बीजेपी की घोषणा अटकी, बैठक आगे: कार्यसमिति बनी नहीं, ओरछा में पहली कार्यसमिति से पहले ही प्लान तैयार
मध्यप्रदेश भाजपा में दिलचस्प स्थिति बन गई है। एक तरफ सरकार की तरह सिस्टम और कैबिनेट स्टाइल में संगठन चलाने की बात हो रही है। दूसरी तरफ प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल अब तक नई कार्यसमिति की घोषणा नहीं कर पाए हैं। इसी बीच ओरछा में पहली कार्यसमिति बैठक बुलाने की तैयारी शुरू हो गई है। यानी टीम पूरी नहीं, लेकिन मीटिंग का रोडमैप तैयार है।
ओरछा से पावर मॉडल की शुरुआत?
भगवान राम की नगरी ओरछा में पहली कार्यसमिति बैठक करने का फैसला लिया गया है। इसे संगठन की नई शुरुआत और प्रतीकात्मक संदेश के तौर पर पेश किया जा रहा है। लेकिन सवाल यही है जब कार्यसमिति पूरी घोषित नहीं हुई, तो बैठक किस टीम के साथ?
अध्यक्ष बने, पर टीम अधूरी
हेमंत खंडेलवाल को प्रदेश अध्यक्ष बने काफी समय हो चुका है। इसके बावजूद अब तक पूरी कार्यसमिति की आधिकारिक घोषणा नहीं हो सकी है। संगठन के अंदर इसे लेकर सुगबुगाहट भी है, क्योंकि बड़े बदलाव और नए चेहरों की बात लगातार कही जा रही है।
सरकार की तर्ज vs जमीनी हकीकत
प्रदेश में सरकार लगातार कैबिनेट बैठकों और फैसलों के जरिए एक्टिव दिख रही है। उसी तर्ज पर संगठन को भी ‘सत्ता स्टाइल’ में चलाने की बात कही जा रही है। जहां प्लानिंग, समीक्षा और निर्णय तय समय पर हों। लेकिन जमीनी हकीकत में टीम गठन और घोषणा अभी भी अधूरी है।
क्या तय है अब तक?
ओरछा में मई 2026 में पहली कार्यसमिति बैठक प्रस्तावित है। यह घोषणा भोपाल में प्रशिक्षण महाअभियान की बैठक में हुई। यह खंडेलवाल के अध्यक्ष बनने के बाद पहली कार्यसमिति बैठक होगी। बैठक में 60% तक नए चेहरों को शामिल करने की चर्चा की गई। संभावित कार्यसमिति आकार 100 से ज्यादा सदस्य हो सकता है।
पहले ट्रेनिंग, फिर टीम?
13-14 मई को सभी जिलों में प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जा रहे हैं। इन वर्गों में कार्यकर्ताओं को 11 विषयों पर ट्रेनिंग दी जाएगी। यह महाअभियान 30 मई तक चलेगा। इसके बाद कार्यसमिति बैठक ओरछा में प्रस्तावित है। यानी प्रशिक्षण पहले, टीम बाद में यह क्रम सवाल खड़े कर रहा है।
जिलों में भी अधूरी तस्वीर
मोर्चा-प्रकोष्ठों को जिलाध्यक्ष और टीम बनाने के निर्देश दिए गए हैं। तेजी से नाम फाइनल करने की कवायद जारी है। हालांकि, कई जिलों में तस्वीर अभी साफ नहीं है। संकेत हैं कि जल्द घोषणा हो सकती है, लेकिन फिलहाल स्थिति प्रक्रिया में है।
बैठक पहले, ब्लूप्रिंट बाद में?
ओरछा की बैठक को संगठन का ब्लूप्रिंट बताया जा रहा है। लेकिन बिना पूरी टीम के क्या यह बैठक सिर्फ औपचारिक बनकर रह जाएगी, या यहीं से असल फैसले निकलेंगे यह देखना होगा।
सरकार vs संगठन
सरकार: कैबिनेट तय, फैसले नियमित, अमल तेज।
संगठन: बैठक तय, लेकिन टीम अधूरी, घोषणा लंबित।
यह अंतर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल बनकर सामने है।
ओरछा की कार्यसमिति बैठक को भाजपा संगठन का बड़ा मोड़ बताया जा रहा है। लेकिन असली परीक्षा इससे पहले है। क्या संगठन अपनी तय समयसीमा में टीम घोषित कर पाएगा, या सत्ता स्टाइल का दावा सिर्फ रणनीति तक सीमित रह जाएगा?
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