएगी। छत्तीसगढ़ मूल के कैडरों को तुरंत 25-25 हजार रूपए की अंतरिम राहत दी गई है। इस सहायता का उद्देश्य उन्हें मुख्यधारा में जोड़ना और नया जीवन शुरू करने में मदद करना है।



अब तक 260 नक्सलियों का आत्मसमर्पण

पुलिस के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक तेलंगाना में कुल 260 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि अब तेलंगाना मूल के केवल 4 सक्रिय नक्सली अन्य राज्यों में बचे हैं। दक्षिण बस्तर DVC लगभग निष्क्रिय हो चुकी है।



बड़े नक्सली नेताओं से मुख्यधारा में लौटने की अपील

पुलिस और प्रशासन ने अब भी सक्रिय शीर्ष नक्सली नेताओं से हिंसा छोड़ने की अपील की है। इनमें प्रमुख नाम शामिल हैं गणपति, संतोष, सुजाता, मंगतू। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा हालात में संगठन लगातार कमजोर हो रहा है और आत्मसमर्पण ही एकमात्र रास्ता है।



निष्कर्ष

यह सामूहिक आत्मसमर्पण नक्सल आंदोलन के लिए एक रणनीतिक झटका माना जा रहा है। भारी संख्या में कैडरों और हथियारों का सरेंडर इस बात का संकेत है कि सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और पुनर्वास नीतियां अब जमीनी स्तर पर असर दिखा रही हैं।



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