छत्तीसगढ़ की चिट्ठी: वंदन से भर्ती तक… गड़बड़ी ही गड़बड़ी

Rajesh Lahoti | Aug 22, 2026, 19:06 IST
छत्तीसगढ़ की चिट्ठी
छत्तीसगढ़ में सरकारी योजनाओं और संस्थानों की व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। महतारी वंदन योजना में 54 हजार से ज्यादा अपात्र महिलाओं को राशि मिलने के बाद अब सरकार करोड़ों रुपए की वसूली कर रही है। PRSU में कुलसचिव की नियुक्ति ने नया मोड़ ले लिया है।

वंदन में फर्जी चंदन

महतारी वंदन योजना में सरकार ने महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपए देकर खूब वंदन किया, लेकिन अब हिसाब-किताब की बारी आई तो पता चला कि कुछ ऐसी महिलाओं का भी वंदन हो गया, जो योजना की पात्र ही नहीं थीं। सरकारी पड़ताल में अब तक 54,127 महिलाएं अपात्र मिली हैं। इनमें सरकारी नौकरी करने वाली, आयकरदाता, अविवाहित और 21 साल से कम उम्र की महिलाएं भी शामिल हैं। यानी योजना की एंट्री गेट पर पात्रता की जांच कुछ ऐसी हुई कि अंदर कौन आया, इसकी खबर बाद में मिली। अब सरकार वसूली अभियान चला रही है और करीब 6.13 करोड़ रुपए वापस भी आ चुके हैं। यानी सरकारी खजाने से निकला चंदन अब उल्टा घिसना शुरू हो गया है। नेताओं से ज्यादा अधिकारियों को पैसा बांटने की इतनी ज्यादा जल्दी थी कि वे पात्रता जांचना ही भूल गए।



अयोग्य को बुलाया इंटरव्यू में

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में शिक्षक भर्ती का मामला अब ऐसा पाठ पढ़ा रहा है, जिसमें पत्रकारिता से ज्यादा मेरिट मैनेजमेंट नजर आ रहा है। आरोप है कि भर्ती में 80 प्रतिशत अंक अकादमिक उपलब्धि और अनुभव के तथा 20 प्रतिशत इंटरव्यू के लिए तय थे, लेकिन नियमों की किताब शायद मेरिट बनाने वालों तक पहुंचते-पहुंचते रास्ते में कहीं छूट गई। मामला तब दिलचस्प हुआ जब स्क्रूटनी कमेटी ने जिन अभ्यर्थियों को अयोग्य माना, उनमें से कुछ को इंटरव्यू में बुलाया गया और चयन भी हो गया। कुछ उम्मीदवारों को अनुभव, शोध पत्र और दूसरी उपलब्धियों के अंक देने में भी कथित गड़बड़ी के आरोप हैं। किसी को निर्धारित अंक से ज्यादा, तो किसी को वर्षों के अनुभव के बावजूद कम अंक मिलने की शिकायत है। मामला लोकायुक्त तक पहुंचा और 80 प्रतिशत अकादमिक अंकों का दोबारा मूल्यांकन कर नई मेरिट बनाने की अनुशंसा हुई। अब सवाल गुरुजी की योग्यता से ज्यादा उस व्यवस्था की योग्यता पर है, जिसने अयोग्य को इंटरव्यू और योग्य को इंतजार करा दिया। शिक्षा के मंदिर में मेरिट की ऐसी पूजा आखिर किस नियम से हुई?



सुप्रीम कोर्ट में पलटा पूरा खेल

पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव डॉ. शैलेंद्र कुमार पटेल की नियुक्ति का मामला अब ऐसा हो गया है, जिसमें हाईकोर्ट के निर्णय के बाद सुप्रीम कोर्ट में रुख ही बदल गया। हाईकोर्ट के फैसले में उनकी पात्रता पर सवाल उठे थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत ने पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया है। विवाद कुलसचिव पद की योग्यता से शुरू हुआ। 2011 के नियमों में 15 साल के प्रशासनिक अनुभव और उसमें कम से कम 8 साल का अनुभव उपकुलसचिव या समकक्ष पद पर जरूरी बताया गया था। डॉ. पटेल को 2016 में उपकुलसचिव बनाया गया था, इसलिए 2022 की नियुक्ति में आठ साल के अनुभव का सवाल उठा। शिकायत हुई, जांच समिति बनी और मामला अदालत पहुंच गया। हाईकोर्ट ने नियुक्ति पर सवाल उठाए, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से तस्वीर बदल गई है। यानी विश्वविद्यालय की कुर्सी वही है, विवाद वही है, बस कानूनी हवा का रुख बदल गया। अब निगाहें सरकार और विश्वविद्यालय पर हैं।



छग में पेपर लीक कांड

छत्तीसगढ़ में परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए अब किताब से ज्यादा जरूरी शायद whatsapp हो गया है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की बीएससी एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से पहले ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। परीक्षा 20 अगस्त को थी और सुबह 8 से 9 बजे के बीच सवाल सोशल मीडिया पर घूमने लगे। परीक्षा खत्म हुई तो छात्रों ने वायरल सवालों का मिलान किया और कई सवाल हूबहू निकल आए। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की नींद खुली और जांच कमेटी बना दी गई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मामले को गंभीर मानते हुए पांच सदस्यीय जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए। तेलीबांधा थाने में अज्ञात के खिलाफ FIR भी दर्ज हो गई और साइबर सेल जांच में जुट गया। परीक्षा रद्द कर सितंबर के पहले सप्ताह में दोबारा कराने का फैसला हुआ। करीब 1200 छात्रों की मेहनत का री-टेक होने जा रहा है। पिछले साल भी पेपर लीक को लेकर सवाल उठे थे और व्यवस्था सुधारने के दावे हुए थे। लगता है दावे पास हो गए, लेकिन परीक्षा व्यवस्था फेल हो गई।



बीएसपी चोरी और दिल्ली दरवाजा

भिलाई इस्पात संयंत्र का मामला लेकर वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने दिल्ली का दरवाजा खटखटाया, तो चिट्ठी घूमते-घूमते सीधे केंद्रीय मंत्रालय तक पहुंच गई। विधायक ने 20 जुलाई को केंद्र सरकार के सामने बीएसपी से जुड़ा मुद्दा उठाया था। जवाब आया 10 अगस्त को और जवाब देने वाले थे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह। शाह के कार्यालय ने साफ कर दिया कि भिलाई स्टील प्लांट का मामला गृह मंत्रालय का नहीं, इस्पात मंत्रालय का है। लिहाजा चिट्ठी को कार्रवाई के लिए इस्पात मंत्रालय भेज दिया गया। यानी दिल्ली ने शिकायत को वापस नहीं किया, बस सही टेबल खोजकर वहां रख दिया। कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। राष्ट्रपति सचिवालय ने भी 11 अगस्त को विधायक के पत्र को गृह मंत्रालय और इस्पात मंत्रालय के सचिवों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दिया। अब एक चिट्ठी के दो सरकारी रास्ते खुल चुके हैं, लेकिन सरकारी फाइलों की असली परीक्षा मंजिल पर होती है, डाकखाने में नहीं। फिलहाल शिकायत मंत्रालय पहुंच गई है। अब देखना है कि बीएसपी के मुद्दे पर कार्रवाई भी होती है या चिट्ठी फाइलों की भीड़ में जाकर जम जाएगी।



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