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पांच पॉइंट में समझें खबर के मायने
- भोपाल में वर्चुअल पोस्टमार्टम की सुविधा शुरू होगी, जिससे शव की जांच बिना चीरे के की जाएगी।
- इस प्रक्रिया में डिजिटल उपकरणों से मौत के कारणों का पता लगाया जाएगा।
- वर्चुअल पोस्टमार्टम समय की बचत करेगा और 30 मिनट में पूरी प्रक्रिया पूरी होगी।
- यह प्रक्रिया वैज्ञानिक, सटीक और पारदर्शी होगी, जिससे विवादों का हल आसान होगा।
- एम्स भोपाल में वर्चुअल पोस्टमार्टम सेंटर की तैयारी शुरू हो गई है, जल्द लागू होगा।
राजधानी भोपाल में अब मौत के कारणों की जांच का तरीका बदलने जा रहा है। जल्द ही वर्चुअल पोस्टमार्टम की सुविधा शुरू की जाएगी। इस प्रक्रिया में शव को बिना चीरे अत्याधुनिक तकनीकी उपकरणों के माध्यम से अंदरूनी अंगों की स्थिति और मृत्यु के कारणों का डिजिटल एनालिसिस किया जाएगा। इससे समय की भी बचत होगी और महज आधे घंटे में पूरी प्रोसेस हो सकेगी।
खबर के मायने- फॉरेंसिक तकनीक की नई क्रांति
वर्चुअल पोस्टमार्टम से न केवल परिजनों को राहत मिलेगी, बल्कि यह डॉक्टरों, फारेंसिक विशेषज्ञों और पुलिस की अनुसंधान टीम के लिए भी बेहद उपयोगी साबित होगा। यह प्रक्रिया वैज्ञानिक, सटीक और पारदर्शी होगी। इससे मामले में विवादों को हल करने में आसानी होगी और सही निष्कर्ष तक पहुंचा जा सकेगा।
महत्वपूर्ण तथ्य- बिना चीर-फाड़ आधुनिक पोस्टमार्टम
वर्चुअल पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में शव को बिना चीर के स्कैन किया जाएगा।
एमआरआई या सीटी स्कैन से शव की 3D इमेज तैयार की जाएगी।
इस प्रक्रिया में शव के अंगों की स्थिति और मृत्यु के कारणों का विश्लेषण किया जाएगा।
पूरी रिपोर्ट डिजिटल रूप में सुरक्षित की जाएगी और मृतक के परिजनों को सौंपी जाएगी।
इस प्रक्रिया से पोस्टमार्टम में लगने वाले समय में भी कमी आएगी।
सूत्र नॉलेज- एम्स में वर्चुअल पोस्टमार्टम की तैयारी
एम्स प्रबंधन ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से इस वर्चुअल ऑटोप्सी सेंटर के लिए मंजूरी प्राप्त की है। अब यह प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेजा गया है। एम्स में इस सुविधा का कार्यान्वयन जल्द ही शुरू किया जाएगा, जहां प्रतिदिन कई पोस्टमार्टम किए जाते हैं।
आगे क्या- पुलिस को जांच करने में मदद मिलेगी
वर्चुअल पोस्टमार्टम की सुविधा के लागू होने के बाद, यह मृतकों के परिजनों के लिए एक बड़ी राहत होगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि पोस्टमार्टम प्रक्रिया को पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से किया जा सकेगा, जिससे अदालतों में विश्वास बढ़ेगा और पुलिस अनुसंधान में भी मदद मिलेगी।
निष्कर्ष: इसतकनीक से जल्द न्याय और अपनों को राहत
वर्चुअल पोस्टमार्टम एक अत्याधुनिक और प्रभावी तरीका साबित हो सकता है, जो मृतकों के परिजनों के लिए राहत का कारण बनेगा और जांच प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाएगा। इसके लागू होने से न केवल जांच एजेंसियों को लाभ होगा, बल्कि इससे मृतक के परिजनों को भी समय की बचत और पारदर्शिता की उम्मीद है।
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