आनंद माइनिंग की याचिका खारिज, 443 करोड़ की वसूली पर हस्तक्षेप से हाईकोर्ट का इनकार

Neel Tiwari | Sept 16, 2026, 19:33 IST
anand-mining-443-crore-high-court-order
भाजपा विधायक संजय पाठक से जुड़ी आनंद माइनिंग को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। कोर्ट ने कंपनी की याचिका खारिज कर दी। जांच रिपोर्ट में 443.04 रु करोड़ की वसूली राशि बताई गई है। अंतिम देनदारी अभी तय नहीं हुई है। कलेक्टर चार महीने में फैसला करेंगे।

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

  • आनंद माइनिंग पर 2004 से 2017 तक ज्यादा खनन का आरोप है।
  • मामला जबलपुर के सिहोरा क्षेत्र की दो लौह अयस्क खदानों से जुड़ा है।
  • जांच रिपोर्ट में ₹443.04 करोड़ जमा कराने की बात कही गई।
  • कंपनी ने जांच और नोटिस की कार्रवाई हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
  • हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर मामला कलेक्टर के पास भेज दिया है।

भाजपा विधायक संजय पाठक से जुड़ी आनंद माइनिंग को राहत नहीं मिली। जबलपुर हाईकोर्ट ने कंपनी की रिट याचिका खारिज कर दी। मामला ₹443 करोड़ से ज्यादा की संभावित खनिज वसूली से जुड़ा है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की बेंच ने सुनवाई की। आदेश 8 सितंबर को पारित हुआ था। यह आदेश 16 सितंबर को सामने आया है।



सिहोरा की दो खदानों से जुड़ा है पूरा विवाद

मामला जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील से जुड़ा है। आनंद माइनिंग की टिकरिया और प्रतापपुर में लौह अयस्क खदानें हैं। कंपनी इन खदानों में खनन करती रही है। टिकरिया खदान का पट्टा 1987 से 2037 तक है। प्रतापपुर खदान का पट्टा 1978 से 2028 तक है। राज्य ने इन खदानों में पुराने खनन की जांच कराई थी।



2004 से 2017 के खनन की हुई जांच

राज्य ने 23 अप्रैल 2025 को जांच समिति बनाई थी। समिति ने वर्ष 2004 से 2017 तक के खनन को देखा। जांच में तय सीमा से ज्यादा खनन का आरोप सामने आया। समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू हुई। इसके बाद कलेक्टर ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किए।



दो खदानों पर ₹234 करोड़ से ज्यादा की मांग

हाईकोर्ट के आदेश में दोनों नोटिसों की रकम बताई गई है। टिकरिया के लिए ₹113.81 करोड़ की वसूली प्रस्तावित है। प्रतापपुर के लिए ₹120.69 करोड़ की वसूली प्रस्तावित है। दोनों रकम जोड़ने पर यह ₹234.50 करोड़ से ज्यादा है। ये रकम खनन से जुड़ी कथित देनदारी के आधार पर मांगी गई है। कंपनी ने इसी कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।



जांच रिपोर्ट में ₹443 करोड़ की राशि क्यों आई

मामले में जांच रिपोर्ट की एक और रकम सामने आई है। रिपोर्ट के अंतिम हिस्से में ₹443.04 करोड़ जमा कराने की बात है। इसके साथ GST की राशि जमा कराने का भी उल्लेख है। यह रकम संबंधित कंपनियों से जमा कराने की बात कही गई थी। हाईकोर्ट ने इसे अंतिम वसूली आदेश नहीं माना है। इसलिए अभी कंपनी पर ₹443 करोड़ का जुर्माना तय नहीं हुआ है।



कंपनी ने जांच प्रक्रिया पर उठाए थे सवाल

आनंद माइनिंग ने जांच समिति के गठन पर सवाल उठाए थे। कंपनी ने समिति के अधिकार को लेकर भी आपत्ति जताई थी। उसने जांच रिपोर्ट की सामग्री नहीं देने का आरोप लगाया। कंपनी ने कहा कि उसे जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए। कंपनी ने अपने वैध खनन पट्टों का भी हवाला दिया। उसने हाईकोर्ट से पूरी कार्रवाई रद्द करने की मांग की थी।



हाईकोर्ट ने इस चरण पर दखल से इनकार किया

हाईकोर्ट ने कहा कि कलेक्टर के सामने मामला अभी लंबित है। कलेक्टर ने कंपनी की अंतिम देनदारी अभी तय नहीं की है। इसलिए इस चरण पर कोर्ट का हस्तक्षेप उचित नहीं है। कोर्ट ने जांच रिपोर्ट को भी अंतिम वसूली आदेश नहीं माना। उसने कहा कि वास्तविक विवाद पर पहले कलेक्टर को फैसला करना है। इस आधार पर कंपनी की याचिका खारिज कर दी गई।



