छत्तीसगढ़ में यूसीसी : लिव-इन के बच्चों को मिलेगा पूरा संपत्ति हक
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करना चाहती है। इसके लिए सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति गोवा और उत्तराखंड के यूसीसी मॉडल की स्टडी करेगी। इसमें लिव-इन कपल के बच्चों को संपत्ति का अधिकार मिलना शामिल है। कांग्रेस ने इस कदम को भाजपा का राजनीतिक हथकंडा बताया है।
छत्तीसगढ़ में यूसीसी की तैयारी
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। राज्य सरकार की उच्चस्तरीय समिति अब अन्य राज्यों के मॉडलों का अध्ययन करेगी। यह समिति मुख्य रूप से गोवा और उत्तराखंड में लागू नियमों को देखेगी। इसके साथ ही गुजरात, असम और मध्य प्रदेश की समितियों के अनुभवों का भी विश्लेषण होगा। इन सभी सुझावों के आधार पर छत्तीसगढ़ के लिए नया कानून तैयार किया जाएगा।
पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई इस उच्चस्तरीय समिति की अध्यक्षता कर रही हैं। समिति में रिटायर्ड आईएएस (IAS - Indian Administrative Service) शत्रुघ्न सिंह और एमके राउत शामिल हैं। इनके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार और रिटायर्ड प्राचार्य ज्योति रानी सिंह भी सदस्य हैं। यह टीम सभी कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखकर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।
बच्चों को मिलेगा संपत्ति का अधिकार
गोवा और उत्तराखंड के यूसीसी मॉडल में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। इन राज्यों में लिव-इन रिलेशनशिप, विवाह, तलाक और उत्तराधिकार पर स्पष्ट नियम हैं। सबसे बड़ा बदलाव लिव-इन कपल से पैदा हुए बच्चों को लेकर हुआ है। नए नियमों के तहत इन बच्चों को संपत्ति का कानूनी अधिकार दिया गया है। छत्तीसगढ़ सरकार भी इस मानवीय और कानूनी पहलू को अपने ड्राफ्ट में शामिल कर सकती है।
इसके अलावा नए कानून में बहुविवाह जैसी प्रथाओं पर पूरी तरह रोक होगी। कोई भी व्यक्ति एक से ज्यादा शादी नहीं कर सकेगा। साथ ही एकतरफा तलाक की प्रथा को भी पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। इससे महिलाओं के अधिकारों की रक्षा होगी और उन्हें समाज में बराबरी का हक मिलेगा।
आदिवासियों को मिल सकती है छूट
साल 2011 की जनगणना के अनुसार छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की संख्या बहुत ज्यादा है। राज्य की कुल आबादी में 30.62 प्रतिशत हिस्सा अनुसूचित जनजाति (ST - Scheduled Tribe) वर्ग का है। भारतीय संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची आदिवासियों की संस्कृति को संरक्षण देती है। उनके पारंपरिक और प्रथागत कानूनों को संविधान में विशेष दर्जा मिला हुआ है।
इसी वजह से आदिवासियों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने पर विचार हो रहा है। उत्तराखंड की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी आदिवासियों को आंशिक या पूर्ण छूट मिल सकती है। उच्चस्तरीय समिति इस बात का विशेष ध्यान रखेगी कि आदिवासियों के रीति-रिवाज सुरक्षित रहें। उनके पारंपरिक अधिकारों को इस कानून से कोई नुकसान नहीं होना चाहिए।
गोवा के पुराने नियमों पर चर्चा
गोवा में पहले से ही एक विशेष नागरिक संहिता लागू है। वहाँ के पुराने नियमों में एक अनोखा प्रावधान शामिल था। अगर किसी हिंदू पुरुष की पत्नी बच्चे को जन्म नहीं दे पाती तो वह दूसरी शादी कर सकता था। इसके लिए 30 साल की उम्र तक बेटे का जन्म न होना एक शर्त थी। यह नियम केवल हिंदू समुदाय के लिए ही बनाया गया था।
हालांकि गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने इसे अब पूरी तरह अप्रासंगिक बताया है। उनके अनुसार साल 1910 के बाद से इस नियम का लाभ किसी ने नहीं लिया है। अब नए आधुनिक नियम ही समाज में लागू किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ की समिति इन सभी पुरानी और नई व्यवस्थाओं का बारीकी से अध्ययन कर रही है।
राजनीतिक दलों में बढ़ी बयानबाजी
यूसीसी के मुद्दे पर छत्तीसगढ़ में सियासत भी गरमा गई है। कांग्रेस पार्टी ने इस कदम पर कड़े सवाल उठाए हैं। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि भारत के लिए यह बहुत पेचीदा विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपनी सत्ता बचाने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रही है। कांग्रेस के अनुसार यह कानून सभी वर्गों के लिए अनुकूल नहीं है।
दूसरी तरफ सरकार के डिप्टी सीएम (Deputy CM - Deputy Chief Minister) अरुण साव ने इसका बचाव किया है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने यूसीसी लागू करने का मार्ग पहले ही दिखाया था। गोवा और उत्तराखंड के बाद अब छत्तीसगढ़ भी इस दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। समिति सभी वर्गों से चर्चा करने के बाद ही अंतिम मसौदा तैयार करेगी।
FAQ
- छत्तीसगढ़ सरकार यूसीसी के लिए किस मॉडल की स्टडी कर रही है?
उत्तर: छत्तीसगढ़ सरकार की उच्चस्तरीय समिति गोवा और उत्तराखंड में लागू यूसीसी मॉडल की स्टडी कर रही है। इसके साथ ही गुजरात, असम और मध्य प्रदेश की समितियों के अनुभवों का भी एनालिसिस किया जाएगा। - क्या यूसीसी लागू होने से आदिवासियों के नियमों में बदलाव आएगा?
उत्तर: आदिवासियों को उत्तराखंड की तरह छत्तीसगढ़ में भी यूसीसी के दायरे से आंशिक या पूर्ण छूट मिलने की संभावना है। समिति उनके पारंपरिक अधिकारों और रीति-रिवाजों की रक्षा सुनिश्चित करेगी। - नए यूसीसी मॉडल में लिव-इन कपल के लिए क्या प्रावधान है?
उत्तर: नए यूसीसी मॉडल में लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों को माता-पिता की संपत्ति में पूरा कानूनी अधिकार देने का प्रावधान शामिल किया गया है।
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