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News In Short
भागीरथपुरा में दूषित पानी से 3500 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
अस्पतालों में भर्ती 27 मरीजों में से 4 वेंटिलेटर पर हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाया, महिलाओं और बच्चों की जांच की।
हाईकोर्ट में आज दूषित जल कांड पर पांच जनहित याचिकाओं पर सुनवाई होगी।
मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है।
News In Detail
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैली बीमारी ने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है। भले ही नए मामलों में गिरावट दर्ज की जा रही हो, लेकिन अस्पतालों में भर्ती गंभीर मरीजों की हालत लगातार नाजुक बनी हुई है।
मामले पर हाईकोर्ट में आज होगी सुनवाई
भागीरथपुरा दूषित जल कांड को लेकर पांच जनहित याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर की गई हैं। इन याचिकाओं पर आज न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ सुनवाई करेगी।
मुख्य सचिव से जवाब-तलब
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीर माना था। कोर्ट ने कहा था कि इस घटना से इंदौर की छवि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित हुई है। कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को आदेशों के पालन की स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए थे। राहत देते हुए मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की अनुमति दी गई है, लेकिन जवाबदेही से बचने की कोई गुंजाइश कोर्ट ने नहीं छोड़ी है।
जानें क्या कहते हैं स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अब तक भागीरथपुरा और आसपास के क्षेत्रों में 3500 से अधिक लोग उल्टी-दस्त और संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। स्थिति यह है कि कई मरीजों में संक्रमण काबू में नहीं आ रहा है। इससे उन्हें आईसीयू और वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत पड़ रही है।
अब भी 27 मरीज अस्पतालों में भर्ती
बॉम्बे अस्पताल और मेट्रो अस्पताल में इस समय कुल 27 मरीज भर्ती हैं। इनमें से चार मरीज वेंटिलेटर पर हैं। डॉक्टरों के अनुसार कुछ मरीजों में संक्रमण तेजी से बढ़ा है, जिससे किडनी, लिवर और न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं सामने आ रही हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को भागीरथपुरा में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाया। यह शिविर निजी मेडिकल कॉलेज के सहयोग से लगाया गया। शिविर में महिलाओं और बच्चों की जांच कर दवाइयां बांटी गई। वहीं, जमीनी हकीकत यह है कि बीमारी की जड़ अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
Sootr Knowledge
जानें क्या है इंदौर का भागीरथपुरा कांड?
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दिसंबर 2025 के आखिरी दिनों में दूषित पानी की वजह से एक बड़ा स्वास्थ्य संकट सामने आया। दरअसल, नर्मदा जल की पाइपलाइन में सीवेज और ड्रेनेज लाइन का पानी मिल गया था।
इससे फीकल कोलिफॉर्म और ई-कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया फैल गए। इसके अलावा, इलाके के बोरवेल का गंदा पानी नर्मदा की पाइपलाइन में घुसकर पीने के पानी को जहरीला बना रहा था।
इस वजह से उल्टी और दस्त जैसी बीमारियां फैल गईं, और 3500 से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हुए। इसे भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना के मुख्य कारण के तौर पर बताया जा रहा है।
अब तक 23 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं। एक 6 महीने का बच्चा भी इस संकट का शिकार हो गया। 440 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हुए, जिनमें से 413 को छुट्टी मिल गई है।
वहीं, अभी भी 27 लोग इलाज करा रहे हैं। वहीं अभी भी 8 मरीज आईसीयू में एडमिट है। एक की हालत गंभीर है। अब तक (जनवरी 2026 तक ) भागीरथपुरा इलाके में नए मरीज निकल रहे हैं।
अब आगे क्या
सभी याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई हो सकती है। कोर्ट सरकार से विस्तृत रिपोर्ट भी मांग सकता है। मुआवजे और कार्रवाई पर कोर्ट सख्त आदेश दे सकता है। नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही तय हो सकती है।
निष्कर्ष
भागीरथपुरा जल संकट अब सिर्फ गंदे पानी का मामला नहीं रहा। यह प्रशासन की लापरवाही, देर से जागना और कमजोर निगरानी का नतीजा है। आज की सुनवाई यह तय करेगी कि यह मामला सिर्फ राहत तक सीमित रहेगा या फिर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी।
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