भोपाल एम्स से 5 साल में 830 महिला नर्स-लैब टेक्नीशियन ने ली विदाई, आखिर क्या है वजह ?
News in Short
- बीते 5 साल में एम्स भोपाल से 830 महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने नौकरी छोड़ी।
- एम्स प्रबंधन का कहना है कि महिला कर्मचारियों को बेहतर अवसर मिल रहे हैं।
- 2020-2025 के बीच 830 महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने इस्तीफा दिया।
- केंद्रीय चिकित्सा संस्थानों से महिला नर्सिंग और तकनीकी कर्मियों का इस्तीफा बढ़ा।
- नजदीकी संस्थानों में नौकरी पाने के लिए महिला कर्मचारियों की प्राथमिकता बढ़ी।
News in Detail
बीते सालों में महिला स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा केंद्रीय चिकित्सा संस्थानों से नौकरी छोड़ने के मामले बढ़े हैं। इनमें भोपाल एम्स (aiims bhopal)भी शामिल हैं। एम्स भोपाल से साल 2020 से 2025 के बीच 830 महिला स्टाफ नर्स और महिला लैब टेक्नीशियन ने इस्तीफा दिया है। साल 2020 में 44, 2021 में 75, साल 2022 में 119, साल 2023 में 234, साल 2024 में 110 और साल 2025 में 148 महिला स्वास्थ्यकर्मी नौकरी छोड़कर चले गए हैं। यह जानकारी हाल ही में राज्य सभा में एक सवाल के जवाब में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव ने पेश की है।
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सरकार के आंकड़ों से उठे सवाल
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आंकड़े पेश किए गए हैं। उनमें एम्स भोपाल के अलावा दिल्ली, भुवनेश्वर, जोधपुर, पटना, रायपुर, ऋषिकेश, रायबरेली, मंगलागिरि, नागपुर, कल्याणी, गोरखपुर, बठिंडा, देवघर, बीवीनगर, बिलासपुर, जम्मू, राजकोट, गुवाहाटी स्थित आयुर्विज्ञान संस्थानों से नौकरी छोड़ने वाली महिला नर्सिंग और टेक्निकल कर्मियों की संख्या बढ़ी है। इसके अलावा पीजीआईएमईआर चंडीगढ, जीआईपीएम्ईआर पुड्डुचेरी, एनआईएमएचएएनएस बेंगलुरु से भी नौकरी छोड़ने वाली महिलाकर्मियों का आंकड़ा बढ़ रहा है।
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परीक्षा के एनओसी की मांग भी बढ़ी
केंद्रीय चिकित्सा संस्थान एम्स से महिला नर्सिंग और तकनीकी कर्मचारी नौकरी छोड़ रही हैं। वहीं दूसरी ओर सीआरई और एनओआरसीईटी जैसी भर्ती परीक्षाओं के लिए एनओसी की मांग बढ़ी है। सीआरई (कॉमन रिक्रूटमेंट एग्जामिनेशन) और
एनओआरसीईटी (नर्सिंग ऑफिसर रिक्रूटमेंट कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट) जैसी भर्ती परीक्षाओं के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने वालों की संख्या भी बढ़ गई है। इन दोनों परीक्षाओं के माध्यम से देश के सभी एम्स और राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थानों में ग्रुप बी के तहत नर्सिंग ऑफिसर और लैब टेक्नीशियन के पदों पर भर्ती की जाती है।
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नजदीकी संस्थाओं को दे रहीं प्राथमिकता
एम्स प्रबंधन भोपाल से एनओसी लेने वाली महिलाकर्मियों की संख्या 2020 से 2025 के बीच 201 रही है। यानी एम्स में पदस्थ रहते हुए उनके द्वारा दोनों भर्ती परीक्षाओं में हिस्सा लिया है। एम्स में दूसरे राज्यों की महिलाकर्मियों की संख्या ज्यादा है। अपने राज्य या नजदीकी एम्स अथवा अन्य राष्ट्रीय चिकित्सा संस्थानों में नौकरी हासिल करने के लिए वे प्रयासरत रहती हैं। पास के संस्थान के लिए चयन होने पर वे पूर्व की संस्था को छोड़ देती हैं और इसी वजह से ये आंकड़ा बढ़ रहा है। बेहतर अवसर की तलाश भी इसकी बढ़ी वजह बन गई है।
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महिलाकर्मियों के इस्तीफा का आंकड़ा
| वर्ष | संख्या |
|---|---|
| 2020 | 44 |
| 2021 | 75 |
| 2022 | 119 |
| 2023 | 234 |
| 2024 | 110 |
| 2025 | 248 |
भर्ती परीक्षा के लिए एनओसी की संख्या
| वर्ष | संख्या |
|---|---|
| 2020 | 9 |
| 2021 | 33 |
| 2022 | 37 |
| 2023 | 42 |
| 2024 | 45 |
| 2025 | 35 |
मध्यप्रदेश के अस्पताल छोड़ रहे डॉक्टर
एमपी के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की संख्या घट रही है। 2025 में 18 डॉक्टरों ने इस्तीफा और 3 विशेषज्ञों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ली है। जबकि 113 डॉक्टर सेवानिवृत्त हुए हैं। इस्तीफा देने वाले डॉक्टरों में 13 विशेषज्ञ हैं। वहीं 25 से ज्यादा विशेषज्ञ और डॉक्टरों के इस्तीफे विभाग के पास स्वीकृति के लिए विचाराधीन हैं। साल 2026 में विभाग के अस्पतालों से 92 डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति होने जा रही है। इनमें 36 विशेषज्ञ शामिल हैं। अस्पतालों में पहले से ही विशेषज्ञ और डॉक्टरों की कमी है। ऐसे में लगातार नौकरी छोड़ने और सेवानिवृत्ति की वजह से दबाव और भी बढ़ रहा है।