बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी की बड़ी लापरवाही, करोड़ों का हिसाब गायब, कैग रिपोर्ट में खुलासा
Aman Vaishnav | Mar 23, 2026, 11:45 IST
barkatullah university cag report financial irregularities
बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी में करोड़ों रुपए की बड़ी वित्तीय लापरवाही सामने आई है। कैग की ताजा रिपोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन की आर्थिक प्रबंधन की पोल खोल दी है। पूरा मामला जानने के लिए खबर आखिरी तक पढ़िए।
बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी (बीयू) में वित्तीय मामलों में बड़ी लापरवाही सामने आई है। इस लापरवाही का खुलासा नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की ताजा रिपोर्ट (कैग की रिपोर्ट) में हुआ है।
इसमें सामने आया कि बैंक खातों और नकद बही के मिलान में सालों तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है। इसका नतीजा ये हुआ कि विश्वविद्यालय के करोड़ों रुपए के लेन-देन पर सवाल उठने लगे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2023 तक यूनिवर्सिटी के आठ बैंक खाते थे। वहीं 2020-21 से लेकर 2022-23 तक इन खातों का मिलान नहीं किया गया है। जबकि राज्य सरकार ने 2009 में ही निर्देश दिया था कि हर तिमाही में ये मिलान होना चाहिए। इस लापरवाही की वजह से कई वित्तीय गड़बड़ियां भी सामने आई हैं।
रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि 30 करोड़ 15 लाख रुपयों को अग्रिम वर्षों तक समायोजित नहीं किया गया है। इस राशि के एक हजार 363 मामले लंबित हैं। इनमें से कई तो 10 से 20 साल पुराने हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 5 मृत कर्मचारियों को 4 लाख 86 हजार रुपए का अग्रिम भुगतान किया गया।
साथ ही 69 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को 51 लाख 65 हजार रुपए का अग्रिम भुगतान किया गया। इसके अलावा 77 कर्मचारियों को 6 लाख 60 हजार रुपए का अतिरिक्त भुगतान भी किया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 2 करोड़ 88 लाख रुपए एमपी ऑनलाइन के माध्यम से 2019-20 में प्राप्त हुए थे। हालांकि इस रकम को रिकॉर्ड में तो आय के रूप में दिखा दिया गया था। वहीं इसे बैंक खाते में जमा करने में लगभग 15 महीने की देरी हुई। यह रकम जून 2021 में जाकर जमा की गई थी।
कैग ने साफ कहा कि यह देरी उस समय के दौरान खातों का सही से मिलान न करने की वजह से हुई है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बजट और असल आय-व्यय के बीच बड़ा अंतर है।
2019-20 में जहां अनुमानित आय 121 करोड़ 92 लाख रुपए थी। वहीं असल में 147 करोड़ 93 लाख रुपए की आय हुई थी। यानी 21 प्रतिशत ज्यादा। इसके मुकाबले 2020-21 में असल आय अनुमान से 35% कम रही। खर्चों की स्थिति भी ठीक नहीं थी क्योंकि 2020-21 में असल खर्च बजट से 37% कम रहा।
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इसमें सामने आया कि बैंक खातों और नकद बही के मिलान में सालों तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है। इसका नतीजा ये हुआ कि विश्वविद्यालय के करोड़ों रुपए के लेन-देन पर सवाल उठने लगे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2023 तक यूनिवर्सिटी के आठ बैंक खाते थे। वहीं 2020-21 से लेकर 2022-23 तक इन खातों का मिलान नहीं किया गया है। जबकि राज्य सरकार ने 2009 में ही निर्देश दिया था कि हर तिमाही में ये मिलान होना चाहिए। इस लापरवाही की वजह से कई वित्तीय गड़बड़ियां भी सामने आई हैं।
रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा
साथ ही 69 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को 51 लाख 65 हजार रुपए का अग्रिम भुगतान किया गया। इसके अलावा 77 कर्मचारियों को 6 लाख 60 हजार रुपए का अतिरिक्त भुगतान भी किया गया।
दो करोड़ 88 लाख का मामला
कैग ने साफ कहा कि यह देरी उस समय के दौरान खातों का सही से मिलान न करने की वजह से हुई है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बजट और असल आय-व्यय के बीच बड़ा अंतर है।
अनुमानित आय ये ज्यादा प्राप्त
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