रायपुर नगर निगम के खोखले वादे ; 10 करोड़ डकार कर भी सिस्टम नदारद, अब जनता की गाढ़ी कमाई पर नजर

Aishwarya Dwivedi | Apr 13, 2026, 16:38 IST
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रायपुर में जल संकट बढ़ रहा है, जबकि नगर निगम की विफलता साफ नजर आ रही है। दो सालों से जल संरक्षण और पाइपलाइन सिस्टम की बातों को सिर्फ कागजों में लटकाया गया। 10 करोड़ रुपए की राशि जुटाई गई, लेकिन इसका सही उपयोग नहीं हुआ।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पारा चढ़ते ही जल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। शहर के 70 में से 35 वार्ड बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। लेकिन असली सवाल पानी की कमी का नहीं, बल्कि रायपुर नगर निगमकी उस 'सिस्टमैटिक नाकामी' का है, जिसने दो साल से रायपुर की प्यास को सिर्फ फाइल और टेंडरों के खेल में उलझा कर रखा है।



कब तक फाइलों में ही रिचार्ज होगा ग्राउंड वाटर

महापौर मीनल चौबे पिछले दो वर्षों से वाटर हार्वेस्टिंग और भूजल संरक्षण की दुहाई दे रही हैं। सवाल यह है कि जब संकट का पता पहले से था, तो काम धरातल पर क्यों नहीं दिखा? गर्मी आते ही प्रशासन की नींद खुलना अब एक सालाना रिवाज बन गया है। क्या नगर निगम सिर्फ मॉनसून जाने और गर्मी आने का इंतजार करता है ताकि आपदा को अवसर में बदला जा सके



स्थायी समाधान की बलि क्यों

इस साल निगम ने टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति के लिए 1 करोड़ 50 लाख का टेंडर जारी किया है, जो पिछले साल से 50 लाख रुपये ज्यादा है।



बड़ा सवाल: पाइपलाइन बिछाने और स्थायी जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के बजाय, हर साल टैंकरों पर बजट बढ़ाना क्या किसी बड़े खेल की ओर इशारा नहीं करता।



क्या टैंकर माफियाओं को फायदा पहुँचाने के लिए शहर को जानबूझकर प्यासा रखा जा रहा है। जनता पूछ रही है कि करोड़ों का यह पानी आख़िर जा कहाँ रहा है।



अपनी विफलता का जुर्माना जनता से क्यों

खबर का सबसे चौंकाने वाला पहलू राजसात की धमकी है। पिछले साल वाटर हार्वेस्टिंग के नाम पर जनता से 8 से 10 करोड़ रुपए वसूले गए थे। निगम खुद स्वीकार कर रहा है कि वह मकानों में सिस्टम नहीं लगवा पाया। इस तरह में एक ही सवाल उठता है। जब पैसा निगम के पास था और संसाधन उनके पास, तो काम क्यों नहीं हुआ?



नगर निगम से सवाल

  • 10 करोड़ रुपए बैंक में पड़े रहे और शहर के जल स्रोत सूख गए, इस आपराधिक देरी के लिए किस अधिकारी पर गाज गिरेगी?
  • क्या 1.50 करोड़ रुपए में कुछ वार्डों की पाइपलाइन और बोरिंग दुरुस्त नहीं की जा सकती थी, जो हर साल टैंकरों पर लुटाए जा रहे हैं?
  • हार्वेस्टिंग की राशि जमा करने वाले नागरिकों को सिस्टम के बदले 'पैसे जब्त' करने की धमकी देना क्या जनता के साथ धोखाधड़ी नहीं है?

निष्कर्ष

रायपुर का जल संकट प्राकृतिक कम और प्रशासनिक ज्यादा नजर आता है। अगर समय रहते 10 करोड़ की राशि का सही उपयोग हुआ होता, तो आज आधे रायपुर को टैंकरों के पीछे नहीं भागना पड़ता। महापौर और निगम प्रशासन को अब 'योजनाओं' से बाहर निकलकर 'जवाब' देना होगा।



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