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5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
गोविंद सिंह राजपूत के निर्वाचन पर सवाल खड़ा किया गया है।
कांग्रेस नेता नीरज शर्मा ने निर्वाचन प्रक्रिया को चुनौती दी है।
आरोप है कि राजपूत ने अपनी संपत्ति छुपाई और गलत हलफनामा दिया।
इलेक्शन कमीशन ने इस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की।
हाईकोर्ट में याचिका की सुनवाई 9 जनवरी को होगी।
मध्यप्रदेश के बीजेपी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ एक और याचिका दायर की गई है। यह याचिका उनके निर्वाचन को चुनौती देती है, जिसमें आरोप है कि चुनाव के समय उन्होंने अपनी संपत्ति सही तरीके से घोषित नहीं की और गलत हलफनामा दिया।
कांग्रेस नेता नीरज शर्मा ने यह आरोप लगाते हुए इलेक्शन कमीशन में शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब नीरज शर्मा ने इस मामले को हाईकोर्ट में पहुंचाया है।
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निर्वाचन प्रक्रिया पर उठे सवाल
गोविंद सिंह राजपूत ने 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नीरज शर्मा को हराकर सुरखी विधानसभा से जीत हासिल की थी। शर्मा ने आरोप लगाया था कि राजपूत ने अपनी संपत्ति को छुपाया था, जिसका ब्यौरा चुनाव आयोग को सही से नहीं दिया गया। उन्होंने इलेक्शन कमीशन को शिकायत दी थी, लेकिन कई सालों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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इलेक्शन कमीशन पर आरोप
नीरज शर्मा की याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव के दौरान गोविंद सिंह ने जानबूझकर अपनी संपत्ति को छुपाया और गलत हलफनामा दिया। जब इस बारे में शिकायत की गई, तो इलेक्शन कमीशन (चुनाव आयोग) ने कोई सुनवाई नहीं की। इसके बाद शर्मा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर सवाल
इस याचिका की सुनवाई के दौरान इलेक्शन कमीशन और गोविंद सिंह राजपूत की ओर से यह तर्क दिया गया कि यह याचिका सुनवाई के योग्य नहीं है, क्योंकि मामला पहले ही पेंडिंग है। उनके अनुसार यह याचिका जनहित में नहीं बल्कि व्यक्ति विशेष के लिए दायर की गई है।
मीडिया प्रकाशन का डर
कोर्ट में याचिका पर सुनवाई के दौरान गोविंद सिंह राजपूत के अधिवक्ताओं ने यह डर जताया कि इस मामले की मीडिया में अधिक प्रचारित किया जाएगा। हालांकि, कोर्ट ने इस पर कोई आदेश जारी नहीं किया और मीडिया प्रकाशन पर कोई रोक नहीं लगाई।
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हाई कोर्ट का रुख
हाई कोर्ट ने यह माना कि केवल यह कहना कि मामला पेंडिंग है, कोई तर्क नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यदि इलेक्शन कमीशन ने इसे सुनवाई के योग्य नहीं माना था तो इसे खारिज कर देना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। कोर्ट ने इस मामले को पिछले साल दायर याचिका के साथ जोड़ते हुए अगले सुनवाई की तारीख 9 जनवरी तय की।
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