उदंती में जंगल उजड़ा या पुश्तैनी जमीन पर खेती.... 17 साल बाद वन विभाग जागा

Rajesh Lahoti | Jun 05, 2026, 21:33 IST
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छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई का विवाद फिर सुर्खियों में है। 17 साल पुराने इस मामले में वन विभाग ने 40 ग्रामीणों को गिरफ्तार किया है और 126 की तलाश जारी है। वन विभाग और ग्रामीण आमने-सामने हैं।

छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में हजारों पेड़ों की कटाई, सैकड़ों ग्रामीणों पर केस और वन विभाग से हिंसक टकराव ने एक पुराने विवाद को फिर सुर्खियों में ला दिया है। जंगल की जमीन पर कब्जे और 100 से 200 साल पुराने साल वृक्षों की कटाई को लेकर वन विभाग और ग्रामीण आमने-सामने हैं। 17 साल पुराने इस विवाद में वन विभाग अब तक 40 ग्रामीणों को गिरफ्तार कर चुका है और 126 की तलाश की जा रही है।



मामला गरियाबंद जिले के जेतपुरी गांव का है, जो टाइगर रिजर्व की सीमा से लगा हुआ है। वन विभाग का दावा है कि गांव के लोगों ने रिजर्व के भीतर 106 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा कर खेती शुरू कर दी और इसके लिए हजारों पेड़ काट दिए। दूसरी तरफ ग्रामीणों का कहना है कि जमीन उनकी पुश्तैनी है और वन विभाग के आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं है।



सैटेलाइट और ड्रोन से खुली जंगल उजड़ने की कहानी

वन अधिकारियों के अनुसार 2008 से 2026 तक के सैटेलाइट और ड्रोन चित्रों की तुलना में लगातार वन क्षेत्र घटता दिखाई देता है। जहां कभी एक हेक्टेयर में 1500 से 2000 पेड़ थे, वहां अब केवल 25 से 50 पेड़ बचे हैं। अधिकारियों का दावा है कि कई सौ साल पुराने साल वृक्षों को काटकर खेत तैयार कर दिए गए हैं।



वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2008 से अब तक करीब 12 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अतिक्रमण हुआ है। पिछले चार वर्षों में 956 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया, लेकिन अभी भी अच्छे खासे क्षेत्र पर कब्जा बना हुआ है।



166 ग्रामीणों पर एफआईआर

मार्च 2026 में 166 ग्रामीणों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। मई में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो गई। इसके बाद जब 18 मई को वन विभाग की टीम आरोपियों को गिरफ्तार करने पहुंची तो ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच टकराव हो गया। चार लोगों को मौके पर गिरफ्तार किया गया, जबकि बाद में 36 ग्रामीणों ने आत्मसमर्पण कर दिया।



17 साल तक प्रशासन सोता रहा

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि 2008 से अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई हो रही थी तो कार्रवाई अब क्यों हो रही है? ग्रामीणों के वकील भी यही सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि वन विभाग के पास इतने वर्षों से सबूत थे तो तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई। यह विवाद केवल पेड़ों की कटाई का नहीं है।



यह उस संघर्ष की कहानी है जहां एक तरफ टाइगर रिजर्व और वन संरक्षण का दावा है, तो दूसरी तरफ ग्रामीण अपने जमीन के अधिकार की बात कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मामला अदालतों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक गूंज सकता है। फिलहाल जंगल में कटे पेड़ों के ठूंठ और गांव में पसरा तनाव इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।



हमने सबूत मांगा किसी ने नहीं दिया

डीएफओ वरुण जैन का इस पूरे मामले में कहना है कि यह अतिक्रमण बढ़ते-बढ़ते टाइगर रिज़र्व की जमीन पर भी हो गया। हमने जब पहला नोटिस दिया तो ग्रामीणों ने इसे अपनी पुश्तैनी जमीन बताई। जब हमने दूसरा नोटिस देकर पुश्तैनी जमीन का सबूत मांगा तो उनमें से कई जमीन छोड़ कर चले गए और कई लोगों के कब्जे हटाने में हम लगे हुए हैं। जल्द ही हम उदंती की 106 हेक्टेयर जमीन को खाली करा लेंगे।



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