तेंदूपत्ता संग्रहण; वनांचल में बरसेगी समृद्धि, वन विभाग ने पूरा किया तैयारियों का रोडमैप
NEWS IN SHORT
- बस्तर में तेंदूपत्ता संग्रहण सीजन शुरू।
- वन विभाग ने 75 समितियों के साथ तैयारी की।
- बीजापुर से सबसे ज्यादा तेंदूपत्ता संग्रहण की उम्मीद।
- तेंदूपत्ता को हरा सोना माना जाता है।
- नक्सलवाद के बाद संग्राहकों को राहत मिली है।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में हरा सोना के नाम से मशहूर तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य शुरू हो गया है। मौसम के अनुकूल होने से संग्राहकों में खासा उत्साह है और वन विभाग ने 75 समितियों और 1710 से अधिक फड़ों के साथ इस सीजन के लिए पूरी तैयारी कर ली है। बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों में तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य बड़े पैमाने पर हो रहा है।
बीजापुर में सबसे अधिक संग्रहण
इस वर्ष तेंदूपत्ता का संग्रहण 20 अप्रैल से शुरू हो चुका है और यह मई तक जारी रहेगा। यदि मौसम ने साथ दिया, तो इस बार समय से पहले लक्ष्य को पूरा करने की उम्मीद जताई जा रही है। वन विभाग के अनुसार, बस्तर को इस वर्ष 2 लाख 70 हजार 600 मानक बोरा तेंदूपत्ता खरीदी का लक्ष्य मिला है। सबसे अधिक संग्रहण की उम्मीद बीजापुर जिले से जताई जा रही है, जहां तेंदूपत्ता की पैदावार सामान्य रूप से अधिक होती है।
तेंदूपत्ता की अहमियत
तेंदूपत्ता को बस्तर में हरा सोना माना जाता है। इस पत्ते का संग्रहण स्थानीय संग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि है। इसके पत्तों को तोड़कर सुखाने के बाद 50 पत्तियों की गड्डी बनाई जाती है। फिर एक हजार गड्डियों से एक मानक बोरा तैयार किया जाता है। तेंदूपत्ता की बिक्री से संग्राहकों को अतिरिक्त आय मिलती है और यह रोजगार का प्रमुख स्रोत बनता है।
नक्सलवाद का प्रभाव
पिछले कुछ वर्षों में नक्सलवाद के कारण तेंदूपत्ता संग्रहण में कठिनाइयाँ आई थीं, लेकिन अब स्थिति में सुधार हुआ है। नक्सलवाद के खात्मे के बाद, इस वर्ष तेंदूपत्ता का सीजन बिना किसी लेवी वसूली के शुरु हुआ है, जिससे संग्राहकों में उत्साह है। इस बार तेंदूपत्ता संग्रहण के दौरान बस्तर के वनांचल में रोजगार, आय और उम्मीदों का नया दौर शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
इस साल, अच्छे मौसम और वन विभाग की तैयारी के चलते बस्तर में तेंदूपत्ता संग्रहण सीजन आर्थिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
निष्कर्ष
बस्तर जिले में तेंदूपत्ता संग्रहण शुरू हो गया है, जिसमें अच्छे मौसम और वन विभाग की पूरी तैयारी के चलते संग्राहकों में उत्साह है। इस वर्ष, नक्सलवाद की समाप्ति के बाद तेंदूपत्ता सीजन रोजगार और आय का नया दौर लेकर आया है।
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