AI पकड़ेगा मुंह का कैंसर, गांधी मेडिकल कॉलेज की तकनीक को मिली मंजूरी

Sandeep Kumar | Jul 23, 2026, 16:26 IST
अब AI पकड़ेगा मुंह का कैंसर
गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल ने AI आधारित ओरल कैंसर स्क्रीनिंग तकनीक बनाई है। भारत सरकार ने इसे पेटेंट दिया है। मुख आरोग्य ऐप से गांवों में भी जांच होगी।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...

  • गांधी मेडिकल कॉलेज ने AI आधारित स्क्रीनिंग डिवाइस बनाई।
  • डिवाइस मुंह के कैंसर की शुरुआती पहचान करेगी।
  • इसे डेंटल सर्जरी विभाग ने विकसित किया है।
  • भारत सरकार ने डिवाइस डिजाइन को पेटेंट दिया।
  • यह मध्य प्रदेश की पहली ऐसी पहल है।

मुख आरोग्य ऐप क्या करेगा

विभाग ने इसके साथ एक मोबाइल ऐप भी बनाया है। इसका नाम है मुख आरोग्य। यह ऐप मरीज के मुंह की तस्वीर लेकर उसका विश्लेषण करता है। AI तकनीक तस्वीर में मौजूद घाव या संदिग्ध लक्षणों को पहचानती है। इसके बाद बताती है कि मरीज में कैंसर की आशंका है या नहीं।



गांवों तक पहुंचेगी जांच सुविधा

यह ऐप खासतौर पर आशा कार्यकर्ताओं और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO – Community Health Officer) के लिए बनाया गया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारी भी इसका उपयोग कर सकेंगे।



इससे गांव और दूरदराज इलाकों में रहने वाले लोगों की भी जांच हो सकेगी। यदि किसी मरीज में लक्षण मिलते हैं, तो ऐप तुरंत उसे विशेषज्ञ अस्पताल भेज देगा। इससे इलाज में देरी नहीं होगी।



हर साल डेढ़ लाख नए मरीज

भारत में हर साल करीब डेढ़ लाख लोग ओरल कैंसर के नए मरीज बनते हैं। मध्य प्रदेश में पुरुषों में यह बीमारी लगभग 25 प्रति लाख की दर से पाई जाती है। भोपाल उन शहरों में शामिल है जहां यह बीमारी ज्यादा देखी जाती है। ज्यादातर मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब बीमारी बढ़ चुकी होती है। ऐसे में शुरुआती पहचान ही जान बचाने का सबसे अच्छा तरीका है।



विशेषज्ञ ने बताया कैसे करेगा काम

डेंटल सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. अनुज भार्गव ने इस तकनीक के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मोबाइल ऐप पहले संदिग्ध लक्षणों की पहचान करता है। इसके बाद AI सिस्टम उन संकेतों का मूल्यांकन करता है।



उनके मुताबिक शुरुआती पहचान से इलाज आसान और सस्ता हो जाता है। मरीज के पूरी तरह ठीक होने की संभावना भी बढ़ जाती है।



हर जिले तक पहुंचाने की योजना

डॉ. भार्गव का कहना है कि उद्देश्य सिर्फ तकनीक बनाना नहीं है। असली मकसद है इसे स्वास्थ्यकर्मियों तक पहुंचाना। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह ऐप आने वाले समय में प्रदेश के हर जिले में इस्तेमाल होगा।



इससे बड़ी मात्रा में डेटा जमा होगा। इस डेटा से AI मॉडल और सटीक बनेंगे। इसका फायदा आम लोगों को मिलेगा।



टीम में कई डॉक्टरों का योगदान

यह शोध कॉलेज की डीन डॉ. कविता ऐन सिंह के मार्गदर्शन में पूरा हुआ। इस प्रोजेक्ट में डॉ. ऋचा शर्मा और डॉ. अनिमेष बड़ोदिया की भी अहम भूमिका रही। दोनों डेंटल सर्जरी विभाग से जुड़े हैं। टीम ने मिलकर इस डिवाइस और ऐप को डिजाइन करने से लेकर लागू करने तक काम किया।



FAQ

  1. मुख आरोग्य ऐप क्या करता है?
    यह ऐप मुंह की तस्वीर लेकर AI से उसका विश्लेषण करता है। यह कैंसर के संभावित लक्षणों की पहचान करता है।
  2. यह ऐप किसके लिए बनाया गया है?
    यह मुख्य रूप से आशा कार्यकर्ताओं, CHO और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारियों के लिए बनाया गया है। इससे गांवों में जांच आसान होगी।

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