बीयू: प्रशासनिक अव्यवस्था और भ्रष्टाचार पर कुलगुरु के खिलाफ मोर्चे पर छात्र

Sanjay Sharma | Jun 11, 2026, 23:03 IST
कुलगुरु के खिलाफ मोर्चे पर छात्र
बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी में अब छात्र भी कुलगुरु के विरोध में आ गए हैं। बीते दिनों से विश्वविद्यालय के कर्मचारी और प्राध्यापक भी कुलगुरु से नाराज हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की अगुवाई में छात्रों ने विश्वविद्यालय कैंपस में नारेबाजी की।

समझें क्या है पूरा मामला

ABVP का BU परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू।


विश्वविद्यालय में शैक्षणिक- प्रशासनिक अनियमिता से नाराज हैं छात्र।


कुलगुरु से इस्तीफा और विश्विवद्यालय में धारा 52 लागू करने की मांग।


मैनेजमेंट कोर्स में महीनों से रिजल्ट जारी न होने पर की नारेबाजी।


पुनर्मूल्यांकन रिजल्ट, प्रवेश और हॉस्टल की बदहाली पर जताया आक्रोश।



यूनिवर्सिटी में फूटा छात्रों का गुस्सा

भोपाल की बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी (Barkatullah University ) में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और छात्रों ने कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार जैन के तत्काल इस्तीफे की मांग की है। विश्वविद्यालय की अव्यवस्थाओं के लिए छात्रों ने कुलगुरु को जिम्मेदार ठहराते हुए शासन से कैंपस में धारा 52 लागू करने की मांग भी की है। छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी में अकादमिक अनियमितता, प्रशासनिक अराजकता और भ्रष्टाचार बढ़ गया है। छात्र परेशान हैं और इससे यूनिवर्सिटी की साख गिर रही है।



महीनों से नहीं दे पा रहे रिजल्ट

विश्वविद्यालय परिसर में अनिश्चितकाली धरने पर बैठे छात्रों का कहना है एमबीए प्रथम और तृतीय सेमेस्टर के रिजल्ट महीनों से रुके हैं। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के परिणाम भी जारी नहीं किए जा रहे। बीते शैक्षणिक सत्र के पुनर्मूल्यांकन कराने वाले छात्रों के परिणाम भी रोके गए हैं। विश्वविद्यालय की अकादमिक व्यवस्थाएं ठप हैं और इसका असर छात्रों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ रहा है। कुलगुरु की उदासीनता के चलते वार्षिक अकादमिक कैलेंडर पूरी तरह लड़खड़ा चुका है। लंबे समय से पीएचडी के लिए प्रवेश परीक्षा का आयोजन ही नहीं कराया जा रहा।



प्रशासन पर उदासीनता का आरोप

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के अनुसार लापरवाही से नर्सिंग कॉलेजों की प्रवेश प्रक्रिया रुक गई है। शिक्षकों की भर्ती न होने से अध्ययन व्यवस्था चरामराई हुई है। छात्रावासों के हालात खराब हैं। बारिश के पहले से छात्र इनकी मरम्मत की मांग कर रहे हैं लेकिन कुलगुरु और यूनिवर्सिटी प्रबंधन इसे नजरअंदाज कर रहा है। कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था केवल दिखावे भर के लिए हैं। यहां सड़कों पर रोशनी तक नहीं है।



टेंडर और प्रिंटिंग में भ्रष्टाचार

विश्वविद्यालय परिसर में धरना दे रहे छात्रों ने संबद्धता प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। संबंद्धता को लेकर निजी कॉलेजों को परेशान किया जा रहा है। फाइलों पर निर्णय न होने का असर इनकी प्रवेश प्रक्रिया पर पड़ रहा है। टेंडरों में पारदर्शिता नहीं है और गोपनीय प्रिंटिंग के कामों में भी गड़बड़ी हो रही है। कुलगुरु का नियंत्रण न होने से प्रशासनिक व्यवस्था ध्वस्त है और निर्णय लेने में मनमानी की जा रही है। यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली से छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों में नाराजगी है। बीते महीने कुलगुरु के मनमाने निर्देश के खिलाफ कर्मचारी मोर्चा खोल चुके हैं।



सरकार से की नियंत्रण की मांग

विद्यार्थी परिषद ने विश्वविद्यालय में सरकार और उच्च शिक्षा विभाग से व्यवस्थाओं को अपने नियंत्रण में लेने की मांग की है। छात्रों का कहना है यूनिवर्सिटी में शैक्षणिक, प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर कुलगुरु का नियंत्रण नहीं रह गया है। वे इन्हें सुधारने में भी निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। छात्रों ने उच्च शिक्षा विभाग और सरकार से विश्वविद्यालय में धारा 52 लागू करने की मांग भी की है। वहीं कुलगुरु को न हटाने तक कैंपस में धरना जारी करने की चेतावनी भी छात्रों ने दी है।



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