कंपनी को अपना पक्ष रखने के कई मौके मिले

कोर्ट ने कहा कि कंपनी को कई अवसर दिए गए थे। एक मामले में कंपनी को आठ मौके मिले थे। दूसरे मामले में नौ मौके दिए गए थे। करीब छह महीने तक कार्रवाई चलने की बात आदेश में है। इसके बावजूद कंपनी ने अंतिम जवाब दाखिल नहीं किया था। कोर्ट ने इसी वजह से प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन की दलील नहीं मानी।



कलेक्टर को अब चार महीने में फैसला करना है

हाईकोर्ट ने कलेक्टर जबलपुर को कार्रवाई पूरी करने को कहा है। कलेक्टर को कंपनी की सभी आपत्तियां देखनी होंगी। जांच रिपोर्ट और संबंधित रिकॉर्ड भी देखे जाएंगे। कंपनी को प्रभावी सुनवाई का मौका देना होगा। इसके बाद कलेक्टर को कारण बताकर अंतिम आदेश देना होगा। कोर्ट ने प्रमाणित प्रति मिलने के बाद चार महीने में फैसला करने की अपेक्षा जताई है।



हाईकोर्ट ने देनदारी पर कोई राय नहीं दी

कोर्ट ने साफ किया कि उसने कंपनी की वास्तविक देनदारी तय नहीं की है। उसने खनन की मात्रा पर भी अंतिम राय नहीं दी है। कोर्ट ने ₹443.04 करोड़ को अंतिम जुर्माना नहीं बताया है। यह रकम जांच रिपोर्ट में जमा कराने के लिए कही गई थी। अंतिम रकम कलेक्टर के फैसले से तय होगी। कंपनी को उस फैसले के खिलाफ कानूनी रास्ता भी मिलेगा।



आनंद माइनिंग का संजय पाठक परिवार से क्या संबंध है

आनंद माइनिंग का नाम भाजपा विधायक संजय पाठक परिवार से जुड़ा रहा है। कंपनी की वेबसाइट पर नर्मदा पाठक और यश पाठक पार्टनर बताए गए हैं। संजय पाठक विजय राघवगढ़ से भाजपा विधायक हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में कंपनी को पाठक परिवार से जुड़ा बताया गया है। हालांकि मौजूदा हाईकोर्ट मामले में संजय पाठक पक्षकार नहीं हैं। कोर्ट के आदेश में भी उनके खिलाफ कोई निष्कर्ष नहीं है।



अब पूरे मामले की अगली बड़ी कड़ी क्या होगी

हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद मामला कलेक्टर के पास रहेगा। अब कलेक्टर कंपनी के जवाब और रिकॉर्ड की जांच करेंगे। जांच रिपोर्ट में बताई गई रकम भी उनके सामने रहेगी। कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। इसके बाद अंतिम आदेश जारी किया जाएगा। इसी आदेश से वास्तविक देनदारी की तस्वीर साफ होगी।



443 करोड़ रु की रकम पर जबलपुर कलेक्टर लेंगे फैसला

इस पूरे मामले में सबसे अहम बात रकम को लेकर है। जांच रिपोर्ट में 443.04 करोड़ रु जमा कराने की बात है। लेकिन हाईकोर्ट ने इसे अंतिम जुर्माना नहीं माना है। अंतिम देनदारी का फैसला कलेक्टर को करना है। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि कंपनी को 443 करोड़ रुपए भरने का अंतिम आदेश मिल गया है।



हाईकोर्ट ने केवल कंपनी की चुनौती को खारिज किया है। लेकिन जबलपुर कलेक्टर के रिकवरी आदेश को खारिज ना करना, अब आनंद माइनिंग के लिए मुसीबत का सबक बन सकता है।



यह खबरें भी पढ़ें...



भोज वेटलैंड अतिक्रमण NGT सख्त, बोला अतिक्रमण डकैती से भी बड़ा अपराध है



शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर, बढ़ेगी MP TET आवेदन की आखिरी तारीख



एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला-70, 80, 90 फीसदी वेतन का नोटिफिकेशन रद्द



जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी के विखंडन पर PIL, हाईकोर्ट ने सरकार को दिया नोटिस



Tags:
  • जबलपुर हाईकोर्ट
  • GST
  • याचिका खारिज
  • कारण बताओ नोटिस
  • भाजपा विधायक संजय पाठक